रोजे के जिस्मानी व रूहानी फायदे

रोजे के जिस्मानी व रूहानी फायदे

इस्लाम धर्म का आदेश किसी न किसी हिकमत व फलसफे पर आधारित होता है।

JagranThu, 06 May 2021 07:05 AM (IST)

इस्लाम धर्म का आदेश किसी न किसी हिकमत व फलसफे पर आधारित होता है। रोजे का हुक्म इंसान के आध्यात्मिक और शारीरिक इलाज के लिए आया है। जब एक रोजेदार अपने अल्लाह के हुक्म से हलाल चीजों के उपयोग से रुक जाता है। तो फिर वह हमेशा के लिए हराम की गई चीजों के करीब कैसे फटक सकता है। अरब में जब घोड़ों की सवारी का रिवाज था तो वहां के लोग घोड़ों को मेहनती और फुर्तीला बनाने के लिए भूखा प्यासा रखते थे। इसकी वजह से घोड़े भी भूख की शिद्दत और प्याज की शिद्दत झेलने के काबिल हो जाते थे। पहले अरब इन घोड़ों को रोजेदार घोड़े कहते थे। इस तरह घोड़ों की गिजा को कम करके उन्हें युद्ध के लिए तैयार किया जाता था। इसी तरह रोजा भी मोमिनों को जिस्मानी और आध्यात्मिक तरीके से मजबूत बनाने के लिए है। रोजे के विभिन्न शारीरिक फायदे हैं। अल्लाह तआला की अपने बंदों पर बहुत सारी इनायत है। रोजा इनमें से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के माहिर डाक्टर जोसेफ ने साबित किया है कि रोजे की वजह से गुर्दे की बीमारी, पैरों में होने वाली सूजन, जोड़ों के पुराने दर्द आदि खत्म हो जाते हैं।

- युसूफ अंसारी, केंद्रीय पर्यवेक्षक कौमी काउंसिल बराय फरोग उर्दू।

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डा. यूएस वर्मा सनातन वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष बने

जागरण संवाददाता, रांची : राष्ट्रीय सनातन वाहिनी ने बीएयू के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डा. यूएस वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष झारखंड नियुक्त किया है। वाहिनी के संस्थापक सर्वानंद हरेकृष्ण ने कहा कि ऊर्जावान, कर्मठ और सेवाभावी डा. वर्मा नियुक्त् कर सनातन वाहिनी के उद्देश्य के अनुरूप संगठन के विस्तार हेतु निर्देश दिए गए। वे लोगों को राष्ट्र की मूल धारा से जोड़ने का प्रयास करेंगे। डा. वर्मा निश्शुल्क चिकित्सा शिविर लगाकर लोगों की सेवा करते रहे हैं।

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