Ayushman Bharat: आयुष्मान योजना बनी जीवन का वरदान, झारखंड के 57 लाख परिवार जुड़े

Ayushman Bharat Yojana Jharkhand News इस योजना के अंतर्गत 9 लाख लाभुकों को झारखंड में अबतक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई है। 932 करोड़ इलाज में खर्च हुए। इनमें 821 करोड़ रुपये का इलाज गैर सरकारी अस्पतालों में हुआ है।

Sujeet Kumar SumanThu, 23 Sep 2021 04:08 PM (IST)
Ayushman Bharat Yojana इस योजना के अंतर्गत 9 लाख लाभुकों को झारखंड में अबतक चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

रांची, स्टेट डेस्क। आज से ठीक तीन वर्ष पूर्व आयुष्मान योजना का शुभारंभ करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ख्वाब दिखाया था कि बीमार लोगों के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। बात अक्षरश: सही साबित हो रही है। झारखंड में पिछले तीन वर्षों में नौ लाख से अधिक लोगों ने आयुष्मान योजना के तहत अपना मुफ्त इलाज कराया है। इनमें से कई ऐसे थे, जिनकी जान पर बन आई थी। किसी के हृदय का आपरेशन होना था, तो कोई कैंसर से जूझ रहा था।

पैसे के अभाव में गरीब आदमी के प्राणों पर संकट था, ऐसे में आयुष्मान योजना इनके लिए संजीवनी बन गई। सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाकर ये नौ लाख लोग आज स्वस्थ जिंदगी जी रहे हैं। आयुष्मान योजना का नाम सुनते ही इनके चेहरों पर मुस्कान खिल जाती है। परिवार संग प्रधानमंत्री को दिल से दुआएं देते हैं। झारखंड से आयुष्मान योजना का खास जुड़ाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2018 को झारखंड से ही विश्व की इस सबसे बड़ी महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ किया था।

केस 1

मिला नया जन्म

आयुष्मान भारत नहीं होता, तो जिंदगी नहीं बचती। यह कहना है, कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड के ग्राम सांथ निवासी स्वर्गीय अशोक राम की पत्नी मंदोदरी देवी का। कुछ वर्ष पहले उनके हृदय में समस्या हो गई। माली हालत ठीक नहीं होने के कारण वह अपना इलाज नहीं करवा पा रही थीं। आयुष्मान भारत ने उन्हें एक नया जन्म दिया। वर्ष 2019 में लगभग तीन लाख रुपये खर्च हुए थे। इसकी भरपाई मेडिका अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना से हुई।

केस 2

अच्छे अस्पताल में इलाज से बची जान

जनवरी 2019 में पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला के दीघा गांव निवासी सिंगरी समद के पैरोटिड ग्लैंड ट्यूमर का आपरेशन कर जान बचाई गई थी। ट्यूमर बड़ा होकर कैंसर में तब्दील हो गया था। ट्यूमर का आकार मरीज के चेहरे से भी बड़ा था। सर्जरी के दौरान फेशियल नर्व को बचाना चुनौतीपूर्ण था। आंखों की रोशनी जा सकती थी। मुंह टेढ़ा हो सकता था। भोजन की नली बंद हो सकती थी। तीन चिकित्सकों की टीम ने ब्रह्मानंद अस्पताल में आपरेशन किया था। आयुष्मान योजना का लाभ नहीं मिलता तो इस अस्पताल में इलाज नहीं करवा पाते।

केस 3

स्वीटी की जान बच गई

नवंबर 2018 में रामगढ़ जिले के चितरपुर गांव की रहने वाली स्वीटी की जान बचाई गई थी। उसके हाथ, पैर व शरीर के अन्य हिस्से सूज गए थे। शरीर में खून की काफी कमी थी। स्वजन के पास पैसे नहीं थे। रांची सदर अस्पताल में योजना के तहत इलाज हुआ। स्वीटी की जान बच गई।

केस स्टडी : 4

वर्ना पता नहीं क्या होता

मार्च 2020 में गुमला की आदिवासी महिला के छह सप्ताह के नवजात की जान आयुष्मान योजना से बची थी। नवजात के पिता सत्यनारायण के अनुसार, जन्म के बाद बच्चे का वजन 700 ग्राम से भी कम था। बच्चे को बालपन अस्पताल में भर्ती कराया गया। डा. राजेश ने इलाज किया था। वजन एक किलो से अधिक हो गया। सत्यनारायण के अनुसार, वह तो आयुष्मान योजना थी कि इस अस्पताल में बच्चे का इलाज कराकर उसे बचा लिया, वरना पता नहीं क्या होता।

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