झारखंड के कोडरमा ज‍िले के अजीत कुमार आजाद शिक्षा के साथ स‍िखा रहे योग और संगीत भी

उत्क्रमित मध्य विद्यालय चांदेडीह के प्रभारी शिक्षक अजीत कुमार आजाद बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। गायन-वादन के सहारे बच्‍चों को पढ़ाने के साथ कोरोना के दौरान ग्रामीणों को योग व आयुर्वेद से भी जोड़ने का काम क‍िया। कहते हैं योग अध्यात्म और आयुर्वेद के बिना सम्यक विकास संभव नहीं है।

M EkhlaqueSun, 05 Sep 2021 06:30 AM (IST)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय चांदेडीह के प्रभारी शिक्षक अजीत कुमार आजाद। जागरण

कोडरमा (संवाद सूत्र)। बच्चों को गायन-वादन के जरिए बड़े ही रोचक तरीके से पढ़ाने में सिद्धहस्त हैं- अजीत कुमार आजाद। शून्य निवेश इनोवेशन के लिए भी जाने जाते रहे हैं। वह उत्क्रमित मध्य विद्यालय चांदेडीह के प्रभारी शिक्षक हैं। आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। शिक्षक होने के साथ उन्होंने विविध सेवा कार्य से अपनी अलग पहचान बनाई है।

वह लाकडाउन अवधि सहित पिछले दो वर्षों से आसपास के ग्रामीणों को नियमित रूप से योगाभ्यास भी करा रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने रक्तदान व जरूरतमंदों के बीच निश्शुल्क मास्क, राशन, सैनिटाइजर सहित कई राहत सामग्री वितरण में अहम भूमिका निभाई है। आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर से उन्होंने नि:स्वार्थ सेवाकार्य की प्रेरणा ली है। पतंजलि योग समिति से जुड़ कर योगाभ्यास को जन-जन तक पहुंचाने का भी कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि योग, अध्यात्म और आयुर्वेद के बिना मौजूदा पीढ़ी के सम्यक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।

अजीत कुमार आजाद को आयुर्वेद की भी अच्छी जानकारी है। कोरोना काल में आयुर्वेदिक चिकित्सा उपायों के माध्यम से भी उन्होंने लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा करने और कोरोना पीडि़तों की सहायता करने का कार्य किया है। शिक्षा के क्षेत्र में एक नवाचारी शिक्षक भी रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण में उपलब्ध बेकार की चीजों से बिना किसी खर्च सीखने की सामग्री विकसित करने का कार्य किया है। इसके लिए जिला स्तर पर श्री अरङ्क्षबदो सोसाइटी द्वारा उन्हें सम्मान भी मिल चुका है।

संगीत में गहरी रुचि रखने वाले अजीत कुमार आजाद संगीत व‍िषय में स्नातकोत्तर हैं। उन्होंने वर्ष 2016 में विश्व सांस्कृतिक महोत्सव में ग्रैंड आर्केस्ट्रा में भाग लिया था। गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में नाम दर्ज हुआ था। इसके लिए झारखंड के कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा उन्हें राजधानी रांची में सम्मानित किया गया था। उन्‍होंने झारखंड और अपने कोडरमा ज‍िले का नाम रोशन क‍िया था। अब जबक‍ि कोरोना का संक्रमण कम हो गया है, कई चीजें सामान्‍य हो गई हैं, गांव के लोग उनके योगदान को याद करते हैं।

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