पशुओं में गला घोंटू बीमारी की संभावना, वैक्सीन नदारद

बाटम 47 के विरूद्ध 15 पशु चिकित्सक है पलामू जिले में में कार्यरत इलाज में होती है परेशानी

JagranTue, 22 Jun 2021 07:18 PM (IST)
पशुओं में गला घोंटू बीमारी की संभावना, वैक्सीन नदारद

बाटम

47 के विरूद्ध 15 पशु चिकित्सक है पलामू जिले में में कार्यरत, इलाज में होती है परेशानी फोटो: 20 डीजीजे 20 कैप्शन: मेदिनीनगर स्थित जिला राजकीय पशु चिकित्सालय संवादसूत्र, मेदिनीनगर (पलामू): पशुओं में गलाघोंटू नामक घातक बीमारी होती है। इस बीमारी में पशुओं का खाना-पीना बंद हो जाता है। इससे उनकी मौत हो जाती है। इस बीमारी से निपटने के लिए पलामू में पशुपालन विभाग के पास वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके लिए विभाग ने एक लाख 5 हजार टीका की मांग की है। बावजूद अब तक एक भी टीका उपलब्ध नहीं कराया गया है। इधर बरसात शुरू हो गई है। वर्षा ऋतु के साथ पशुओं में गला घोटू बीमारी की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में पशुओं का टीकाकरण नहीं होना सरकार के समक्ष बड़ा प्रश्न खड़ा कर रहा है। पलामू में पशुपालन विभाग का हाल यह है कि एक और वैक्सीन तो दूसरी ओर पशु चिकित्सकों की कमी भी है।

पलामू में पशु चिकित्सकों के 47 पद सृजित हैं। इसके विरुद्ध मात्र 15 पशु चिकित्सक पदस्थापित है। सरकारी नियमानुसार प्रत्येक प्रखंड में एक प्रखंड पशु चिकित्सापदाधिकारी व एक चलंत पशु चिकित्सक के पद स्वीकृत हैं। पलामू में मात्र दो प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी हैं। शेष प्रखंड की व्यवस्था चलंत पशु चिकित्सक के सहारे चल रहा है। इससे पशुपालकों को पशु सुरक्षा को ले परेशानी हो रही है। गांव में पशुओं को समय पर टीका नहीं लग रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सको के अभाव में पशुओं की मौत भी हो रही है। इससे किसानों को पशुधन का नुकसान उठाना पड़ रहा है। आंकड़े के मुताबिक पलामू में लगभग 8 लाख पालतू पशु है। नियमत: 5 हजार पशु पर एक पशु चिकित्सक की पदस्थापना होनी चाहिए। बॉक्स: मात्र छतरपुर व चैनपुर में है प्रखंड पशु चिकित्सा प्रभारी

पलामू के सभी प्रखंडों में प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी का पद रिक्त है । केवल छतरपुर प्रखंड में पशुचिकित्सक चंद्रेश्वर प्रसाद व चैनपुर में डा अजय कुमार की नियुक्ति प्रखंड पशु चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर है । शेष सभी प्रखंडों के पशुओं की चिकित्सा व्यवस्था चलंत पशु चिकित्सक के भरोसे है। जानकारी के अनुसार हरिहरगंज में डा अजय कुमार, बिश्रामपुर में डा कमलेश सिंह मोहम्मदगंज में डा सरोज केरकेट्टा, चैनपुर डा संगीता कुमारी, सतबरवा डा विनय कुमार, पांकी डा मनोज कुमार, पाटन में डा पूनम किडो, किशनपुर में डा मनीषा कुमारी, नावा बाजार में डा श्रीनाथ होनहाग, चेराई में डा मयूर कुमार, मेदिनीनगर में डा नरेंद्र सिंह ,डॉ जैनी आभा व डा रामप्रवेश राम पदस्थापित है। यह सभी चिकित्सक चलंत पशुचिकित्सा के पद पर कार्यरत हैं। बॉक्स: प्रभावित होती है कई योजना प्रखंडों में पशु चिकित्सक के नहीं रहने के कारण सरकार की कई योजना प्रभावित होती है। समय पर पशुओं को टीकाकरण नहीं होता है। पशुओं के स्वास्थ्य के बारे में लोगों को जागरुक नहीं किया जाता है । इसके अलावा अन्य कई योजनाओं का प्रचार प्रसार भी समय पर नहीं हो पाता है। वर्तमान में पदस्थापित पशु चिकित्सक कम रहने के कारण गांव में नहीं जा पाते हैं । सरकारी बैठकों में ही अधिक समय देते हैं । बॉक्स झोलाछाप चिकित्सकों के सहारे है पशुपालक

सरकारी पशु चिकित्सक की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं का चिकित्सा का जिम्मा झोलाछाप डॉक्टरों पर है। कथित पशु चिकित्सक किसानों से मनमाना राशि वसूल कर इलाज करते हैं । इससे कई बार जानकारी के अभाव में पशुओं की मौत भी हो जाती है। इस प्रकार किसानों का दोहरा आर्थिक शोषण होता है । बॉक्स: क्या कहते हैं जिला पशुपालन पदाधिकारी पलामू के जिला पशुपालन पदाधिकारी डा मिथिलेश कुमार सिंह का कहना है कि गला घोंटू बीमारी से निपटने के लिए वैक्सीन की मांग विभाग से की गई है । प्रत्येक प्रखंड में 5000 डोज की मांग की गई है । अभी तक वैक्सीन उपलब्ध नहीं हुई है । डा सिंह ने कहा कि पलामू में पहले से ही पशु चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में वैक्सीन उपलब्ध नहीं होने पर पशुओं में बीमारी फैलने के बाद रोकथाम करना मुश्किल हो जाएगा ।

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