नक्सली मामले में गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीणों ने घेरा थाना

नक्सली मामले में गिरफ्तारी के विरोध में ग्रामीणों ने घेरा थाना

संवाद सूत्र सेन्हा (लोहरदगा) लोहरदगा जिले के सेरेंगदाग थाना पुलिस द्वारा नक्सली मामले में चार

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 09:31 PM (IST) Author: Jagran

संवाद सूत्र, सेन्हा (लोहरदगा) : लोहरदगा जिले के सेरेंगदाग थाना पुलिस द्वारा नक्सली मामले में चार लोगों को जेल भेजे जाने का ग्रामीणों ने विरोध किया है। सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुषों ने सेन्हा थाना पहुंचकर थाने का घेराव किया है। जेल भेजे गए आरोपितों को ग्रामीण बेकसूर बता रहे थे। ग्रामीणों ने पुलिस से जेल भेजे गए चारों आरोपियों को अविलंब रिहा करने की मांग की है। ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की है। ग्रामीणों का कहना है कि चपाल गांव निवासी प्रकाश उरांव, जुड़नी गांव निवासी खिलेश्वर खेरवार, सनई गांव निवासी कपिद्र खेरवार और खाम तोतरो गांव निवासी सुरेश खेरवार निर्दोष है। पुलिस ने पहले इन्हें पूछताछ के लिए सेन्हा थाना बुलाया, इसके बाद पुलिस ने चारों को सेरेंगदाग थाना पुलिस के माध्यम से जेल भेज दिया। जेल भेजे गए चारों आरोपितों को नक्सलियों से कोई संबंध नहीं है। पुलिस अविलंब इन्हें रिहा करे। ग्रामीण चार घंटे तक सेन्हा थाना के बाहर अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। मामले की सूचना मिलने के बाद डीएसपी परमेश्वर प्रसाद, एसडीओ अरविद कुमार लाल, सेन्हा बीडीओ अशोक कुमार चोपड़ा, सीओ हरिश्चन्द्र मुंडा, सेन्हा थाना प्रभारी सहित भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती सेन्हा थाना के बाहर कर दी गई थी। डीएसपी परमेश्वर प्रसाद ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के जिला अध्यक्ष मोजम्मिल अहमद ने भी सेन्हा थाना पहुंच कर ग्रामीणों से बात करते हुए उन्हें समझाने का प्रयास किया। बाद में पुलिस अधिकारियों और प्रतिनिधियों द्वारा समझाए जाने के बाद ग्रामीण माने। ग्रामीणों ने कहा कि दोषी और नक्सलियों से संबंध रखने वाले लोगों को पुलिस जेल भेजती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। बेकसुर लोगों को जेल भेजने पर विरोध किया जाएगा। जंगल में उनकी जिदगी नारकीय हो गई है। माओवादी उन्हें धमकाते हैं। जान से मारने की धमकी देते हैं। खाना देने को कहा जाता है। इधर पुलिस भी उन्हें प्रताड़ित करती है। ऐसे में वे करें तो क्या करें। चार घंटे तक प्रदर्शन करने के बाद ग्रामीण पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और प्रतिनिधियों के समझाने के बाद माने।

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