कटने लगे धान, सजने लगे खलिहान

एक ओर तीनों कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद किसा

JagranSun, 21 Nov 2021 10:29 PM (IST)
कटने लगे धान, सजने लगे खलिहान

संवाद सूत्र, मरकच्चो (कोडरमा): एक ओर तीनों कृषि कानून वापस लेने के ऐलान के बाद किसान जगह-जगह अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं, इससे इतर मरकच्चो में किसान अपने खेत में धान काटने व खलिहान सजाने में लगे हैं। यही जीविका का साधन है। न जाने इस फसल के साथ कितनी उम्मीदें बंधी हैं। किसी की बेटी की शादी, किसी की बच्चों की पढ़ाई, किसी की मां की दवाई की आस पूरी होगी। सो पूरी तन्मयता के साथ काम में जुटे हैं।

इस माह में कृषक परिवार के सदस्य जो प्रदेश में काम करते हैं वह भी धान काटने के लिए घर आ जाते हैं। धान पक कर खेतों में तैयार हो गया। सब काम छोड़कर किसान सपरिवार धान काटने में जुट जाते हैं। दिनचर्या ऐसी होती है कि सुबह होते ही किसान खेतों पर चले जाते हैं। महिलाएं खलिहानों को गोबर व मिट्टी से लीपती हैं, ताकि धान में कंकड़ ना हो। कुछ सदस्य धान काटने और कुछ सदस्य धान को खेतों से उठाकर खलिहान में लाने में पूरी तरह से व्यस्त हो जाते हैं। यह पूछने पर कि कृषि कानून वापस लेने के पीएम के ऐलान को किस रूप में देख रहे हैं, मरकच्चो के किसान उपेंद्र सिंह, राजू सिंह ,दशरथ महतो, रामी महतो ,महेंद्र प्रताप सिंह, सुरेश सिंह कहते हैं, हमें इससे कोई लेना-देना नहीं। हमें तो मेहनत कर अच्छी कमाई करनी है ताकि हमारी उम्मीदें पूरी हों। उनका कहना है कि यह महीना खेती के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस माह में हमें एक साथ धान काटने, आलू लगाने, गेहूं लगाने समेत कई कामों को अंजाम देना पड़ता है। जिसके कारण व्यस्तता अधिक बढ़ जाती है। कार्तिक और अगहन का महीना उत्पादकता के ²ष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। अगहन का महीना हमारे लिए सुख भरा महीना कहा जाता है। खेत से लेकर खलिहान तक सोने जैसी धान की बालियां देख मन प्रफुल्लित होता है। अच्छी बारिश के कारण उत्पादन बंपर हुआ है। अब कीमत अच्छी मिल जाए इसी का इंतजार है।

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