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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में युद्धस्तर पर करें कार्य

खूंटी : जिला पर्यावरण समिति की बैठक मंगलवार को उपायुक्त सूरज कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित हुई। बैठक के दौरान उपायुक्त ने प्रदूषण की रोकथाम तथा प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने निर्देशित किया कि जिले में पर्यावरण संरक्षण एक्ट व लाउडस्पीकर एक्ट के मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाए।

मौके पर उपायुक्त ने बताया कि वायु, मिट्टी और जल प्रदूषण का संभावित कारण है कूड़ा। आमजनों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे कूड़े की छंटाई करें, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की मूल आवश्यकता है। उनके द्वारा कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत को निर्देश दिया गया कि जिले के सभी वार्डों में घर-घर जाकर कूड़े-कचरे को एकत्रित किया जाए। साथ ही लोग घरों से ही सूखा कचरा व गीले कचरे का अलगाव करना सुनिश्चित करें। ताकि उचित रूप से अपशिष्ट प्रबंधन किया जा सके।

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विद्यालयों में बच्चों को मिलेंगे डस्टबिन बनाने के प्रोजेक्ट

मौके पर उपायुक्त ने कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत को निर्देशित किया कि विद्यालयों के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें विद्यालयों में बच्चों को डस्टबिन बनाने के प्रोजेक्ट दिए जाएं। उन्होंने कहा कि ठोस और तरल कचरे का प्रबंधन बेहतर कदम होगा। इनमें बच्चों द्वारा ठोस और तरल कचरे के लिए डस्टबिन बनाए जाएंगे इस माध्यम से उचित कचरा प्रबंधन के प्रति जागरूकता लाई जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाए।

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ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दिए दिशा-निर्देश

इसी क्रम में उपायुक्त ने बताया कि लाउडस्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य ध्वनि उत्पन्न करने वाले यंत्र का उपयोग सार्वजनिक स्थल पर किया जा रहा हो तो उसकी सीमा उस क्षेत्र के पैमाने से निर्धारित डीबी (ए) से अधिक नहीं होना चाहिए। लाउडस्पीकर या माइक सेट का उपयोग बिना जिला दंडाधिकारी या अन्य सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना ना किया जाए। रात 10 से 6 बजे के मध्य किसी को भी ध्वनि विस्तारक यंत्र ड्रप या ध्वनि उत्पन्न करने वाले किसी भी यंत्र के उपयोग की अनुमति नहीं है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि इस दिशा में सघन जांच अभियान चलाया जाय। नगर पंचायत के दायरे में नियम उल्लंघन की स्थिति में 2000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए और लाउडस्पीकर एक्ट के उल्लंघन की स्थिति में विधिसम्मत कार्रवाई की जाय। उन्होंने कहा कि अस्पताल, शिक्षण संस्था, अदालत, धर्म संस्थान के कम से कम 100 मीटर दूरी तक विशेष ध्यान दिया जाए। इसी प्रकार इन में मीटर की दूरी तक प्रेशर हार्न म्यूजिकल या अन्य किसी भी प्रकार की एंपलीफायर का उपयोग प्रतिबंधित है। 

मौके पर उपायुक्त ने जिला अभियंता को निर्देश दिया कि सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक अपशिष्ट का प्रयोग करें। साथ ही कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया कि समाहरणालय व अन्य एक स्थल पर पीपीएम मीटर लगाया जाय। बैठक में प्लास्टिक क्रशर मशीन की उपलब्धता के अलावा विभिन्न व्यवसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा प्रदूषण की रोकथाम के उपायों पर चर्चा की गयी। साथ ही उन्होंने निर्देश दिया कि हर थाना में एक-एक हैंडहेल्ड सोनोमीटर उपलब्ध कराए जाए।

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वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए दिए गए आवश्यक निर्देश

मौके पर उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया कि सभी प्रखंड एवं पंचायत में वायु व वर्षा मापक यंत्र की उचित संचालन को सुनिश्चित किया जाए। साथ ही कार्यालयों में विड मीटर व हाइड्रोमीटर व वर्षा मापक यंत्र उपलब्ध किया जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने वन विभाग के पदाधिकारी को निर्देशित किया कि वनों में लगातार अवैध रूप से पेड़ों की कटाई के विरुद्ध अभियान चलाया जाए। साथ ही औचक निरीक्षण कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि वन विभाग महीने में 15 दिन इस दिशा में निरीक्षण करना सुनिश्चित करेंगे। इसी क्रम में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि सभी जल स्रोतों से पेयजल/ पानी की गुणवत्ता की जांच की जाए। इस कार्य के लिए सभी जलसहिया को धरातल पर कार्य करने के निर्देश दिए जाए। साथ ही निर्देश दिया गया कि पांच दिनों के अंदर सभी मेजर व माइनर वाटर सप्लाई स्कीम पूर्ण की जाय। उन्होंने कहा कि इसकी समीक्षा अगली मासिक बैठक में की जाएगी।

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बायो मेडिकल वेस्ट का उचित प्रबंधन आवश्यक

जिला पर्यावरण समिति की बैठक में उपायुक्त ने सिविल सर्जन को बायो मेडिकल वेस्ट के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिया कि जिले में मलेरिया की दवा का छिड़काव किया जाना चाहिए। साथ ही वह स्थान जहां आमतौर पर पानी जमा हो जाता है, उसकी सफाई सुनिश्चित कराने के लिए कार्यपालक पदाधिकारी को निर्देश दिया गया। इस दौरान सिविल सर्जन ने बताया कि सदर अस्पताल खूंटी में बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन कलर कोडिग के आधार पर उचित रूप से की जाती है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि इन बायो मेडिकल वेस्ट के सही डिस्पोजल हेतु उचित निगरानी की जाए। मौके पर उपायुक्त द्वारा विशेष दल का गठन किया गया। इसमें उप विकास आयुक्त, परियोजना निदेशक आइटीडीए, सिविल सर्जन, कार्यपालक दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी व महिला डॉक्टर शामिल हैं। इस टीम द्वारा अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। इसी क्रम में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिले में ग्रीन बिल्डिग व वर्टिकल गार्डेन को विकसित किया जाए। साथ ही पंचायती राज पदाधिकारी को निर्देश दिया कि हर पंचायत में एक वर्टिकल गार्डन को विकसित किया जाए। मौके पर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिले की सभी इंडस्ट्रीज का औचक निरीक्षण करें।

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