विधिवत परिणय सूत्र में बंधे औपचारिक शादी के बिना साथ रह रहे 105 आदिवासी जोड़े

विधिवत परिणय सूत्र में बंधे औपचारिक शादी के बिना साथ रह रहे 105 आदिवासी जोड़े

बिरसा कालेज परिसर का नवनिर्मित स्टेडियम प्रांगण रविवार को मंडप सजावट की जगमगाहट ढोल व शहनाई की सुमधुर धुन पर 105 आदिवासी जोड़ों का विधिवत वैवाहिक सूत्र में बंधने का गवाह बना।

JagranSun, 28 Feb 2021 08:24 PM (IST)

खूंटी : बिरसा कालेज परिसर का नवनिर्मित स्टेडियम प्रांगण रविवार को मंडप सजावट की जगमगाहट, ढोल व शहनाई की सुमधुर धुन पर 105 आदिवासी जोड़ों का विधिवत वैवाहिक सूत्र में बंधने का गवाह बना। स्वयंसेवी संस्था निमित्त और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास व पहल का परिणाम हुआ कि वर्षों से औपचारिक शादी के बिना पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे 105 आदिवासी जोड़ों ने विधिवत विवाह रचाकर समाज में सम्मान से जीवन यापन करने का अधिकार प्राप्त किया। निश्चित तौर पर ऐसे जोड़ों को खोज कर विवाह मंडप तक लाने और विधिवत विवाह के लिए मनाने में स्वयंसेवी संस्था निमित्त को काफी मशक्कत करनी पड़ी होगी। इस वृहद व अनूठे आयोजन के लिए जिला प्रशासन का सक्रिय सहयोग भी सराहनीय है। उल्लेखनीय है कि रविवार को यहां परिणय सूत्र में विधिवत बंधने के लिए आए सभी 105 जोडे़ वर्षों से लिव इन रिलेशन (ढुकू) में साथ रह रहे थे। विवाह रचाने आए अधिकांश जोड़ों के साथ उनके बच्चे भी शामिल थे, वहीं कई जोड़े उम्रदराज भी थे।

विवाह सूत्र में बंधे सभी जोड़ों को सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए उपहार स्वरूप कपड़े, बर्तन व अन्य जरूरी सामान भेंट किए गए। साथ ही सभी जोड़ों को मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का लाभ तथा भविष्य में रजिस्टर्ड विवाह प्रमाण पत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा। विवाह समारोह के बाद प्रीति भोज का भी आयोजन हुआ, जिसमें विवाह बंधन में बंधे जोड़ों के स्वजन व कुटुंब भी शामिल हुए। इस अवसर पर समारोह में उपस्थित उपायुक्त शशि रंजन, पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर, अनुमंडल पदाधिकारी हेमंत सती, सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार, निमित्त संस्था के सचिव निकिता सिन्हा सहित अन्य पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने ससम्मान विधिवत वैवाहिक सूत्र में बंधे दंपतियों पर मंगल कामनाओं के साथ आशीष के अक्षत न्यौछावर किए। इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में शामिल सभी जोड़े सरना धर्मावलंबी थे। सरना रीति रिवाज से आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह को विधिवत पाहन ने संपन्न कराया।

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बिना शादी के साथ रहने वालों को आदिवासी समाज में कहा जाता है ढुकू

आदिवासी समाज में औपचारिक शादी के बिना पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे जोड़ों को ढुकू कहते हैं। ऐसे जोड़ों को समाज से मान्यता नहीं मिलने के कारण उन्हें सामाजिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के सामाजिक प्रथा के कारण ऐसे जोड़ों में अगर पुरुष की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी जमीन व संपत्ति पर उसकी पत्नी से हुए बच्चों को अधिकार नहीं मिलता। वहीं, महिला की असामयिक मृत्यु होने पर सामूहिक कब्रिस्तान में अंतिम क्रियाकर्म का अधिकार नहीं दिया जाता। साथ ही उनके बच्चों को भी सामाजिक परेशानी का दंश झेलना पड़ता है। आदिवासी समाज में यह भी प्रावधान है कि विधिवत शादी की मान्यता के लिए समाज व कुटुंब के लोगों को भोज खिलाना पड़ता है। लेकिन, गरीबी व आर्थिक तंगी के कारण बहुत से जोड़े कुटुंब व समाज को भोज खिलाने में असमर्थ होते हैं। यही कारण है कि औपचारिक शादी के बिना साथ जीवन यापन करना उनकी मजबूरी हो जाती है। ऐसे ही जोड़ों को समाज से मान्यता दिलाने और और सम्मान से जीवन यापन करने के लिए निमित्त संस्था द्वारा ऐसे सामूहिक विवाह कार्यक्रम का आयोजन किया जाता रहा है। वर्ष 2016-17 से किए जा रहे ऐसे कार्यक्रमों में अब तक 630 जोड़ों का विधिवत विवाह कराया गया है।

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