बारिश नहीं होने से कुंडहित के खेतों में धान मरने के कगार पर

बारिश नहीं होने से कुंडहित के खेतों में धान मरने के कगार पर

संवाद सहयोगी कुंडहित (जामताड़ा) पंद्रह दिनों से मौसम की बेरुखी के कारण कुंडहित प्रखंड

JagranSat, 17 Oct 2020 05:13 PM (IST)

संवाद सहयोगी, कुंडहित (जामताड़ा): पंद्रह दिनों से मौसम की बेरुखी के कारण कुंडहित प्रखंड क्षेत्र में खरीफ फसल धान पानी की कमी के कारण मरने के कगार पर है। 26 सितंबर के बाद प्रखंड क्षेत्र में बारिश का अकाल पड़ा है। खेत में लगे अधिकांश धान के पौधे सूख कर मर रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए तालाब, डोभा से पंप के सहारे पानी लाकर खेतों की प्यास बुझाने की कोशिश कर रहे हैं पर यह प्रयास कारगर साबित नहीं हो रहा। क्षेत्र के किसान पांच वर्षों से सुखाड़ की मार झेल रहे हैं। इस बार भी चिता सता रही है कि कहीं आधी फसल मर न जाए।

इस साल कुंडहित प्रखंड क्षेत्र में जून, जुलाई, अगस्त व सितंबर महीना में समुचित बारिश होने से किसान अच्छी खेती की उम्मीद कर बैठे थे। सरकारी आकड़ों में इस वित्तीय वर्ष में 95 प्रतिशत धान का आच्छादन है। जबकि सितंबर महीना के अंतिम सप्ताह से एक बूंद बारिश नहीं हुई। बारिश के अभाव में प्रखंड के गड़जोडी, खजुरी, बागडेहरी, मुड़ाबेडिया, सुद्राक्षीपुर, बिक्रमपुर, अम्बा, गायपाथर, आमलादही, कुंडहित सहित सभी पंचायत क्षेत्र पानी के खेत सूख चुके हैं। धान का पौधा पीला पड़ने लगा है। जबकि कुंडहित प्रखंड क्षेत्र में 95 प्रतिशत लोगों केजीवन-यापन का आधार कृषि है।

---बीमा का भी लाभ नहीं मिला : लगातार सुखाड़ झेलने के बाद भी किसानों को फसल बीमा का लाभ नहीं मिला। वित्तीय वर्ष 2016-17, 2017-18, 18-19 में किसान सूखा झेल चुके हैं। जबकि वर्ष 2016-17 में 2758 किसानों, 17-18 में 5360 व 18-19 में 12761 किसानों ने फसल बीमा कराया था। वहीं वर्ष 18-19 सरकार की ओर से जामताड़ा जिला को सुखाड़ घोषित किया था। फिर भी किसानों को सूखा-राहत का लाभ नहीं मिल पाया।

---अजय बराज का लाभ नहीं : इस क्षेत्र में सिचाई की घोर कमी है। क्षेत्र में 50 सालों से अजय बराज योजना के तहत नहर का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन नहर से आज तक किसानों को पानी नसीब नहीं हुआ। हर साल विभागीय अधिकारी सब्जबाग दिखाते हैं कि इस बार खेतों को पूरा पानी मिलेगा। पर आज तक नहीं मिला। मौसम भी किसानों को लगातार दगा देने में गुरेज नहीं कर रहा। ---क्या कहते है किसान : डुमरा गांव के उज्ज्वल माजि, चंद्रडीह के परिमल घोष, प्रसादपुर के नारायण घोष ने बताया पहले जैसा खेती कार्य लाभदायक नहीं रहा। एक एकड़ जमीन में धान बीज से लेकर धान कटाई तक 8 से 10 हजार रुपए खर्च है। वहीं मौसम की बेरुखी के कारण हम किसानों को कृषि की लागत भी नहीं मिल पाती। सरकार की ओर से बीमा कराया जाता तो नुकसान में राशि मिलती।

--क्या कहते है अधिकारी : प्रखंड कृषि पदाधिकारी सदानन्द महता ने बताया इस वर्ष में जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर महीना में अच्छी बारिश हुई। सितम्बर महीनों के अंतिम सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण ऊपरी खेतों में पानी का अभाव हो गया है। इससे किसानों को नुकसान हो रहा है।

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