रोजगार की आस टूटी तो घर की ओर बढ़ा कदम

जगन्नाथ बाउरी नाला (जामताड़ा) अपराह्न साढ़े चार बजे थे। सड़क था नाला-दुमका। स्थान नाला क

JagranSat, 24 Apr 2021 12:47 AM (IST)
रोजगार की आस टूटी तो घर की ओर बढ़ा कदम

जगन्नाथ बाउरी, नाला (जामताड़ा) : अपराह्न साढ़े चार बजे थे। सड़क था नाला-दुमका। स्थान नाला का आम बगान चौक। वहीं मौजूद थे पुलिस जवानों के साथ दंडाधिकारी कुंदन कुमार दास। जामताड़ा की तरफ से दर्जन भर मजदूरों का काफिला दुमका की ओर पैदल बढ़ रहा था। तपती सड़क पर तलवा झुलस रहा था लेकिन उनके कदम नहीं रुक रहे थे। जामताड़ा में शुक्रवार का तापमान करीब 37 डिग्री सेल्सियस था।

दंडाधिकारी वहां आंशिक लाॉकडाउन के पहले दिन नियमों का उल्लंघन रोकने को ड्यूटी बजा रहे। अनायास मजदूरों को देखकर उनसे रहा नहीं गया। पूछ बैठे कि कहां जा रहे हैं। कहां से आ रहे हैं। मजदूर मास्क लगाए थे। जवाब मिला कि काम बंद हो गया। पाकुड़ घर जा रहे हैं। बस नहीं मिली। इसलिए पैदल जा रहे हैं। जान है तो जहान है। इसके पहले लॉकडाउन में परेशानी भुगत चुके हैं। घर में ही रहेंगे। अपनों के साथ..।

दंडाधिकारी ने फिर सवाल किया कि फैक्ट्री तो बंद नहीं की गई है। बस के परिचालन पर भी रोक नहीं है। फिर क्यों जामताड़ा से पैदल आ गए। जवाब में वहीं पुरानी व्यथा थी। पिछले लॉकडाउन की। एक ने इतना ही कहा कि अब घर पहुंचना है, सर। रास्ते में गाड़ी मिली तो ठीक नहीं तो अगली शाम तक पैदल गांव पहुंच जाएंगे। यही कहकर मजदूर आगे बढ़ गए। पाकुड़ के अलावा न श्रमिकों ने अपना ज्यादा परिचय दिया न अधिकारी ही आगे उनसे पूछ पाए। लेनिक स्थानीय लोग इस जत्थे को देखकर आशंकित हो गए कि फिर जून-जुलाई जैसी दर्द भरी यात्रा कोरोना की दूसरी लहर में तो नहीं देखनी पड़ेगी। उस समय भी कड़ी धूप में इसी रास्ते से मदूर प्रतिदिन महिला व बच्चों के साथ सड़क पर पांव में फफोला का दर्द झेलते हुए आगे बढ़ रहे थे।

अलबत्ता, मजदूरों को देखकर वहां के लोगों के मन में यही आया कि आंशिक लॉक डाउन व कोरोना का ़खौफ मजदूरों में हैं। इधर, बस मालिक तथा चालक भी यात्री को सेवा देने से पीछे हटने लगे हैं। मजदूरों का कहना था कि एक बस गुजरी तो हाथ दिया पर रुकी नहीं। बता दें कि नाला- दुमका तथा जामताड़ा- देवघर के लिए एक्का- दुक्का ही बस चल रही है। मजदूरों के मुताबिक वे देवघर सारठ के जोथपुर से जामताड़ा पहुंचे। वहां बस नहीं मिलने पर पाकुड़ के लिए पैदल ही रवाना हो गए। इस उम्मीद के साथ कि रास्ते पर दुमका तक बस मिल जाएगी लेकिन आगे पाकुड़ निकल जाएंगे।

मजदूरों का कहना था कि वे सभी जोथपुर में निजी कंपनी में काम कर रहे थे। कोरोना संक्रमण बढ़ने से कंपनी ने काम बंद कर दिया। फिर घर के लिए रवाना हो गए। कहा कि गुरुवार को सबेरे जोथपुर से घर के लिए निकले। कहा कि आगे बस मिलेगी तो ठीक नहीं तो पैदल पाकुड़ पहुंच जाएंगे। मजदूरों के कांधे पर बस्ता भी था।

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