भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी विश्व बैंक की 38 करोड़ की जलापूर्ति योजना

मुसाबनी प्रखंड के नौ पंचायत के नौ हजार घरों तक पाइप लाईन से पेयजल आपूर्ति करने हेतू विश्व बैंक के सहयोग से 38 करोड़ की जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया लगता है। पहले ट्रायल में ही इस योजना के गुणवत्ता की पोल खुल गई।

JagranTue, 26 Oct 2021 07:30 AM (IST)
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी विश्व बैंक की 38 करोड़ की जलापूर्ति योजना

संसू, मुसाबनी : मुसाबनी प्रखंड के नौ पंचायत के नौ हजार घरों तक पाइप लाईन से पेयजल आपूर्ति करने हेतू विश्व बैंक के सहयोग से 38 करोड़ की जलापूर्ति योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया लगता है। पहले ट्रायल में ही इस योजना के गुणवत्ता की पोल खुल गई।

शुक्रवार को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से आये पानी को संग्रह के लिए बनाए गए पांच नई जलमीनार में से दो जलमीनार में जैसे ही आपूर्ति के लिए पानी लोड किया गया वैसे ही टंकी से पानी का रिसाव शुरू हो गया। जिसमें मुसाबनी शहरी क्षेत्र के गुरुद्वारा के समीप सबसे ज्यादा 6 लाख लीटर और मुसाबनी नम्बर 2 एरिया स्थित डीवीसी के समीप बनाए गए 2 लाख 10 हजार लीटर क्षमता वाले जलमीनार से हो रहा है। डीवीसी के समीप बने जलमीनार से तो पानी के दबाव के कारण प्लास्टर उखड़ गया और व्यापक पैमाने पर लीकेज शुरू हो गया, जबकि गुरुद्वारा के समीप बने 6 लाख लीटर के जलमीनार से दो जगह से लीकेज शुरू हो गया, जबकि तीन नई जलमीनार का ट्रायल होना बाकी है। जिसमें से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थित 3 लाख 30 हजार लीटर, टुमांगकोचा में 4 लाख 50 हजार लीटर और न्यू कालोनी स्थित 70 हजार लीटर की जलमीनार शामिल है। इसके साथ ही पूर्व में एचसीएल कम्पनी द्वारा बनाए गए 2-2 लाख क्षमता वाले दो जलमीनार की मरम्मत भी ठेका कंपनी को करना है। इस योजना का काम रांची स्थित साइन इंजीनियरिग ठेका कंपनी कर रही है। इस योजना का निरीक्षण नाबार्ड के जीएम सहित विभागीय अधिकारी भी कर चुके हैं। सभी ने निरीक्षण के दौरान ठेका कम्पनी द्वारा किए जा रहे जलमीनार निर्माण सहित अन्य कार्यो की तारीफ करते हुए कहा था कि गुणवत्ता के साथ काम हो रहा है। इस मामले को लेकर प्रखंड कांग्रेस कमेटी ने जांच की मांग प्रखंड विकास पदाधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा है। बीडीओ सीमा कुमारी ने संवेदक की मौजूदगी में लीकेज की जांच की। उन्होंने ठेकेदार द्वारा कराए गए कार्य के प्रति नाराजगी जाहिर की। ज्ञात हो कि इस योजना के तहत हर दिन स्वर्णरेखा नदी से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के जरिए 80 लाख लीटर पेयजल की आपूर्ति करनी है। इसके लिए आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया गया है।

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