Tesla EV Car : नई इलेक्ट्रिक कार टेस्ला को देश में कोई टक्कर दे पाएगा, जानिए क्या है इसकी खूबियां-खामियां

EV Cars in India एलन मस्क की टेस्ला कार की भारत में आने की आहट भर से देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर में हड़कंप मच गया है। टेस्ला आने के बाद देश की कंपनियों को उसी के अनुसार अपनी कार को डिजायन करना होगा।

Jitendra SinghMon, 20 Sep 2021 06:00 AM (IST)
नई इलेक्ट्रिक कार टेस्ला को देश में कोई टक्कर दे पाएगा, जानिए क्या है इसकी खूबियां-खामियां

जमशेदपुर, जासं। टेस्ला के मॉडल-3 व मॉडल वाई का भारत में आना तय हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि क्या अभी देश में इसे कोई दूसरी कार टक्कर दे पाएगी। इतना तय है कि इसके आने से भारत में ईवी कार का बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी होने जा रहा है। टेस्ला की अपेक्षाकृत कम कीमत और देश में इसके बढ़ते प्रशंसक इसकी राह आसान बना सकते हैं।

भारत में इलेक्ट्रिक कारों का बाजार अब भी सीमित

फिलहाल देश में ईवी कार बाजार बहुत सीमित है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा, एमजी मोटर्स और हुंडई का निचले और मध्य स्तर पर कब्जा है, जबकि ऑडी, जगुआर और मर्सिडीज-बेंज जैसी विरासत लक्जरी कार निर्माताओं ने ऊंची कीमत वाले ग्राहकों पर कब्जा कर लिया है।

ईवी लाने वाले ब्रांडों में से कोई भी उनसे बिक्री बढ़ाने की उम्मीद नहीं करता है। टेस्ला के भी ऐसा ही करने की संभावना है। कार निर्माताओं के लिए रणनीति स्पष्ट है, प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के निर्माता के रूप में अपनी उपस्थिति स्थापित करें, स्थानीय असेंबली पर विचार करने से पहले बाजार का सर्वेक्षण करें। लेकिन टेस्ला कीमत और एडवांस्ड सॉफ्टवेयर के आ रही है।

ओवरऑल परफार्मेंस में टेस्ला के भारी पड़ने की उम्मीद

ओवरऑल परफार्मेंस के मामले में टेस्ला के भारी पड़ने की उम्मीद है। टेस्ला के लिए जो काम कर रहे हैं वह ओवर-द-एयर अपडेट और हल्का कर्ब वेट है, जो भारत में अपने प्रत्यक्ष प्रतिस्पर्धियों की तुलना में मॉडल-3 और मॉडल वाई दोनों को बेहतर गति देती है। सिंगल मोटर मॉडल-3 सबसे कम शक्तिशाली मॉडल है, लेकिन सबसे किफायती है। हालांकि, सुपरकार-शेमिंग 3.5 सेकंड में 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ती है। उम्मीद है कि इसकी कीमत 80 लाख रुपये से अधिक होगी, इसके ऊपर जगुआर आई-पेस होगी।

जबरदस्त सॉफ्टवेयर से लैस होगी टेस्ला

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टेस्ला के प्रसिद्ध ऑटोपायलट सिस्टम को भारत में लाया जाएगा या नहीं। अगर ऐसा है भी, तो सिस्टम मुख्य रूप से रडार के बजाय कैमरों पर निर्भर करता है, और इसलिए स्पष्ट रूप से चिह्नित सड़क सतहों पर निर्भर करता है। यह धारणा कि सड़क पर अन्य ड्राइवर स्पष्ट रूप से यातायात कानूनों का पालन करेंगे। इस तरह की चिंताओं से अप्रभावित होने पर सिस्टम को लेन-चेंज असिस्ट, एक्टिव, एडेप्टिव, ट्रैफिक-रीडिंग क्रूज़ कंट्रोल मिलता है और ट्रैफिक, पैरेलल-पार्क आदि से बाहर निकलने का रास्ता अपने आप बदल सकता है। ये सभी पहलू टेस्ला को काफी बढ़त देते हैं।

भारतीय ग्राहकों के लिए चार्जिंग सेंटर महत्वपूर्ण

फिलहाल, भारतीय ग्राहक इस बात का आकलन कर रहे हैं कि किसके पास कितने चार्जिंग स्टेशन होंगे। मर्सिडीज के पास पूरे भारत के 48 शहरों में 100 फास्ट-चार्जर का नेटवर्क है।

यदि पर्याप्त घरेलू चार्जिंग का समाधान स्थापित नहीं किया गया तो सिर्फ ब्रांड काम नहीं आएगा। भारत में एक लक्जरी ईवी लांच करने वाला पहला ब्रांड होने के नाते, इसने ऑडी और जगुआर की पसंद के द्वारा उपयोग की जाने वाली अपनी सभी चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार किया है। यह सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता के साथ-साथ चार्जिंग बुनियादी ढांचे के संबंध में सभी ईवी को एक समान रखता है। फिलहाल टेस्ला की भारत में कभी भी सुपरचार्जर नेटवर्क स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। वैश्विक स्तर पर टेस्ला अपने व्यापक ईवी पारिस्थितिकी तंत्र के कारण आंशिक रूप से ईवी स्पेस पर हावी होने में कामयाब रही है।

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