NPCC ने क्यों लिखा कि बिरसानगर में नहीं बन सकता प्रधानमंत्री आवास, सरयू ने किया सवाल

विधायक सरयू राय ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।

PM Awas in Birsanagar. बिरसानगर व बागुनहातू में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो आवासीय परिसर का निर्माण होना था। इसके लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ने एक वर्ष पूर्व सैकड़ों आवेदन भी ले लिए लेकिन आवास का काम शुरू ही नहीं हो सका।

Rakesh RanjanSat, 03 Apr 2021 09:02 AM (IST)

जमशेदपुर, जासं। जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के बिरसानगर व बागुनहातू में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो आवासीय परिसर का निर्माण होना था। इसके लिए जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति ने एक वर्ष पूर्व सैकड़ों आवेदन भी ले लिए, लेकिन आवास का काम शुरू ही नहीं हो सका। विधायक सरयू राय ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि नेशनल प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन (एनपीसीसी) ने ही हाथ खींच लिए हैं।

सरयू ने इस संबंध में झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के सचिव को पत्र लिखकर पूरी बात विस्तार से बताई है। उन्होंने लिखा है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र जमशेदपुर पूर्वी के बागुनहातु और बिरसानगर में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत दो आवासीय परिसर का निर्माण होना था। दोनों का काम आरंभ नहीं हो पाया। मुझे बताया गया है कि पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया है। मैंने इस बारे में जो सूचना आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त की है वह चौंकाने वाली भी है और व्यवस्था पर सवाल करने वाली भी है। यह सही नहीं है कि पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के कारण यह परियोजना स्थगित है। इस परियोजना का काम सरकार ने एनपीसीसी को दिया था। एनपीसीसी ने प्रस्ताव संख्या SIA/JH/MIS/108338/2019 द्वारा "राज्य पर्यावरण प्रभाव अध्ययन समिति" के पास इस परियोजना की पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव पर "राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति" की 14-16 अक्टूबर 2019 की बैठक में विचार हुआ था। पाया गया कि इस प्रस्ताव में कतिपय त्रुटियां हैं, जिनका निराकरण कर एनपीसीसी दोबारा प्रस्ताव भेजे। परंतु एनपीसीसी ने त्रुटियों को सुधार कर दोबारा प्रस्ताव नहीं भेजा।

एनपीसीसी ने बताया था कि जमशेदपुर में दामोदर नदी है

इस प्रस्ताव में निम्नांकित त्रुटियां थी, जिसका निराकरण करने का सुझाव विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने दिया था।

- परियोजना की दूरी स्वर्णरेखा नदी तट से मात्र 15 मीटर है। यदि यह स्वर्णरेखा के फ्लड जोन (बाढ़ क्षेत्र) में है तो स्वीकृति देना व्यवहारिक नहीं होगा। यानी एनपीसीसी को मूल्यांकन समिति के समक्ष तर्क सहित बताना था कि परियोजना स्थल स्वर्णरेखा नदी के बाढ़ क्षेत्र में नहीं है। बाढ़ क्षेत्र का नक्शा बनाकर एनपीसीसी को इस बारे में स्पष्टीकरण देना था।

- एक हास्यास्पद सूचना एनपीसीसी के परियोजना प्रस्ताव में भी अंकित थी कि यहां दामोदर नदी है और महिला काॅलेज, झरिया (धनबाद) है। प्रस्ताव में यह बड़ी भूल थी जिसे सुधार कर संशोधित प्रस्ताव देने के लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने कहा था।

- प्रस्ताव के साथ फार्म-1 में दिए गए दस्तावेजों पर नगर विकास विभाग के प्राधिकृत व्यक्ति का हस्ताक्षर नहीं था। प्रस्ताव के साथ शपथ पत्र भी नहीं था कि अभी तक परियोजना का काम शुरू नहीं हुआ है। इसे उपलब्ध कराने के लिये विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने निर्देश दिया था।

- प्रस्ताव के साथ प्रासंगिक भवन का नक्शा नहीं दिया गया था। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने इसे मांगा था।

- विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने भवन का भू-तकनीकी प्लान का दस्तावेज मांगा था, जो प्रस्ताव के साथ संलग्न नहीं था।

- जिस स्थान पर भवन बनना है वहां जल की उपलब्धता की विस्तृत जानकारी विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने मांगी थी।

एनपीसीसी ने प्रस्ताव वापस करने की बात कही, लेकिन क्यों

एनपीसीसी ने ये सूचनाएं "पर्यावरण विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति" को नहीं सौंपी। समिति की अगली बैठक 24 नवंबर 2020 को हुई तो इस बैठक के एक दिन पहले 23 नवंबर को एनपीसीसी ने त्रुटियां दूर नहीं की, बल्कि पत्र संख्या 1332020/PMAY/1335 दिनांक 23-11-2020 को लिखकर बताया कि इस प्रस्ताव को वापस किया जा रहा है।

इससे स्पष्ट है कि बागुनहातु में बनने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के कारण नहीं रुकी हुई है, बल्कि इसके संवेदक एनपीसीसी द्वारा विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति की बैठक में यह लिखकर देने के कारण रुकी है कि इस परियोजना को वापस किया जा रहा है। यह गंभीर बात है। क्या राज्य सरकार ने एनपीसीसी को निर्देश दिया था कि इस परियोजना को वापस लिया जा रहा है। इसके साथ ही जिस परामर्शी ने विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति को सौंपने के लिए एनपीसीसी हास्यास्पद एवं त्रुटिपूर्ण का परियोजन प्रस्ताव तैयार किया था, उस पर कोई कार्रवाई हुई।

विधायक ने दिया सुझाव, विभाग भेजे प्रस्ताव, संवेदक नहीं

सरयू ने सचिव को सुझाव दिया है कि बागुनहातु प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए नए सिरे से "विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति" के समक्ष पर्यावरण स्वीकृति के लिए आवेदन दिया जाय और विहित प्रपत्र में समिति का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाए, ताकि पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त कर परियोजना का काम शुरू हो सके। यह प्रस्ताव सीधे नगर विकास विभाग द्वारा भेजा जाना चाहिए न कि परियोजना के संवेदक के द्वारा। अनुरोध है कि उपर्युक्त विवरण के आलोक में शीघ्र उपयुक्त निर्णय लेंगे, ताकि जनहित की उपर्युक्त योजना का लाभ लाभुकों तक पहुंचाया जाए।

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