Weekly News Roundup Jamshedpur : कई पड़ाव पार कर कांग्रेस में सिद्दीकी, पढ़‍िए सियासी महकमे की अंदरूनी खबर

कांग्रेस पार्टी में शामिल होते आफताब अहमद सिद्दीकी ।
Publish Date:Wed, 23 Sep 2020 09:18 AM (IST) Author: Rakesh Ranjan

जमशेदपुर, वीरेंद्र ओझा।  siyasi adda जमशेदपुर शहर के युवा राजनीतिज्ञों में जितने राजनीतिक दल का अनुभव आफताब अहमद सिद्दीकी को है, शायद उतना किसी को नहीं होगा। समाजवादी पार्टी से कॅरियर शुरू किया, फिर लोक जनशक्ति पार्टी में चले गए। इसी बीच लोजपा छोड़कर फिर सपा से संसदीय चुनाव लड़ा। यहां से भाजपा में गए, तो फिर ओवैसी की पार्टी में चले गए।

पिछले विधानसभा चुनाव के बाद यह उम्मीद लगाई जा रही थी कि सिद्दीकी सरयू राय की पार्टी भाजमो में जा सकते हैं, लेकिन उन्होंने कांग्रेस को ही चुना। सपा में बन्ना गुप्ता के साथ काम करने का अनुभव था, जिसका अब लाभ मिलेगा। वैसे सिद्दीकी मानगो के काबिल नेताओं में शुमार किए जाते हैं। उन्हें समय की बड़ी अच्छी समझ है। वक्त की नजाकत को खूब समझते हैं। समय के साथ उनका रिश्ता अब भी है। घूमने-फिरने का शौक बीच में आया था, लेकिन अब तो निगाह ऊंची मंजिल पर ही रहती है।

भाजमो की नजर अब मंडल विस्‍तार पर

विधायक सरयू राय के नेतृत्व वाली भारतीय जनता मोर्चा का ध्यान अब विस्तारीकरण पर लगा है। पहले बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार खोज लिए तो अब मंडल विस्तार की तैयारी चल रही है। पिछले दिनों कई राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया, तो आगे भी सिलसिला जारी रखने का संकल्प लिया गया। आजादनगर में संयोजक खोजकर वह कमी पूरी कर ली गई, जिसके बिना दल अधूरा-अधूरा सा लग रहा था। वैसे पार्टी की नजर भाजपा पर ज्यादा है। पहले अंदेशा था कि भाजपा के जिला कार्यकारिणी के असंतुष्ट उनकी झोली में गिरेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंडल अध्यक्ष से मरहूम रहने वाले भी नहीं आए। अब मंडल कमेटी के विस्तार पर कड़ी नजर है। शायद इस बार पद नहीं मिलने से नाराज कार्यकर्ता ‘पा’ की जगह ‘मो’ में जगह तलाशें। क्या बुराई है, पहले का दो अक्षर तो वही है। हालांकि ऐसा हो नहीं रहा है।

इसबार सांसद को गुंजन ले उड़े

सांसद विद्युत वरण महतो का समय ठीक नहीं चल रहा है। पहले इन्हें जमशेदपुर अक्षेस ने अपनी होर्डिंग से उड़ा दिया था, इस बार गुंजन इन्हें ले उड़े। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर चल रहे सेवा सप्ताह में भाजपा के जमशेदपुर महानगर अध्यक्ष गुंजन यादव ने एक पोस्टर लांच किया, जो प्लाज्मा दान से संबंधित है। उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, झारखंड में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश आदि की तस्वीर है, लेकिन सांसद विद्युत वरण महतो की तस्वीर नहीं है। यह तब है, जब कुछ दिन पहले इन्होंने ही कहा था कि जेएनएसी ने सांसद की तस्वीर नहीं लगाई तो ईंट से ईंट बजा देंगे। जेएनएसी ने तत्काल होर्डिंग बदल दी, लेकिन इस बार खुद भूल गए। स्वाभाविक है, जान-बूझकर तो नहीं किया होगा। ऐसी-ऐसी गलती हो जाती है।

सबकी नजर एक-दूसरे के अतिक्रमण पर

राजनीति चीज ही ऐसी है। सत्ता के लिए नेता एड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। भूख-प्यास तक की चिंता नहीं करते। जान भी छोटी लगती है। कुछ दिन के लिए जनता भी दिमाग को किनारे रखकर अपने चहेते नेता के साथ दिल से जुड़ जाती है। जनता को लगता है कि ये तो हमारे ही हैं, लेकिन जीत के बाद सब गुबार बनकर उड़ जाता है। पक्ष-विपक्ष के नेता एक-दूसरे की जमीन खींचने में जुट जाते हैं, जनता किनारे है। झंडे के नीचे व्यक्तिगत स्वार्थ टकराने लगता है। इन दिनों अतिक्रमण के बहाने शहर में यही देखने को मिल रहा है, यह इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। सभी दल के नेताओं को दूसरे नेता के अतिक्रमणकारी अचानक से दिखने लगे हैं। ऐसा लग रहा है कि एक-दूसरे के लोगों को फांसी दिलाकर ही मानेंगे, जबकि सच्चाई यही है कि माफिया हमेशा सत्ता का झंडा उठाता है।

 

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