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Weekly News Roundup Jamshedpur : गड्ढा खोद कर रहे पैसे का इंतजार,पढ़‍िए प्रशासनिक महकमे की अंदरूनी खबर

जमशेदपुर, मनोज सिंह। Weekly News Roundup Jamshedpur पूर्वी सिंहभूम में वन विभाग की कार्यशैली विचित्र है। यहां दावे तो खूब होते हैं, बड़े -बड़े, लेकिन पड़ताल में इसकी पोल खुल जाती है। कह सकते हैं- सच्चाई छुप नहीं सकती बनावट के वसूलों से..। विभाग में फिर ऐसा ही हुआ है।

मानसूनी बादल इस समय उमड़-घुमड़ रहे हैं। हरियाली में इस जिले को नंबर वन बनाने का लक्ष्य है। पौधरोपण के लिए कई जगह गड्ढे खोद दिए गए हैं। लेकिन सरकार से विभाग को अभी तक पैसे नहीं मिले हैं, इसलिए काम ठप है। डर है कि कहीं यह मानसून यूं ही न लौटकर चला जाए। वैसे अभी समय शेष है। पूर्वी सिंहभूम जिला वन आच्छादन के मामले में राष्ट्रीय मानक 33 प्रतिशत जंगल के काफी करीब पहुंच गया है। जिले में 30.30 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित हैं। इस वर्ष साहब ने नर्सरी में पौधा तैयार कर लिया था। अब साहब रांची की ओर टकटकी लगाए हैं।

यहां दस साल बाद भी सपना अधूरा

जमशेदपुर शहर के गैर कंपनी इलाके में भी टाटा कमांड एरिया की तरह 24 घंटे बिजली देने की कवायद पिछले दस वर्षो ये चल रही है। अरबों रुपये अबतक खर्च हो चुके हैं, लेकिन बिजली कटौती, शटडाउन की बीमारी बरकरार है। सच कहें तो यह लाइलाज है। खैर, शहर ही नहीं, झारखंड में सरप्लस बिजली का दावा कर दूसरे राज्यों को बिक्री करने का सपना दिखाने वाले सूबे के मुखिया भी अब मुखिया नहीं रहे। परिणाम यह है कि पहले से पावर सब स्टेशन के चल रहे काम जमीन के पेच में फंस गए हैं। अब बिजली विभाग के आला अधिकारी भी मानते हैं कि यदि लॉकडाउन नहीं हुआ रहता तो अबतक शहर के गैर कंपनी इलाके में बिजली कटती ही नहीं। उधर, उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले तो गर्मी में बिजली कटती थी, लेकिन अब तो जाड़े और बरसात में भी यहां पर बिजली गुल हो जाती है।

साहब को ही करना पड़ रहा काम

कुशल कर्मचारियों के नहीं रहने से साहब को खुद रात-दिन काम करना पड़ रहा है। शहर में नागरिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए जमशेदपुर में तीन नगर निकाय हैं। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, मानगो नगर निगम तथा जुगसलाई नगर परिषद। जब से कोरोना महामारी ने कदम रखा है, साहब का जीना हराम हो गया है। तीन नगर निकायों में से एक निकाय में तो तेज तर्रार कर्मचारी हैं, जो बुद्धि विवेक से कुछ न कुछ अलग हटकर काम करते रहे हैं, लेकिन बाकी दो निकायों में तो कोरोना के अलावा कोई दूसरा काम ही नहीं हो रहा है। नगर निकाय के एक पदाधिकारी कहते हैं कि क्या करें ऐसे लोगों को यहां भेजा गया है, जो केवल नाम गिनाने के लिए हैं। कुछ भी काम सिपुर्द करो तो गड़बड़ होना तय मानिए। बाद में उसी काम को खुद ही करना पड़ता है। साहब कहते हैं- पता नहीं कब इनलोगों से छुटकारा..।

वीडियो ने खोल दी साहब की पोल

एक और कहानी सुनता हूं। गौर फरमाइए। पूर्वी सिंहभूम जिले के खनन पदाधिकारी से जुड़ी कहानी है। साहब अवैध ईंट-भट्ठा पर छापेमारी करते हैं। अवैध बालू खनन पर रोक लगाते हैं। माल जब्त कर थाने में रख देते हैं। धीरे-धीरे यह माल गायब हो जाता है। साहब से पूछने पर कहते हैं- पता नहीं, ऐसा भी हुआ है क्या? यही नहीं छापेमारी में जब कुछ हाथ नहीं लगता तो टका-सा जवाब देते हैं- मामला मेरे समय का नहीं है। मेरे समय में अवैध काम बंद हो चुके हैं। लेकिन पोल तो गुड़ाबांधा के थानेदार ने खोल दी। वायरल वीडियो बता रहा है कि बालू अवैध खनन लगातार जारी है। लोग भी जानते हैं कि स्वर्णरेखा हो या खरकई नदी यहां बालू खनन होता है। बाबूडीह लालभट्ठा, बागुनहातु में दिन-दहाड़े बालू खनन कभी भी देखा जा सकता है। साहब का कहना है कि यह तो पश्चिम बंगाल से आ रहा है।

 

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