Road Accident: सड़क हादसे में बुझ गया दो घरों का चिराग,चाकुलिया में दो युवकों की मौत

झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया से शुक्रवार की सुबह दुखद खबर आयी। यहां सड़क हादसे में दो युवकों की मौत हो गयी। मृतक देवांशु बेरा एवं विशाल जेना इसी वर्ष मैट्रिक परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए थे। दोनों की उम्र 18 वर्ष थी।

Rakesh RanjanFri, 06 Aug 2021 10:26 AM (IST)
दुर्घटनस्थल पर रोते-बिलखते मृत युवकों के परिजन। जागरण

चाकुलिया (पूर्वी सिंहभूम), जागरण संवाददाता। शुक्रवार की सुबह चाकुलिया वासियों के लिए बेहद मनहूस खबर लेकर आई। शहर के बिरसा चौक से महज एक किलोमीटर दूर बंगाल की तरफ जानेवाले शीशाखून मार्ग पर एक तेज रफ्तार बाइक के सड़क किनारे रखी ईंट के ढेर से टकरा जाने से दो युवकों की मौत हो गई। हादसा सुबह करीब 6:30 बजे हुआ। शहर के नामोपाड़ा निवासी कौशिक बेरा का पुत्र देवांशु बेरा एवं डाक विभाग में काम करने वाले प्रद्युत जेना के पुत्र विशाल जेना दोनों एक ही बाइक से नामोपाड़ा स्थित जिम जाने के लिए सुबह निकले थे।

इसी क्रम में दोनों उत्साही युवा बाइक में पेट्रोल भराने के लिए शीशाखून मार्ग पर जिम से आगे निकल गए। बाइक काफी तेज रफ्तार में थी कि सामने से एक पिकअप वैन आ गया। बचने के लिए जैसे ही बाइक चला रहे विशाल ने बाएं लिया, वैसे ही आवास निर्माण के लिए सड़क किनारे सजा कर रखी गई ईंट के ढेर से बाइक टकरा गई। एक ढेर से टकराने के बाद असंतुलित बाइक आगे बढ़ी और ईंट के दूसरे ढेर से फिर टकरा गई। दुर्घटना इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।

दोनों युवा इसी वर्ष हुए थे मैट्रिक उत्तीर्ण

रोते-बिलखते परिजन।

दो युवा जिंदगियां जरा सी लापरवाही से शुक्रवार सुबह असमय काल के गाल में समा गई। हादसे में मारे गए दोनों युवाओं ने इसी वर्ष मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी। किशोरावस्था से निकलते हुए युवावस्था की दहलीज पर अभी वे पहुंचे ही थे। संभावनाओं से भरी पूरी जिंदगी उनके सामने थी। दो दिन पहले ही दोनों ने बहरागोड़ा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में नामांकन भी कराया था। भविष्य को बेहतर बनाने की तैयारी में थे। माता-पिता को भी उनसे काफी उम्मीदें थी। मृतक विशाल तो अपने माता पिता का एकमात्र पुत्र था। उसके निधन से कुल का चिराग बुझ गया। देवांशु भी दो भाइयों में बड़ा था। उसके पिता कौशिक छोटी मोटी ठेकेदारी करते हैं। मां कविता बेरा वार्ड पार्षद रह चुकी हैं। दोनों ही परिवारों पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा है। दोनों के माता-पिता का रो- रो कर बुरा हाल है।

 

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