Viral News : जेआरडी टाटा ने 81 साल पहले कैसे पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन की मदद की, इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहा पत्र

लिक्डइन पर पोस्ट किया गया यही पत्र इंटरनेट मीडिया में वायरल हो रहा है।

क्या आपको पता है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन के सपनों को पूरा करने में जेआरडी टाटा ने उनकी मदद की थी। 1992 में केआर नारायणन भारत के उपराष्ट्रपति बने और 1997 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति बनाया गया।

Jitendra SinghSun, 09 May 2021 06:56 PM (IST)

जितेंद्र सिंह, जमशेदपुर : वैसे तो टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन जेआरडी टाटा हर किसी की सहायता करने में हमेशा आगे रहते थे, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन के सपनों को पूरा करने के लिए उनकी मदद की थी। 1992 में केआर नारायणन भारत के उपराष्ट्रपति बने और 1997 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति बनाया गया।

काफी गरीब परिवार से थे केआर नारायणन

केआर नारायणन काफी गरीब परिवार से आते थे, लेकिन वे शुरू से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। तब जेआरडी ने उनकी वित्तीय मदद की। 1949 में केआर नारायणन ने लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया और बाद में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हो गए। उस समय जब जेआरडी टाटा को छात्रवृत्ति के लिए एक युवक की सिफारिश करने के लिए पत्र मिला, तो किसी को नहीं पता था कि वही आदमी आगे चलकर भारत का राष्ट्रपति बनेगा।

लिक्डइन पर पोस्ट किया गया यही पत्र इंटरनेट मीडिया में वायरल हो रहा है। 

81 साल पुराना पत्र इंटरनेट मीडिया पर हो रहा वायरल

लिंक्डइन पोस्ट में, टाटा संस के ब्रांड कस्टडियन हरीश भट ने जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा की एक दिल को छू लेने वाली कहानी पोस्ट की है, जिसने भारत के पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायण को उनके सपनों को हासिल करने में मदद की।

इंटरनेट मीडिया में 81 साल पुराना वह पत्र अब वायरल हो रहा है, जिसमें 1940 में जेआरडी टाटा को छात्रवृति के लिए एक युवक का अनुरोध पत्र मिला था।

त्रावणकोर विश्वविद्यालय में एमए में टॉप किया था नारायणन ने

इस युवा ने त्रावणकोर विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी ने स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की थी। उन्होंने कई बाधाओं को पार कर लिया, जो उनके समुदाय के लोगों को हमेशा सामना करना पड़ता था। वह उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड जाना चाहते थे।

जेआरडी ने 16 हजार रुपये छात्रवृति दी

जेआरडी टाटा ने युवा केआर नारायणन को मदद करने को हामी भरी। उन्होंने जेएन टाटा एंडोमेंट को मदद करने की सिफारिश कर दी। जेएन टाटा एंडोमेंट की स्थापना 1892 जमशेदजी नुसरवान जी टाटा द्वारा किया गया था। जेएन टाटा एंडोमेंट वैसे प्रतिभाशाली युवाओं को छात्रवृति प्रदान करती थी, जो विदेशों में अध्ययन करने जाते थे। केआर नारायणन का जल्द ही साक्षात्कर हुआ। वह साक्षात्कार मंडल को प्रभावित करने में कामयाब रहे।

केआर नारायणन की प्रतिभा व वित्तीय बाधाओं को देखते हुए टाटा स्कॉलरशिप ने उन्हें 16 हजार रुपये की छात्रवृति प्रदान की और एक हजार रुपये लोन दिया। वित्तीय मदद हासिल करने के बाद नारायणन ने लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स में नामांकन लिया। वह 1949 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हो गए। 1992 में केआर नारायणन भारत के उपराष्ट्रपति बने और 1997 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति बनाया गया।

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