Jamshedpur, Jharkhand : वेंटिलेटर चलाने वाला हो तो मरीजों को मिले लाभ, न डाॅक्टर हैं न टेक्नीशियन

वेंटिलेटर चलाने के लिए न तो डॉक्टर है और न ही प्रशिक्षित टेक्नीशियन।

एक साल के अंदर लगभग 30 वेंटिलेटर पूर्वी सिंहभूम जिले के सरकारी अस्पतालों में पहुंच गई। अभी और भी आने वाली है। ये सभी वेंटिलेटर पीएम केयर्स फंड से मिली है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसका लाभ मरीजों को मिल पाएगा।

Rakesh RanjanSun, 16 May 2021 05:37 PM (IST)

जमशेदपुर, जासं। एक साल के अंदर लगभग 30 वेंटिलेटर पूर्वी सिंहभूम जिले के सरकारी अस्पतालों में पहुंच गई। अभी और भी आने वाली है, जो कोरोना काल में एक बड़ी उपलब्धि है। इतने बड़े पैमाने पर अभी तक कभी भी वेंटिलेटर की खरीदारी नहीं हुई थी। ये सभी वेंटिलेटर पीएम केयर्स फंड से मिली है लेकिन, सबसे बड़ा सवाल है कि क्या इसका लाभ मरीजों को मिल पाएगा।

क्योंकि इसे चलाने के लिए न तो डॉक्टर है और न ही प्रशिक्षित टेक्नीशियन। ऐसे में यह वेंटिलेटर जंग खा जाएगी। बर्बाद हो जाएगी और जनता की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। लेकिन, इसपर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। दिल्ली से वेंटिलेटर रांची पहुंच रही है और वहां से सभी जिलों में भेज दी जा रही है। अब सबसे बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। इस मशीन को चलाएगा कौन।

बेकार पड़ी है पिछले साल आइ वेंटिलेटर

कोरोना की पहली लहर में भी पूर्वी सिंहभूम जिले को 20 वेंटिलेटर मिली थी लेकिन विभाग के पास विशेषज्ञ डॉक्टर व टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से कुछ दिन तक ये मशीनें पड़ी रही। रांची विभाग से जब दबाव आया तो एमजीएम को 10 वेंटिलेटर, मर्सी अस्पताल को पांच व उमा हॉस्पिटल को दो व तीन वेंटिलेटर सदर अस्पताल को दी गई। लेकिन, हर जगह चिकित्सक व टेक्नीशियन का नहीं होना समस्या बनी। मर्सी अस्पताल व सदर अस्पताल में आज भी वेंटिलेटर धूल फांक रही है। कारण कि इसे संचालित करने के लिए कोई डॉक्टर मौजूद नहीं है। वहीं, अब फिर पीएम केयर्स फंड से एमजीएम अस्पताल को दस नइ वेंटिलेटर मिली है। लेकिन, डॉक्टर व कर्मचारियों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन किसी तरह से मैनेज करने के लिए आउटसोर्स पर आठ टेक्नीशियनों को रखा गया है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

पहले डॉक्टर, कर्मचारी की हो बहाली फिर वेंटिलेटर की खरीदारी

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एसी अखौरी ने कहा कि वेंटिलेटर खरीद लेने से क्या होगा, जब उसे संचालित करने वाली टीम ही नहीं होगी। विशेषज्ञ चिकित्सक व टेक्नीशियनों की बहाली कर सभी वेंटिलेटर को शीघ्र ही चालू करना चाहिए। कोरोना काल में जितने भी उपकरणों की खरीदारी हो रही है, उसका लाभ आगे भी लोगों को मिले, इसपर सख्ती से काम होनी चाहिए। अन्यथा सभी मशीनें बर्बाद हो जाएगी।

जिले से हटा दिए गए 700 कर्मचारी

डेढ़ साल के अंदर पूर्वी सिंहभूम जिले से लगभग 700 स्वास्थ्य कर्मचारियों को हटा दिया गया है। इसमें एमजीएम के लगभग 400 कर्मचारी शामिल हैं। वहीं, 300 जिले में तैनात कर्मचारियों की संख्या है। इनके हटने से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह से चरमरा गई है। कई अस्पतालों पर ताला लटक गया है। इधर, एमजीएम अस्पताल बिना फार्मासिस्ट के ही चल रहा है।

 

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