टाटा स्टील के आरएंडडी डिपार्टमेंट ने बनाई थी भारत की पहली बख्तरबंद आर्मर्ड कार, पूरे हो रहे हैं 84 साल

यह बख्तरबंद कार भारत की पहली और एकमात्र भारतीय निर्मित कार थी जिसे दूसरे विश्वयुद्ध के समय अफ्रीका के पश्चिम रेगिस्तान में इस्तेमाल किया था। तो आइए जानते हैं कि टाटा स्टील ने अपने आरएंडडी विभाग को आखिर किसलिए स्थापित किया था।

Rakesh RanjanMon, 13 Sep 2021 05:46 PM (IST)
आरंडडी विभाग ने शुरूआती दौर में ही अपनी प्रतिभा साबित की।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : टाटा स्टील देश की पहली ऐसी कंपनी है जिसने रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) विभाग की स्थापना 14 सितंबर 1937 में की। मंगलवार को यह विभाग अपनी स्थापना के 84 साल पूरे करने जा रहा है। इस विभाग की ही देन है कि इसने टाटानगर बख्तरबंद (आर्मर्ड) कार की स्थापना की। जिसमें एलॉय स्टील और सिलिकॉन की विशेष गुणवत्ता वाले स्टील की चादर, बुलेट प्रूफ कवच प्लेट लगी हुई थी।

यह बख्तरबंद कार भारत की पहली और एकमात्र भारतीय निर्मित कार थी जिसे दूसरे विश्वयुद्ध के समय अफ्रीका के पश्चिम रेगिस्तान में इस्तेमाल किया था। तो आइए जानते हैं कि टाटा स्टील ने अपने आरएंडडी विभाग को आखिर किसलिए स्थापित किया था।

उत्पादन लागत कम करना और उत्पादकन बढ़ाना मुख्य उद्देश्य

वर्ष 1940 के दशक की बात है जब टाटा स्टील देश में स्टील का निर्माण कर रही थी। उस समय तकनीक इतनी बेहतर नहीं कि उत्पादन और उसकी गुणवत्ता को सुधारा जा सके। टाटा स्टील प्रबंधन ने इस बात को समझा और देश की पहली आरएंडडी विभाग की स्थापना की जिसका उद्घाटन टाटा स्टील के तत्कालीन चेयरमैन सर नौरजी सकलतवाला ने किया था। इस डिवीजन का मुख्य उद्देश्य कंपनी की उत्पादन लागत को कम करना और उत्पादन में बढ़ोतरी करना था। इसके अलावा कंपनी में उत्पादन के लिए आने वाले खनिजों व कच्चे माल की विशेषणात्मक और रासायनिक समस्याओं को कम करना, स्टील प्लांट के अंदर किए जा रहे सभी मेटालर्जिकल परिचालनों का अध्ययन, निरीक्षण और पर्यवेक्षण करना, स्टील के गुण धर्मो की जांच करना, रिफैक्ट्रीज के उपकरणों और जंग की समस्याओं का विशलेषण करना, नए स्टील और सभी प्रकार के उत्पादों को इनोवेशन के तहत बेहतर बनाना शामिल है।

आधुनिक तरीके से किया गया है तैयार

टाटा स्टील ने अपने आरएंडडी विभाग को दक्षता, फ्लेक्सिबल और सभी सुविधाओं से युक्त बनाया है। इसे पूरी प्लानिंग के साथ डिजाइन किया गया है। आरएंडडी विभाग के रख-रखाव में आसानी के लिए दीवारों को पाइपिंग व केबलिंग से मुक्त रखा गया है। गैस, पानी, बिजली और वैक्यूम के पाइप को जमीन के नीचे एक डक्ट बनाकर गुजारा गया। आर्गेनोमिक्स, लाइटिंग और वेंटिलेशन के लिए विशेष व्यवस्था की गई ताकि काम के दौरान कोई परेशानी न हो। एसिड या अन्य रसायनिक कणों के छीटों से बचने व सुरक्षा के लिए आपातकालीन शॉवर भी लगाए गए हैं।

हावड़ा ब्रिज इसी की देन

आरंडडी विभाग ने शुरूआती दौर में ही अपनी प्रतिभा साबित की। इस विभाग की मदद से लो ऑयल स्ट्रक्चरल स्टील, टिस्क्रोम का निर्माण किया। जिसकी मदद से कोलकाता में प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज का निर्माण किया गया। इसके अलावा टाटा स्टील ने मालवाहक वाणिज्यिक वाहन, जहाज, ट्रामो और अन्य वाहनों के इस्तेमाल में उपयुक्त होने वाले उच्च क्षमता वाले स्ट्रक्चरल स्टील टिस्कोर का भी निर्माण किया।

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