Tata Bluescope Bonus: बोनस के विरोध में टाटा ब्लूस्कोप के कर्मचारियों ने काटा बवाल

Tata Bluescope Bonus बोनस फार्मूले को लेकर बीते दो साल से प्रबंधन-यूनियन के बीच बातचीत चल रही है। प्रबंधन बोनस फार्मूला बनाने के पक्ष में नहीं है। वह बीते साल के बोनस को आधार मानकर समझाैता करना चाहता था जिसे यूनियन से सिरे से खारिज कर दिया था।

Rakesh RanjanSat, 16 Oct 2021 10:50 AM (IST)
टाटा ब्लूस्कोप के कर्मचारियों ने बोनस के विरोध में जमकर बवाल काटा।

जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। टाटा ब्लूस्कोप के कर्मचारियों ने बोनस के विरोध में जमकर बवाल काटा। एक दिन पूर्व कंपनी प्रबंधन ने बगैर यूनियन से समझौते किए बोनस की राशि कर्मचारियों के बैंक खाते में भेज दी। दूसरे दिन जब कर्मचारियों को मालूम हुआ तो वे अपने यूनियन नेताओं से पूछताछ करने लगे। नेताओं ने कहा कि बगैर उन्हें बताए ऐसा हुआ है। फिर क्या था कर्मचारी यूनियन नेताओं को उल्टी-सीधी सुनाते हुए उन्हें यूनियन छोड़ने की सलाह तक दे दी। कहा कि अगर प्रबंधन उनकी बात नहीं सुनता है तो वे यूनियन छोड़ दें ।

बोनस का पैसा लौटाने को लेकर पूरे दिन कंपनी में हो-हंगामा होता रहा। बोनस को लेकर कर्मचारियों में काफी असंतोष था। उनका कहना था कि यह राशि बीते साल की अपेक्षा कम है। कंपनी में बीते साल से ज्यादा मुनाफा हुआ है लेकिन प्रबंधन अपने जिद के आगे बगैर बोनस फार्मूले बनाए। यूनियन नेताओं के साथ समझौते किए बोनस की राशि कर्मचारियों के बैंक खाते में भेज दी। इसका विरोध होना चाहिए। फिर आपस में बात कर कर्मचारियों ने यूनियन से इस्तीफे देने की मांग करने लगे। करीब दो बजे कंपनी के प्रशासनिक कार्यालय में पचास से ज्यादा कर्मचारी पहुंच गए। वहीं भी कंपनी के एचआर व आई आर हेड से बात की। कहा कि उन्हें यूनियन में नहीं रहना है। यूनियन के सभी मेंबर लिखकर दे रहे हैं। उन्हें प्लांट हेड से बात कर उनकी सदस्यता वापस कराने व बोनस का पैसा लौटाने की मांग कर रहे थे। इसी मामले को लेकर वहां घंटो हाई-वोल्टेज ड्रामा चला। फिर मौके पर कंपनी के प्लांट हेड पहुंचे। उन्हेांने आश्वस्त किया कि 15 दिनों के अंदर कर्मचारियों की मांगों पूर विचार कर उसका समाधान किया जाएगा। प्लांट हेड के आश्वासन के बाद ही कर्मचारी बैरन लौटे।

क्या है मामला, क्यों है नाराजगी

बोनस फार्मूले को लेकर बीते दो साल से प्रबंधन-यूनियन के बीच बातचीत चल रही है। प्रबंधन बोनस फार्मूला बनाने के पक्ष में नहीं है। वे बीते साल के बोनस को आधार मानकर समझाैता करना चाहता था, जिसे यूनियन से सिरे से खारिज कर दिया था। फिर क्या था यूनियन को बगैर विश्वास में लिए प्रबंधन ने एकतरफरा निर्णय लिया तथा कर्मचारियों के बैंक खाते में बोनस भेज दी। जिसका मलाल यूनियन नेताओं को भी है।

पिछले साल से मिला कम बोनस

बीते साल बोनस मद में करीब 35 लाख मिला था, जो घटकर 33 लाख हो गया है। मुनाफा बीते साल से दुगुना है। इसके आधार पर कर्मचारियों को बोनस राशि बढ़ाने की मांग की जा रही थी। इस बार करीब एक प्रतिशत बोनस कम है। वहीं कर्मचारियों का तर्क था कि अगर बोनस देना ही था तो प्रबंधन 8.33 प्रतिशत देता, फिर आगे जो समझौता होता उस आधार पर लंबित राशि मिलती। लेकिन बगैर समझौता करीब 12 प्रतिशत बोनस दिया गया है, जो प्रबंधन की मनमानी है।

कर्मचारियों ने बोनस को लेकर प्रबंधन के पास अपनी बातें रखी हैं। यूनियन महामंत्री के द्वारा ज्ञात हुआ कि बोनस को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी है। प्रबंधन ने उनलोगों को दस दिन का समय दिया है, समस्या का समाधान करने का आश्वासन मिला है।

राकेश्वर पांडेय, अध्यक्ष ब्लूस्कोप यूनियन।

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