Mob Lynching तबरेज की पत्नी ने दी आमरण अनशन की चेतावनी, कहा- दबाव में पुलिस ने बदली धाराएं Jamshedpur News

जमशेदपुर /सरायकेला (जेएनएन)। मॉब लिंचिंग के शिकार हुए तबरेज अंसारी की पत्नी शाइस्ता परवीन परिजनों के साथ सोमवार को उपायुक्त से मिलकर तबरेज की मौत व उससे जुड़े सभी रिपोर्ट (पोस्‍टमार्टम, बिसरा, एसआइटी आदि) तुरत देने को कहा। साथ ही चेतावनी दी कि दो घंटे के अंदर सभी रिपोर्ट उसके हवाले नहीं की गई तो परिजनों के साथ आमरण अनशन पर बैठ जाएगी। उसने यह भी आरोप लगाया कि आरेपितों के दबाव में पुलिस ने हत्‍या की धाराएं बदली हैं। पुलिस आरोपितों को बचाने की कोशिश कर रही है।

 उपायुक्‍त ए दोड्डे ने शाइस्ता से कहा कि वह एसपी से मुलाकात करे। उपायुक्त के कहने पर शाइस्‍ता अपने परिजनों के साथ आवास में जाकर पुलिस अधीक्षक कार्तिक एस से मिली जहां एसपी ने उससे कहा कि तबरेज अंसारी की पूरी जांच रिपोर्ट न्यायालय को दी जाएगी।  वह चाहे तो न्‍यायालय से प्रति की मांग कर सकती है।

 तबरेज अंसारी के चाचा मसरुर आलम ने बताया कि पुलिस अधीक्षक ने आवेदन की प्रति ली और कहा कि तबरेज अंसारी के सारे रिपोर्ट न्यायालय को समर्पित किया जाएगा।

एसपी के आश्वासन के बाद फिलहाल उपायुक्त कार्यालय परिसर में आमरण अनशन स्थगित किया गया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पूरा परिवार आपस में बैठकर अगली रणनिति तय करेगा। तबरेज की पत्नी के साथ उपायुक्त व पुलिस अधीक्षक से मिलकर  आवेदन देने सहिस्ता के साथ उनकी मां शाहनाज बेगम, मसरुर आलम व उनके भाई मकसूद आलम शामिल थे।

आवेदन में यह कहा शाइस्‍ता परवीन ने

शाइस्ता परवीन ने आवेदन में कहा कि तबरेज अंसारी की मौत ग्रामीणों की पिटाई और पुलिस और डॉक्टरों की लापरवाही के चलते हुई। ऐसे में आगे की कार्रवाई के लिए परिवार को पोस्टमार्टम, बिसरा एवं एसआईटी रिपोर्ट की जरूरत है। जांच अधिकारी ने इस मामले में धारा 302 को हटाकर धारा 304 के तहत गलत ढंग से कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दिया है। पहले हत्या का मामला दर्ज किया था लेकिन प्रशासन के दबाव में आने पर इसे गैर-इरादतन हत्या के मामले में तब्दील कर दिया गया। परवीन ने कहा कि प्रशासन आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। आवेदन के मुताबिक, इस सिलसिले में पहले भी आवेदन देकर रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन परिवार को अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई. ऐसे में जल्द से जल्द रिपोर्ट नहीं मुहैया कराई गई, तो वह आमरण अनशन करेंगी। 

क्‍या है तबरेज प्रकरण

शाइस्‍ता परवीन ने उपायुक्त को आवेदन देकर कहा कि उनके पति तबरेज अंसारी की मौत धातकीडीह ग्राम के लोगों के द्वारा बुरी तरह से मारपीट करने तथा पुलिस पदाधिकारी एवं डॉक्टरों की लापरवाही के कारण 22 जून को सदर अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इस संबंध में सरायकेला थाना कांड संख्या 77-19 दिनांक 22 जून 2019 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शाइस्‍ता परवीन ने कहा कि अनुसंधानकर्ता ने प्राथमिकी में लगाई गई धारा 302 भादवि को हटाकर गलत ढंग से आरोपितों के विरुद्ध धारा 304 भादवि लगाकर न्यालय में आरोप पत्र समर्पित किया है।

तीस अगस्त को इस संबंध में आवेदन दिया था। परंतु उन्हें रिपोर्ट की प्रतिलिपि आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। शाइस्‍ता परवीन ने सदर अस्पताल में किन डॉक्टरों ने उनके पति तबरेज अंसारी के जख्मों की जांच की थी और किस-किस तिथि को जांच की गई थी, उसका विवरण्र तथा जेल ले जाने के बाद किन डॉक्टरों ने उनके पति के जख्मों की जांच किन-किन तिथि को की थी। उन डॉक्टरों के नाम एवं किन जखमों की जांच की गई थी, उसका पूर्ण विवरण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

आरोपियों के ऊपर से हटा था धारा 302

इस मामले में तब नया मोड़ आया जब चार्जशीट में सभी 11 आरोपियों के ऊपर से धारा 302 हटाकर धारा 304 लगाया गया। तबरेज की पत्नी शाइस्ता ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि दबाव के चलते आरोपियों पर लगे धाराओं में बदलाव किया गया। हालांकि, जिले के पुलिस अधिक्षक  कार्तिक एस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हत्या का मामला नहीं बनता था, इसलिए आरोपियों पर गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर चार्जशीट फाइल की गई है। 

पुलिस का पक्ष - रिपोर्ट के आधार पर बदली धाराएं

एसपी कार्तिक ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक इसमें हत्या का मामला नहीं बनता था। इसलिए गैर-इरादतन हत्या का मामला बनाया गया। धारा 304 में भी धारा 302 की तरह सजा के प्रावधान हैं। इसमें भी उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। सिर्फ फांसी की सजा नहीं हो सकती है। एसपी के मुताबिक पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर शक होने पर दूसरे मेडिकल बोर्ड से ओपिनियन मांगी गई। लेकिन दूसरे बोर्ड ने भी पहली रिपोर्ट को ही सही माना। इसी आधार पर पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर की है।

 

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