ये हैं धरती के भगवानः 14 हजार से अधिक मरीजों की मुफ्त सर्जरी कर चुके हैं डाॅक्टर नागेंद्र

चंदना महतो को देखते गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल के सर्जन डॉ नागेंद्र सिंह।

गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. नागेंद्र सिंह इसकी मिसाल हैं। वे गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज तो करते ही हैं इसके अलावे उन्हें घर भी पहुंचाने का काम करते हैं। डॉ. नागेंद्र सिंह अबतक 14 हजार से अधिक मुफ्त में सर्जरी कर चुके हैं।

Rakesh RanjanTue, 06 Apr 2021 02:09 PM (IST)

जमशेदपुर, जासं। चिकित्सकों को धरती का भगवान यूं ही नहीं कहा जाता। गंगा मेमोरियल हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. नागेंद्र सिंह इसकी मिसाल हैं। वे गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज तो करते ही हैं, इसके अलावे उन्हें घर भी पहुंचाने का काम करते हैं। हाल ही में तीन मरीजों का मुफ्त सर्जरी कर उनकी जान बचाई है। अब स्वस्थ हो चुके हैं। उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है।

ये तीनों मरीज आर्थिक रूप से काफी कमजोर थे। उनके पास अस्पताल आने तक की राशि नहीं थी। ऐसी परिस्थिति में डॉ. नागेंद्र सिंह उनके लिए भगवान बनकर सामने आए। उन्हें न सिर्फ अस्पताल में भर्ती कराया बल्कि मुफ्त में सर्जरी भी की और अब फिर से उन्हें घर पहुंचाने की तैयारी है। इसमें से दो मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड था लेकिन उनकी बीमारी इस योजना के तहत दर्ज नहीं है। जिसके कारण योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा था। वहीं, एक मरीज के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। डॉ. नागेंद्र सिंह अबतक 14 हजार से अधिक मुफ्त में सर्जरी कर चुके हैं।

बच्चेदानी में इंफेक्शन से हो रहा था रक्तस्त्राव

गालूडीह निवासी चंदना महतो (45) बच्चेदानी में इंफेक्शन होने की वजह से हिस्टेरेक्टॉमी रोग से ग्रस्त हो गई थी। बार-बार रक्तस्त्राव होने की वजह से वह शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो गई थी। उसके पास इलाज कराने को पैसा भी नहीं था। एक-दो जगह गई तो 50-60 हजार रुपये खर्च बताया गया। आयुष्मान कार्ड बना हुआ है लेकिन योजना में यह बीमारी ही शामिल नहीं है। जिसके कारण वे घर में ही पड़ी हुई थी। इसी दौरान डॉ. नागेंद्र सिंह को चंदना के बारे में जानकारी हुई तो उन्होंने फोन से संपर्क किया और उसे अपने अस्पताल में बुलाया। इस दौरान चंदना की मुफ्त में सर्जरी हुई और वह अब स्वस्थ हो चुकी है।

हर्निया में आंत फंस गया था

बहरागोड़ा निवासी भारतरण प्रधान (60) हर्निया रोग से ग्रस्त थे। बीमारी लंबे समय से होने की वजह से हर्निया में आंत फंस गया था, जो काफी खतरनाक माना जाता है। भतारण प्रधान आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। उनके पास राशन कार्ड नहीं होने की वजह से आयुष्मान कार्ड भी नहीं बन सका है। भारतरण प्रधान कहते है कि डॉक्टर साहब नहीं होते तो उनकी जान इलाज के अभाव में चली जाती। वे इलाज के लिए बीते कई साल से भटक रहे थे लेकिन पैसा के अभाव में इलाज नहीं हो पा रहा था।

बच्चेदानी में ट्यूमर लेकर भटक रही थी बारी सिंह

डिमना लेक स्थित गांव निवासी बारी सिंह सरदार (60) बच्चेदानी में ट्यूमर लेकर दर-दर भटक रही थी। बच्चेदानी से बार-बार रक्तस्त्राव होने की वजह से काफी कमजोर हो गई थी। पैसा की वजह से इलाज नहीं करा पा रही थी। बारी सिंह कहती है कि उनके पास आयुष्मान कार्ड है लेकिन योजना में यह बीमारी दर्ज नहीं है। जिसके कारण योजना का लाभ उन्हें नहीं मिल सका। अब डॉ. नागेंद्र सिहं ने मुफ्त में उनकी सर्जरी कर जान बचाई है।

 

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