जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के यूजी गणित के छात्र रिजल्ट से असंतुष्ट, नहीं जोड़ा गया इंटरनल परीक्षा का नंबर

स्नातक गणित के पांचवें सेमेसटर के विद्यार्थियों का अंतिम परिणाम जारी हुआ है। इससे विद्यार्थी असंतुष्ट हैं एवं इसमें कुछ गड़बड़ी की आशंका है। यह जानकारी विगत दिनों जमशेदपुर कोऑपरेटिव कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष कमल अग्रवाल को बीएससी गणित सत्र 2018-21 के छात्रों ने दी।

Rakesh RanjanWed, 16 Jun 2021 04:57 PM (IST)
ज्ञापन देने पहुंचे जमशेदपुर कोऑपरेटिव कॉलेज के छात्र। जागरण

जमशेदपुर, जासं। वर्तमान में स्नातक गणित के पांचवें सेमेसटर के विद्यार्थियों का अंतिम परिणाम जारी हुआ है। इससे विद्यार्थी असंतुष्ट हैं एवं इसमें कुछ गड़बड़ी की आशंका है। यह जानकारी विगत दिनों जमशेदपुर कोऑपरेटिव कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष कमल अग्रवाल को बीएससी गणित सत्र 2018-21 के छात्रों ने दी।

इसके बाद छात्र संघ अध्यक्ष ने छात्रों के साथ बुधवार को कॉलेज के प्राचार्य डा. अमर सिंह से मुलाकात की तथा छात्रों की समस्या से संबंधित ज्ञापन प्राचार्य को सौंपा। परीक्षा परिणाम में सुधार करने की मांग की गई। प्राचार्य को बताया गया कि यह समस्या पिछले सेमेस्टर से चली आ रही है। पिछली बार भी कॉलेज ने इंटरनल एसेसमेंट का नंबर नहीं भेजा था। ज्ञापन में कहा गया कि अगर परीक्षा परिणाम में सुधार नहीं हुआ तो संभवत: कम अंक पाने के कारण छात्रों को आगे की पढ़ाई में नामांकन, प्रतियोगी परीक्षा देने में अथवा रोजगार में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इस तरह का परिणाम छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्यरूप से आदित्य भारद्वाज, भगत पोद्दार, शिव शंकर प्रधान, अर्जुन शाह, अप्पू कुमार एवं अन्य छात्र शामिल थे।

थर्ड एवं फोर्थ सेमेस्टर में भी नहीं जुडा था इंटरनल मार्कस

जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में यूजी सत्र 2018-21 गणित के छात्रों का नंबर पिछले तीन वर्षों से सही से नहीं जुड़ रहा है। इस बार पांचवें सेमेस्टर में इन छात्रों की इंटरनल परीक्षा हुई। इसके बावजूद इनका नंबर विश्वविद्यालय द्वारा नहीं जोड़ा गया। छात्र आदित्य भारद्वाज ने बताया कि तीसरे एवं चौथे सेमेस्टर में इंटरनल नंबर को जोड़ने में हुई गड़बड़ियों को कई बार कॉलेज प्रशासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन को ध्यान आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक इसमें सुधार नहीं हुआ। अब यह मामला और पेंचीदा होता जा रहा है। इसका अंतिम वर्ष के रिजल्ट पर पड़ेगा। इस कारण छात्र चिंतित हैं। काॅलेज एवं विश्वविद्यालय प्रशासन को इसपर गंभीरता से सोचना होगा।

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