Railways Good News: दक्षिण- पूर्व रेलवे ने की12.3 मिलियन यूनिट बिजली की बचत की, बचाए 5.32 करोड़ रुपये, जाने कैसे

रेलवे में बिजली की परंपरागत जरूरत काफी कम हो गई।

South - Eastern Railway. दक्षिण-पूर्व रेलवे ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब अपने परंपरागत उपकरणों को थर्मल पावर से चलाने के बजाए अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रही है। इससे 12.3 मिलियन यूनिट बिजली की बचत की जो रिकार्ड है।

Publish Date:Sat, 16 Jan 2021 09:03 AM (IST) Author: Rakesh Ranjan

जमशेदपुर, जासं।  दक्षिण- पूर्व रेलवे ने वर्ष 2020-21 में विभिन्न माध्यमों द्वारा 12.3 मिलियन यूनिट बिजली की बचत की और इससे रेलवे प्रबंधन ने 5.32 करोड़ रुपये भी खर्च होने से बचाए। दक्षिण -पूर्व रेलवे ने इस संबंध में आधिकारिक घोषणा की है।

रेलवे में इलेक्ट्रिकल विभाग का मुख्य काम सभी बिजली परिसंपत्तियों की योजना, संचालन और रख-रखाव की देखभाल करना है। जिसमें इलेक्ट्रिकल, लोकोमोटिव और ट्रैक्शन शामिल है। निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति हो, इसके लिए ट्रैक्शन सब स्टेशन का रख-रखाव, सभी लिफ्ट व एस्केलेटरों का रख-रखाव, एयर कंडीशन उपकरणों, बिजली के उपकरणों के रख-रखाव, फिटिंग, फिक्स्चर, पंप हाउसों का रख-रखाव सहित अन्य उपकरणों के देशव्यापी स्तर पर संशोधन को ध्यान में रखकर काम कर रही है। इसके लिए अब रेलवे अपने परंपरागत उपकरणों को थर्मल पावर से चलाने के बजाए अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रही है।

अक्षय उर्जा का उपयोग

इसके लिए दक्षिण -पूर्व रेलवे प्रबंधन ने गैर माध्यमों से ऊर्जा हासिल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस योजना के तहत रेल प्रबंधन ने अपने सभी प्लेटफार्म की छत पर सोलर पैनल स्थापित किए। जिससे सालों भर सौर ऊर्जा का निर्माण हुआ। रेलवे ने टाटानगर स्टेशन सहित कई स्टेशनों पर 2.306 मेगावॉट का सोलर रूफ टॉप प्लांट की स्थापना की। जिसका उपयोग रेलवे ने अपने स्टेशनों को रोशन करने के लिए किया।

ब‍िजली की परंपरागत जरूरत हुई कम

इसके अलावे रेलवे ने अपने सभी स्टेशनों, सेवा प्रदत्त भवन, स्ट्रीट लाइट को भी सोडियम वैपर लाइट के बजाए एलईडी रोशन में बदला। सभी स्टेशनों, सेवा भवनों, क्वार्टरों, स्ट्रीट लाइट आदि के लिए एलईडी रोशनी की व्यवस्था की। इससे रेलवे ने पूरे साथ 70 प्रतिशत बिजली की खपत की और पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत बिजली की बचत की। इसके अलावे दक्षिण पूर्व रेलवे ने कई जगहों पर प्री पेड मीटर लगाए। इस नई पहल से रेलवे ने टाटानगर और आद्रा स्टेशन में बिजली की परंपरागत जरूरत को काफी कम कर दिया है।

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