Gurudwara Dispute: सोनारी गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान ने तारा सिंह को बताया अज्ञानी, जाने क्यों कही उन्होंने ये बात

Gurudwara Dispute सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान सरदार गुरदयाल सिंह ने कार्यकारी प्रधान तारा सिंह पर शब्दों के बाण छोडकर उन्हें अज्ञानी बताया है। सोनारी में समाज के प्रबुद्ध सिखों की बैठक कर गुरदयाल सिंह ने अपने इरादे जाहिर कर दिया है।

Rakesh RanjanThu, 25 Nov 2021 10:05 AM (IST)
समर्थकों के साथ सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान सरदार गुरदयाल सिंह ।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : सोनारी गुरुद्वारा में प्रधान पद को लेकर एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विदेश से लौटते ही सोनारी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान सरदार गुरदयाल सिंह ने कार्यकारी प्रधान तारा सिंह पर शब्दों के बाण छोडकर उन्हें अज्ञानी बताया है। सोनारी में समाज के प्रबुद्ध सिखों की बैठक कर गुरदयाल सिंह ने अपने इरादे जाहिर कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं तारा सिंह की गलत मंशा कभी पूरी नहीं होने दूंगा। गुरुदयाल के अनुसार तारा सिंह अज्ञानी है। नहीं तो जानबूझकर योजना के तहत संगत एवं पूरे शहर को गुमराह नहीं करते।

वर्ष 2010 से पहले सोनारी गुरुद्वारा कमेटी का अपना संविधान नहीं था और प्रधान का चुनाव ट्रस्टी करते थे। तारा सिंह का यह कहना था कि 2010 में शैलेंद्र सिंह ने उन्हें प्रधान बनाया था, जो पूरी तरह से गलत और भ्रामक है। उन्हें ट्रस्टियों ने जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें यह तरीका गलत लगा और संविधान बना कर इसमें सुधार किया और प्रधान चुनने का अधिकार संगत को सौंप दिया क्योंकि गुरमत मर्यादा में संगत ही सर्वोपरि है। संगत की भावना पूरी तरह से लोकतांत्रिक होती है। तारा सिंह जमशेदपुर की संगत को बताएं कि उन्होंने तीन बार नामांकन दाखिल किया था जिसमें एक बार उन्होंने नामांकन वापस लिया। दूसरी बार चुनाव हारे और तीसरी बार उन्होंने चुनाव में विजय प्राप्त की। असल में तारा सिंह महंत बनना चाहते हैं इसलिए संगत व संविधान की अनदेखी कर रहे हैं।

बैठक में इनकी रही मौजूदगी

बैठक में तय हुआ कि सोनारी की संगत की भावना को जिला एवं अनुमंडल प्रशासन के समक्ष रखा जाएगा और जो कुछ गलत हो रहा है उसे सुधारा जाएगा। जरूरत होने पर सोनारी की संगत अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए धरना प्रदर्शन का आयोजन भी करेगी। बैठक में बलबीर सिंह गिल, हरजीत सिंह, बलदेव सिंह, हरचरण सिंह, राजा सिंह, बंटी सिंह, मनजीत सिंह, हरबंस सिंह, अमृतपाल सिंह, जोगिंदर सिंह, गोल्डी सिंह, रंजीत सिंह , दलजीत सिंह, एचएस बेदी, यशवंत सिंह सहित अन्य उपस्थित थे।

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