Corona Fighter: 53 दिन बाद कोरोना व ब्लैक फंगस से रांची के सेवा लाल जीते जंग, कहा-बुलंद हौसले से मिली जीत

बुलंद हौसले व मजबूत आत्मविश्वास से हर जंग जीती जा सकती है। इस वाक्य को कोरोना व ब्लैक फंगस से ठीक हुए सेवा लाल महतो (57) ने दोहराया। वे 53 दिनों से महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जिंदगी व मौत से जूझ रहे थे ।

Rakesh RanjanSun, 13 Jun 2021 11:47 AM (IST)
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में मेडिकल टीम के साथ सेवा लाल महतो।

जमशेदपुर, जासं। बुलंद हौसले व मजबूत आत्मविश्वास से हर जंग जीती जा सकती है। इस वाक्य को कोरोना व ब्लैक फंगस से ठीक हुए सेवा लाल महतो (57) ने दोहराया। वे 53 दिनों से महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में जिंदगी व मौत से जूझ रहे थे लेकिन शनिवार को जब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली तो उनके चेहरे पर खुशी की आंसू भर आए।

परिवार के लोग भी काफी खुश नजर आ रहे थे। सेवा लाल पहले कोरोना से लड़ाई लड़ी फिर ब्लैक फंगस के शिकार हो गए, लेकिन इस दौरान उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। धैर्य बनाए रखा, जो सबसे जरूरी था। सेवा लाल कहते हैं कि हौसला व आत्मविश्वास से कोई भी जंग जीती जा सकती है। मैंने कोरोना व ब्लैक फंगस को कभी भी अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया, जिसके कारण मैं शुगर के मरीज होने के बावजूद आज स्वस्थ होकर घर लौट रहा हूं। मेरे सामने कई मरीजों की मौत हो रही थी उसके बावजूद आत्मविश्वास को गिरने नहीं दिया, बढ़ाए रखा। अब सेवा लाल स्वस्थ हो गए हैं। शनिवार को अस्पताल से छुट्टी होने के बाद अधीक्षक डॉ. संजय कुमार, उपाधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी व उनके इलाज में तैनात चिकित्सक डॉ. राजीव सक्सेना व डॉ. शक्ति दिक्सेना ने उनसे मिलें और आगे की भविष्य के लिए शुभकामनाएं दिएं। सेवा लाल के इलाज के लिए आठ चिकित्सकों की टीम गठित की गई थी। टीम में डॉ. बलराम झा, डॉ. रोहित झा, डॉ. राजीव सक्सेना, डॉ. एन झा, डॉ. हिमांशु शेखर, डॉ. शक्ति दिक्सेना, डॉ. नितेश कुमार शर्मा व डॉ. रवींद्र वर्णवाल शामिल थे। एमजीएम में ब्लैक फंगस का यह पहला मरीज है।

मैं एमजीएम को कभी नहीं भूल सकता

रांची रातू रोड निवासी सेवा लाल महतो कहते हैं कि मैं अपने जीवन में एमजीएम अस्पताल को कभी नहीं भूल सकता। मेरी जान अगर बची है तो इस अस्पताल का बहुत बड़ा योगदान है। जब कोरोना पीक पर था। तब मुझे रांची के किसी भी अस्पताल में बेड नहीं मिली। वैसी परिस्थिति में मेरी बेटी एमजीएम के उपाधीक्षक डॉ. नकुल प्रसाद चौधरी से बात की तब यहां भी बेड खाली नहीं था लेकिन उपाधीक्षक ने कहा अगर मरीज गंभीर है तो उसे ले आइए। मेरे पास जो भी सुविधा उपलब्ध होगी उसे देने का भरपूर कोशिश करेंगे। उसके बाद मैं बिना देर किए हुए सीधे एमजीएम चले आया। घटना 20 अप्रैल की है। इसके बाद मेरा इलाज शुरू हुआ। इस दौरान शुगर 400 तक बढ़ गया। तब इंसुलिन देकर शुगर नियंत्रण में लाया गया। इसी दौरान मेरा आंख लाल होने लगा। चिकित्सकों को संदेह होने पर ब्लैक फंगस का जांच कराया तो बीमारी की पुष्टि हुई।

12 दिन में 60 इंजेक्शन देकर बचाई गई जान

ब्लैक फंगस की पुष्टि होने के बाद सेवा लाल को रोज पांच एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन पड़ने लगा। इस दौरान 12 दिन तक 60 इंजेक्शन पड़ा। अगर वे निजी अस्पताल में भर्ती होते तो उन्हें लाखों रुपये की इंजेक्शन खरीदने पड़ते। लेकिन, एमजीएम में उन्हें मुफ्त में इंजेक्शन देकर उनकी जान बचाई जा सकी। सेवा लाल ने कहा कि धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों ने उन्हें दूसरी जिंदगी दी है। उन्हीं की बदौलत वे स्वस्थ होकर घर वापसी कर रहे हैं।

सिविल सर्जन की भी रहा सक्रिय भूमिका

सिविल सर्जन डॉ. एके लाल की भी सक्रिय भूमिका रही। डॉ. एके लाल को जैसे ही पता चला था कि एमजीएम का ब्लैक फंगस का मरीज मिला है तो उन्होंने तत्काल एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन उपलब्ध करा दी और कहा कि इलाज में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देंगे।

 

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