बच्चे का चेहरा पीला होने की बात सुनकर घबरा गए थे स्वजन, चिकित्सक नहीं बता रहे थे स्पष्ट, फिर शुरू हुआ हंगामा

Jamshedpur News. महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही जारी है। सोमवार को एक नवजात बच्चे की सेहत की जानकारी नहीं मिलने से स्वजन परेशान हो गए। आक्रोशित हो गए और हंगामा करने लगे।

Rakesh RanjanMon, 26 Jul 2021 03:58 PM (IST)
शिशु विभाग में पहुंचे MGM Hospital के अधीक्षक डॉ संजय कुमार।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चिकित्सकों की लापरवाही जारी है। सोमवार को एक नवजात बच्चे की सेहत की जानकारी नहीं मिलने से स्वजन परेशान हो गए। आक्रोशित हो गए और हंगामा करने लगे।

इसकी जानकारी भाजपा नेता बिमल बैठा को हुई तो वह मौके पर पहुंचे और अधीक्षक डॉ. संजय कुमार को इसकी जानकारी दी। इसके बाद अधीक्षक शिशु रोग विभाग पहुंचे और बच्चे की सेहत की पूरी जानकारी मिल सकी। दरअसल, गम्हरिया निवासी तरुण प्रामाणिक की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर उसे 24 जुलाई को भर्ती किया गया। इस दौरान प्रसव सामान्य ढंग से हुआ। इसके बाद बच्चे की जानकारी स्वजन को सही ढंग से नहीं दी जा रही थी। इसे लेकर स्वजन काफी परेशान हो गए। बच्चे को लेकर स्वजन चिकित्सकों से लगातार संपर्क करने की कोशिश करते रहे लेकिन वे स्वजन को संतुष्ट नहीं कर सके। वहीं, नवजात को एनआईसीयू में भर्ती किया गया था। स्वजनों का कहना है कि प्रसव के कुछ देर के बाद एक चिकित्सक ने सिर्फ इतना बताया कि उसका पूरा शरीर पीला हो गया है। लेकिन उसके बाद कोई कुछ नहीं बता रहा है। रविवार से बच्चा को नहीं दिखाया गया है, जिससे स्वजन काफी घबरा गए।

पीलिया से ग्रस्त है बच्चा

स्वजनों द्वारा हंगामा करने की शिकायत जैसे ही एमजीएम अधीक्षक डॉ. संजय कुमार को मिली तो वह शिशु रोग विभाग पहुंचे। इस दौरान देखा गया कि बच्चा एनआईसीयू में भर्ती है। वह पीलिया रोग से ग्रस्त है, जिसके कारण उसका चेहरा पीला हो गया है। उसकी स्थिति भी गंभीर है। एनआईसीयू में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता है। यह सब जानकारी मरीज के स्वजन को दी गई तब जाकर वे शांत हुए।

एमजीएम में होना चाहिए हेल्प डेस्क

भाजपा नेता विमल बैठा ने मांग की है कि एमजीएम अस्पताल में आए दिन हो-हंगामा होता ही रहता है। इसके बावजूद यहां कोई सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि अधिकांश हंगामा इसलिए होता है कि क्योंकि मरीजों से संबंधित जानकारी उनके स्वजनों को नहीं दी जाती है। स्वजन इधर से उधर भटकते रहते हैं लेकिन उनको बताने वाला कोई नहीं रहता है। इसी दौरान कई मरीजों की मौत हो जाती है और उनका गुस्सा फुट पड़ता है। इसके लिए अगर हेल्प डेस्क खोल दिया जाए तो स्वजनों की परेशानी दूर हो जाएगी।

 

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