Adityapurnama : पढ़िए आदित्यपुर की कही-अनकही कहानी, कोरोना के डर से बिल में घुसे समाजसेवी

यहां पढ़िए आदित्यपुर की कही अनकही कहानी

बेहया कोरोना क्या-क्या रंग दिखाएगी पता नहीं। आज से ठीक एक साल पहले इस राक्षसी अदृश्य वायरस के कारण देश भर में लॉकडाउन लगा था तो अपने आदित्यपुर इलाके में गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए समाजसेवियों की फौज की लंबी लाइन लगी थी।

Jitendra SinghSun, 09 May 2021 06:07 PM (IST)

बेहया कोरोना क्या-क्या रंग दिखाएगी पता नहीं। आज से ठीक एक साल पहले इस राक्षसी अदृश्य वायरस के कारण देश भर में लॉकडाउन लगा था तो अपने आदित्यपुर इलाके में गरीबों व जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए समाजसेवियों की फौज की लंबी लाइन लगी थी। कोई पुलिस को भोजन करा रहा था तो कोई नगरे-नगरे, द्वारे-द्वारे लंगर चला वाहवाही लूट रहा था। वहीं कई परोपकारी तो राशन का कूपन बांटकर मजलूमों की दुआएं ले रहे थे। उप महापौर अमित सिंह, मेयर विनोद कुमार श्रीवास्तव बोरा का बोरा राशन बांट दे रहे थे। कांग्रेस नेता योगेंद्र शर्मा बच्चों को फल व दूध दे रहे थे। अबकी बार जब कोरोना दोगुने ताकत से अवतरित हुआ तो इसका रौद्र रूप देख परोपकारियों के होश फाख्ता हो गए और बिल में जा घुसे। अब गरीब हाथों में दुआएं ले बिल के बाहर टकटकी लगा इंतजार कर रहे हैं। कभी तो निकलेंगे।

अपनी पीठ थपथपा रही आदित्यपुर थाना पुलिस

हाल ही पंजाब के खूंखार अपराधी आदित्यपुर के हरिओम नगर से पकड़ा गया। पंजाब पुलिस पता लगाते-लगाते जमशेदपुर पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने गैवी सिंह को धर दबोचा, लेकिन वाहवाही ले उड़ी आदित्यपुर थाना पुलिस। अब थानेदार साहब बड़े रौब से सभी को कहते फिर रहे हैं, इतना बड़ा अपराधी को पकड़ना कोई मामलू बात नहीं है। लेकिन थानेदार साहब से जरा कोई ये तो पूछे, इतना बड़ा अपराधी वर्षों से पड़ोस में ही रहा था, लेकिन किसी को भनक तक क्यों नहीं लगी। खबरीलाल का तो यहां तक कहना है, गैवी सिंह तो कहीं और धराया, लेकिन पुलिस ने उसे हरिओमनगर से पकड़ने उपक्रम रचा। कारण, वह साहब के मोहल्ले में रहता था। अब इतना बड़ा अपराधी साहब के मोहल्ले में मिल जाए तो फिर किरकिरी होना तो तय था। इसी डर से अपराधी की गिरफ्तारी किसी दूसरे क्षेत्र का दिखा दिया गया। इज्जत भी कोई चीज है।

प्रशासन सुस्त, नर्सिंग होम मस्त

राक्षस या फिर शैतान हर युग में पैदा हुए हैं और आगे भी होते रहेंगे। कोरोना काल में भी इनकी कमी नहीं है। इंसानियत के चेहरे पर यह किसी कालिख की तरह होते हैं। एक तरफ अपनों की मौत के गम में लोगों के आंसू सूख चुके हैं तो दूसरी ओर ऐसे राक्षस इस आपदा में भी अवसर ढूढ़ रहे हैं। आदित्यपुर इलाके में दर्जनों नर्सिंग होम हैं। सभी की चांदी है। कोरोना से पीड़ित मरीजों की मजबूरी का बखूबी फायदा उठा रहे हैं। अगर आप वहां भर्ती होने जाएं तो आपको पैकेज बताया जाएगा। 25 हजार वाला या 50 हजार वाला। एंबुलेंस चालक एक किलोमीटर के एक हजार रुपये तक वसूल रहे हैं। हर तरफ अंधेरगर्दी है। कहीं कोई चेक प्वाइंट है ही नहीं। प्रशासन सुस्त है तो ऐसे लोग तो मस्त रहेंगे ही। हम तो आम जनता हैं साहब। हमारी नियति ही यही है। आपको भला इन सबसे क्या लेना-देना।

लोगों को टीका तो लगवाइए नेताजी

आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र में टीकाकरण को लेकर उदासीनता देखी जा रही है। हालत यह है कि टीकाकरण अभियान की जिम्मेवारी संभाल रहे कर्मचारी लक्ष्य भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वैक्सीन को लेकर लोगों के बीच गलतफहमियां पैदा हो गई है। लेकिन कोरोना के खिलाफ जंग जीतनी है तो कोविड नियमों के पालन के अलावा वैक्सीनेशन भी जरूरी है। आदित्यपुर की हरेक गली में आपको नेता मिल जाएंगे। अगर नेताजी सिर्फ अपने मोहल्ले व बस्ती की जिम्मेवारी ले लें तो स्थिति बदल सकती है। कोरोना के खिलाफ जंग में जीत की राह आसान हो जाएगी। अभी तो सिर्फ 45 साल के ऊपर वालों को ही टीका दिया जा रहा है। अगर 18 साल से ऊपर वालों को टीका लगना शुरू हो जाएगा तो फिर भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। पहले तो हमें बुजुर्गों को बचाना है। गलतफहमियों को दूर करें और टीका लगवाएं। 

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