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Jharkhand के मंत्री को अस्पताल संचालक ने दी खुली चुनौती, बोले- ऐसे स्वास्थ्य मंत्री को कूट दूंगा video viral

ट्रिपल-वन सेव लाइफ अस्पताल के संचालक डा. ओपी आनंद व बन्ना गुप्ता। फाइल फोटो

झारखंड के आदित्यपुर स्थित निजी अस्पताल ट्रिपल-वन सेव लाइफ अस्पताल के संचालक डा. ओपी आनंद ने स्वास्थ्य विभाग व स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी है। इसका वीडियो वायरल होते ही हड़कंप मच गया। इसमें मंत्री की कुटाइ करने की बात कही गइ है।

Rakesh RanjanSat, 15 May 2021 10:29 PM (IST)

जमशेदपुर, जासं।  झारखंड के आदित्यपुर स्थित निजी अस्पताल ट्रिपल-वन सेव लाइफ अस्पताल के संचालक डा. ओपी आनंद ने स्वास्थ्य विभाग व स्वास्थ्य मंत्री को चुनौती दी है। इसका वीडियो वायरल होते ही हड़कंप मच गया। वीडियो में डा. आनंद ने कहा है कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेश पर विभाग की टीम उनके अस्पताल में जांच करने आई थी। उनके यहां आठ मरीज भर्ती हैं, उनका लिहाज करते हुए चुप रहा, वरना ऐसे मंत्री और अधिकारियों को कूट कर रख देता।

दरअसल, यह वाकया तब हुआ, जब सरायकेला-खरसावां जिले के सिविल सर्जन डा. वारियल मार्डी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम जांच के लिए आई थी। निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए डा.आनंद ने स्वास्थ्य मंत्री और जांच टीम पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि मरीजों का लिहाज किया, वरना ऐसे अधिकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटता। आखिर किस आधार पर स्वास्थ्य मंत्री ने दवाओं और आक्सीजन के दाम तय किए हैं। मैं सरकार के किसी नियम को नहीं मानता। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री ने कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया है। ज्ञात हो कि इस तरह का मामला पहली बार आया है, जब किसी अस्पताल के संचालक ने स्वास्थ्य विभाग और मंत्री को इस तरह से चुनौती दी हो।

अस्पताल में मिली कई खामियां, स्वास्थ्य मंत्री को भेेजेंगे रिपोर्ट : सिविल सर्जन

इस संबंध में सिविल सर्जन डा. वारियल मार्डी ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को शिकायत मिली थी कि अस्पताल में मरीजों से ज्यादा शुल्क लिया जा रहा है। इसी आलोक में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच की गई। जांच के दौरान वहां आठ मरीज भर्ती पाए गए। इसमें कोविड के सात और कैंसर का एक मरीज था। जांच के दौरान निजी अस्पताल प्रबंधन की मनमानी और ठसक की कई बातें भी सामने आई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा टीम को जांच में पूरी तरह से सहयोग नहीं किया गया। यहां तक कि जांच के आधार पर सवाल खड़ा करते हुए अड़ियल रवैया भी दिखाया गया। अवैध वसूली के बारे में जब मरीजों के स्वजनों से पूछताछ की बातें सामने आईं, तो किसी भी मरीज के स्वजन को अस्पताल प्रबंधन द्वारा टीम के समक्ष नहीं प्रस्तुत किया गया। जांच के दौरान अस्पताल में अग्निशमन की एनओसी, प्रदूषण का सर्टिफिकेट, दर्ज तालिका जैसी कई कमियां पाई गईं। अस्पताल की जांच रिपोर्ट मंत्री को सौंपी जाएगी। जांच टीम में प्रभारी सिविल सर्जन डा. वारियल मार्डी के अलावा डा. अनिर्बन महतो व धनपत महतो शामिल थे।

वायरल वीडियो में क्या कहा डॉ. ओपी आनंद ने

आज लगभग 12.30 बजे सूचना मिली कि सिविल सर्जन कार्यालय, सरायकेला से एक कमेटी जांच के लिए आई है। जांच समिति से मैंने पूछा कि उद्देश्य क्या है, उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री व माननीय विधायक बन्ना गुप्ता ने जांच का आदेश दिया है। जांच का मुख्य बिंदु है, पैकेज रेट। मैंने जांच कमेटी के प्रभारी से पैकेज रेट के डिटेल के बारे में जानकारी मांगी। मैंने उनसे पूछा कि इस पैकेज रेट में किस प्रोटोकॉल के आधार पर रेट तय किया गया है। किस दवाई के आधार पर तय किया गया है। किस सामान पर तय किया गया है और कितना आक्सीजन लेवल पर तय किया गया है। किसी भी पैकेज रेट का निर्धारण उसके वास्तविक मूल्य के आधार पर ही होता है। इसके अलावा बेड चार्ज क्या है, डॉक्टर विजिट चार्ज क्या है। पैकेज का मतलब ये सब होता है। लेकिन झारखंड सरकार द्वारा किसी भी तरह का पत्राचार आज तक अस्पताल को उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे पता चले कि पैकेज का रेट क्या है।

मैंने कमेटी के सदस्यों को कहा कि आपके पास जो सूचना उपलब्ध है या जो सूची उपलब्ध है कि पैकेज रेट मे क्या-क्या चीजें हैं, वो उपलब्ध कराई जाए। उस पैकेज रेट का इलाज किस स्तर का दवाईयां उपयोग होगी, वह उपलब्ध कराई जाए। क्योंकि एक एंटी बायोटिक 3000 का भी होता है और एक 400 का भी होता है। जो सरकार अपने विधायक के ऊपर कई करोड़ खर्च करती है और गरीबों का रेट 6000 रु. तय करती है तो जनता और मुझे यह जानने का हक है कि आखिर वह रेट का आधार क्या है। क्या झाऱखंड की गरीब जनता के लिए अलग इलाज होगा और इसके मंत्री के लिए अलग इलाज होगा। माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी को मैं कहना चाहता हूं कि आपने बहुत बड़ी भूल की है। 111 सेव लाइफ हॉस्पीटल जैसे बेहतरीन व ताकतवर अस्पताल के ऊपर जांच का आदेश देकर बहुत गलत किया है।

जो लोग भी डॉक्टर होते हैं वो आनंद को जानते हैं। वो मरीजों के सामने किसी भी कानून, नियम किसी चीज को नहीं मानते हैं। मैं लिहाज कर गया वरना मैं इस जांच कमेटी को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटता। मेरे सात मरीज कोविड के हैं और दो वेंटिलेटर पर हैं, इसलिए मैं लिहाज कर गया। वरना मैं ऐसे मंत्री व ऐसे अधिकारियों को मैं कूट-कूट कर रख देता। मंत्री को भी कूटुंगा (अपशब्द बोलते हुए)। जांच कमेटी बनाने बैठा है ओपी आनंद पर (अपशब्द बोलते हुए)...।

 

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