Jamshedpur News: मरीज तड़प रहे हैं, खराब हो रही वेंटिलेटर, साहब उठाइए कदम

पूर्वी सिंहभूम में पूर्व में आई मशीन रखे-रखे खराब हो चुकी है। उससे सबक सिखने की जरूरत है। कोरोना काल में पूर्वी सिंहभूम जिले को लगभग 40 वेंटिलेटर मिली है। अब सभी खाली हो चुकी है। एक वेंटिलेटर की कीमत पैंतीस से चालीस हजार होती है।

Rakesh RanjanThu, 25 Nov 2021 01:10 PM (IST)
कोरोना के दौरान पीएम केयर फंड से मिली वेंटिलेटर मशीन।

अमित तिवारी, जमशेदपुर : कोरोना काल में पूर्वी सिंहभूम जिले को लगभग 40 वेंटिलेटर मशीन पीएम केयर फंड से मिली है। दूसरी लहर में इन मशीनों का उपयोग कर मरीजों की जान बचाई गई लेकिन अब लगभग सभी वेंटिलेटर खाली हो चुके हैं। किसी वेंटिलेटर पर मरीज भर्ती नहीं हैं। एेसे में वेंटिलेटर कोविड वार्ड सहित अन्य जगहों पर पड़ी हुई है। कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम को कुल 26 वेंटिलेटर मिला था। इसमें से दो वेंटिलेटर खराब हो चुकी है। इसकी सूचना संबंधित कंपनी को दी गई है लेकिन वहां से अभी तक कोई नहीं पहुंचा है। इसे लेकर कोविड वार्ड के चिकित्सकों ने चिंता जाहिर की है। चिकित्सकों का कहना है कि वेेंटिलेटर मशीन मंहगी होती है।

कोरोना काल में किसी तरह से इतनी महंगी-महंगी मशीनें खरीदी गई जिसे अब बेहतर रख-रखाव की जरूरत है। अगर, इन मशीनों को नियमित तौर पर उपयोग नहीं किया गया तो यह भी पूर्व में खरीदी गई वेंटिलेटर मशीन की तरह खराब हो जाएगी। कुछ वर्ष पूर्व की बात है एमजीएम को पांच वेंटिलेटर मशीन मिली थी। इसमें से तीन मशीनें रखे-रखे खराब हो गई। एेसे में दोबारा वह स्थिति उत्पन्न नहीं हो। क्योंकि बहुत मुश्किल से जिले को लगभग 40 वेंटिलेटर उपलब्ध हुआ है। एक वेंटिलेटर की कीमत लगभग 35 से 40 हजार रुपये होती है।

दो साल पूर्व मात्र एक वेंटिलेटर संचालित होता था

कोरोना काल से पूर्व का आंकड़ा देखा जाए तो जिले में सिर्फ एक वेंटिलेटर एमजीएम अस्पताल में संचालित होता था। बाकी किसी भी सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। सिर्फ एमजीएम के सर्जरी आईसीयू में एक वेंटिलेटर लगी हुई थी। वहीं, मेडिसीन आइसीयू में लगी सभी वेंटिलेटर मशीन खराब पड़ी हुई थी। एेसे में अगर ये सभी वेंटिलेटर मशीनों को नियमित उपयोग में नहीं लाया गया तो ये सभी पूर्व की तरह खराब हो जाएगी।

मैनपावर की कमी है बड़ा कारण

कोरोना काल में पूर्वी सिंहभूम जिले को लगभग 40 वेंटिलेटर मिला है। इसमें 26 एमजीएम अस्पताल को दिया गया। बाकी जिला स्वास्थ्य विभाग के पास मौजूद हैं। फिलहाल ये सभी वेंटिलेटर खाली हो चुके हैं। अब सवाल उठता है कि क्या इन वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है। एेसा नहीं है। आवश्यकता बिल्कुल है। कई एेसे गंभीर मरीज सरकारी अस्पताल आते हैं लेकिन उन्हें वेंटिलेटर के अभाव में हायर सेंटर रेफर कर दिया जा रहा है। अब यहां गरीब मरीजों के साथ परेशानी शुरू हो जाती है। गरीबों के पास उतने राशि नहीं होती कि वह किसी भी निजी अस्पतालों में इलाज करा सकें। इधर, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मैन पावर की संख्या बढ़ा दी जाए तो यह सभी वेंटिलेटर मशीने बेहतर ढंग से संचालित होने लगेगी और उसका लाभ मरीजों को मिलने लगेगा। अगर, जल्द ही इस संदर्भ में नहीं सोचा गया तो ये सारे मशीनें जंग खाने लगेगी और उसके बाद हम चाह कर भी कुछ नहीं कर पाएंगे।कोरोना काल में कई कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर कुछ वेंटिलेटर मशीनों को संचालित की जा रही थी लेकिन अब वे सभी कर्मचारी अपने पूर्व के काम में लौट चुके हैं।

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