पद्मनाभ साहित्य परिषद मंच के सावन मिलन समारोह में पावस के पारंपरिक गीतों की बहार

पद्मनाभ साहित्य परिषद मंच ने गूसावन मिलन समारोह का आयोजन किया। झूमर तो किसी ने पावस और सावन पर गाए। किसी ने पारंपरिक गीतों का समा बांधा तो किसी ने स्वरचित काव्य से मन में उमंगे जगाई । सभी ने इस मिलन को अपनी प्रस्तुति से खास बना दिया।

Rakesh RanjanFri, 30 Jul 2021 12:33 PM (IST)
पद्मनाभ साहित्य परिषद मंच के सावन मिलन में शिरकत करते प्रतिभागी।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पद्मनाभ साहित्य परिषद मंच ने गूगल मीट पर सावन मिलन समारोह का आयोजन किया।

इसकी संस्थापक प्रतिभा पराशर की देखरेख में समारोह को सफल बनाया गया। जमशेदपुर पद्मनाभ साहित्य परिषद की प्रभारी तथा अध्यक्ष निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी व उपासना सिन्हा ने मंच संचालन किया। स्वागत भाषण मंच की उपाध्यक्ष आरती श्रीवास्तव विपुला ने किया।

सरस्वती वंदना से प्रारंभ कार्यक्रम में सरस्वती वंदना वीणा पांडेय भारती ने की। अध्यक्षीय भाषण प्रतिभा पराशर ने सभी रचनाकारों को बड़ी ही तन्मयता से सुनने के उपरांत उन्होंने सभी सम्मिलित सखियों (साहित्य सेवियों) को बधाई एवं शुभकामनाएं दी। सावन मिलन में सभी उपस्थित रचनाकारों ने अपनी बेहतरीन प्रस्तुति दी। ऐसा लग रहा था कि सावन ने झूम झूमकर आज सभी के अंदर खुशियां और ऊर्जा का संचार कर दिया हो। गीतों की महफिल सजी थी। किसी ने कजरी तो किसी ने भोले शंकर की आराधना में गाए। किसी ने झूमर तो किसी ने पावस और सावन पर गाए। किसी ने पारंपरिक गीतों का समा बांधा तो किसी ने स्वरचित काव्य से मन में उमंगे जगाई । सभी ने इस मिलन को अपनी प्रस्तुति से खास बना दिया। कहा गया कि सभी शारीरिक दूरी का निर्वाह करते हुए घर से बाहर कुछ नहीं कर पा रहे,ऐसे में इस आयोजन ने ऊर्जा का काम किया। अत्यंत ही सुखद अनुभूति हुई। ऐसे कार्यक्रम होते रहने की सभी ने सराहना की और आगे भी होता रहे इस पर अपने विचार व्यक्त किए।

इन्होंने दी प्रस्तुति

पद्मा प्रसाद, निवेदिता श्रीवास्तव गार्गी, आरती श्रीवास्तव विपुला, वीणा पांडेय, डॉ.रजनी शर्मा, चंदा भारती, सुनीता श्रीवास्तव जागृति रांची, छाया प्रसाद, विंध्यवासिनी तिवारी बिन्नी,पूनम सिन्हा, आरूणा रश्मिदीप्त, उपासना सिन्हा, डॉ.आकांक्षा चौधरी, विनीता राय, माधुरी मिश्रा, अनीता निधि, कामिनी श्रीवास्तव, वीणा कुमारी नंदिनी, डॉ कमला महेश्वरी कमल बदायूं , पद्मा तिवारी दमोह, अनीता शरद झा, अन्नपूर्णा मालवीय आदि ने अपनी रचनाएं सुनायी। आयोजन यादगार बन गया।

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