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Agriculture : कई साल से दगा दे रहा मानसून, कर्ज तले दब रहे नीमडीह के किसान Jamshedpur News

नीमडीह (सरायकेला)[सुधीर गोराई]। Agriculture : चांडिल अनुमंडल के चारों प्रखंड नीमडीह, चांडिल, ईचागढ़ व कुकड़ू प्रखंड कृषि प्रधान क्षेत्र है। इस क्षेत्र के नब्बे प्रतिशत से अधिक निवासियों का जीवन निर्वाह का एकमात्र साधन कृषि उपज फसल है। यहां के निवासियों का भोजन, वस्त्र, मकान निर्माण, रोगियों की चिकित्सा, विवाह आदि अन्य पारिवारिक कार्य कृषि उपज फसल की विक्री के आमदनी से होती है। 

सिंचाई के साधनों की कमी से पैदावार में गिरावट

यहां का कृषि कार्य मानसूनी वर्षा से पर निर्भर है। सिंचाई के लिए पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं होने के कारण किसानों को बारिश पर निर्भर रहना मजबूरी है। विगत कई वर्षों से मानसून दगा देने के कारण धान की पैदावार में काफी गिरावट आई है। सब्जियों की उत्पादकता में भी कमी आई है। जिसके कारण किसानों के समक्ष भीषण आर्थिक संकट उत्पन्न होने लगा है। 

अच्‍छे मानसून के पूर्वानुमान से खुश थे किसान, अब होने लगे मायूस 

इस साल मौसम विभाग का पूर्वानुमान था कि औसत से अधिक वर्षा होगी लेकिन आषाढ़ का महीना बीत गया, सावन का पहला पखवाड़ा चल रहा है और अधिकतर खेत में धान रोपनी योग्य पानी नही है। अल्पबृष्टि के कारण तालाब, नाला आदि में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नही है।

किसानों की दर्द भरी दास्तां, ''दारऐना अभाव ते खेत पोसाऐना’'

लाकड़ी गांव निवासी किसान बाउरी टुडू दुखी होकर संथाली में कहते हैं कि ''दारऐना अभाव ते खेत पोसाऐना'' ( पानी के अभाव में खेत फट गया )। झिमड़ी निवासी किसान चिनिबास महतो कहते हैं कि धान व सब्जियों के बीज तथा उर्वरक पदार्थों के मूल्यों में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। विगत कई वर्षों से फसलों की पैदावार में कमी आई है जिसके कारण लागत मूल्य भी नहीं उठ रहा है।

हेसलोंग गांव निवासी शिवराज महतो कहते हैं कि इस क्षेत्र का प्रमुख फसल धान है। धान की बीज एक सौ से साढ़े तीन सौ रुपये प्रति किलोग्राम के दर से खरीद कर बोया गया है। लेकिन इस साल भी मानसून की बेरुखी के कारण ठीक से धान रोपनी नहीं हो रहा है। खेत में धान की बिचड़ा मुरझाने लगा है। जिसके कारण किसानों का कर्ज तले दबना निश्चित है।

विशाल जलाशय चांडिल डैम के बावजूद नहीं है सिंचाई व्यवस्था

विशाल जलाशय चांडिल डैम 

चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में विशाल जलाशय चांडिल डैम स्थित है। लेकिन इस बांध से सौ एकड़ भूमि की भी सिंचाई नही होती है। मुख्य नहर के आसपास मात्र कुछ एकड़ जमीन में सिंचाई होती है। यहां के निवासियों का उम्मीद थी कि चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कृषि योग्य जमीन का सिंचाई के लिए सरकार योजना शुरू करेगी लेकिन दो दशक बाद भी सिंचाई का प्रबंध नही किया गया।

अनेक किसान परिवार के सदस्य रोजगार के लिए क्षेत्र या राज्य के बाहर जाते थे लेकिन इस साल विश्व महामारी के कारण बाहर जाने का रास्ता भी बंद हो गया। ऐसे में लोगों के सामने भीषण आर्थिक संकट उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

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