Lakme India : जेआरडी टाटा की लक्ष्मी कैसे बन गई देश का नंबर वन ब्यूटी ब्रांड लैक्मे, आप भी जान लें

Lakme India मध्यम वर्ग की पहली पसंद लैक्मे का नाम तो आपने सुना होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि सालाना 1900 करोड़ रुपए करोड़ का कारोबार करने वाला इस ब्रांड की शुरुआत जेआरडी टाटा ने की थी। कभी इसे लक्ष्मी कहा जाता था। जानिए लैक्मे का इतिहास...

Jitendra SinghTue, 19 Oct 2021 07:15 AM (IST)
Lakme India : जेआरडी टाटा की लक्ष्मी कैसे बन गई देश का नंबर वन ब्यूटी ब्रांड लैक्मे,

जमशेदपुर, जासं। लैक्मे। यह भारत का नंबर वन ब्यूटी ब्रांड के रूप में स्थापित हो चुका है। महिलाएं इस ब्रांड को हाथों हाथ खरीदते हैं। यह ब्रांड भारत की पहचान बन चुकी है। यह भारत के लोगों के जेब के हिसाब से बनी है। यह आसान से कीमत पर भी उपलब्ध है। इस कारण यह उत्पाद सबसे ज्यादा बिकाऊ और टिकाऊ है, लेकिन इसके पीछे एक रोचक किस्सा जुड़ा हुआ है। दरअसल यह जेआरडी टाटा की देन है। जेआरडी टाटा ने पहले इस ब्रांड को लक्ष्मी के रूप में स्थापित किया था और अब यह लैक्मे के रूप में स्थापित हो चुकी है।

जब पहले पीएम नेहरू का आइडिया जेआरडी टाटा को भाया

आज से 70 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू उन दिनों देश में नए उद्योग की स्थापना पर काम कर रहे थे। उन्हें भारतीय ब्यूटी ब्रांड के न होने का मलाल था, इसके लिए एक आइडिया उनके दिमाग में आया। इस आइडिया को उद्योगपति जेआरडी टाटा के साथ शेयर किया।

जेआरडी को टाटा को यह आइडिया को भा गया। उद्योगों की चेन तैयार करने में टाटा माहिर थे। नेहरू से आइडिया मिलने के बाद 1952 में लक्ष्मी नामक ब्यूटी प्रोडक्ट को लांच किया गया। कई सालों तक लक्ष्मी ब्यूटी प्रोडक्ट की भारी डिमांड बढ़ी। बताया जा रहा है कि 1960 के बाद इसके नाम में परिवर्तन हुआ और यह लैक्मे के रूप में प्रसिद्ध हुआ। इसकी कहानी गूगल में भी दिखाई पड़ती है।

लक्ष्मी के विज्ञापन में बालीवुड एक्सट्रेस की भरमार

लक्ष्मी प्रोडक्ट को लांच करते ही इसके प्रचार-प्रसार के लिए बालीवुड एक्सट्रेस का सहारा लिया गया। इससे व्यापक प्रचार प्रसार भी हुआ। लक्ष्मी के विज्ञापनों में जयाप्रदा, रेखा, हेमा मालिनी तक को 60 के दशक तक देखा गया। लक्ष्मी के लांच होने के बाद भारत में विदेशी ब्यूटी प्रोडक्ट की खेप आनी लगभग बंद हो गई थी। फिल्मों में भी इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जाने लगा। धीरे-धीरे भारत के प्रत्येक घरों की महिलाओं के सौंदर्य प्रसाधन के रूप में स्थापित हो गया। गली-मुहल्ले की दुकानों में यह बिकने लगा।

1966 में बिक गई लक्ष्मी

60 के दशक में जेआरडी टाटा दूसरी कंपनियों में ध्यान देने लगे। स्टील सेक्टर प्राथमिकता थी। ऐसे में उन्होंने लक्ष्मी को बेचने का फैसला किया। दुनिया भर के ब्रांडेड कंपनियों ने बोली लगाई, लेकिन बोली जीती हिंदुस्तान लीवर ने। मध्यम वर्ग की पहली पसंद रही लक्ष्मी का नाम बदलकर लैक्मे कर दिया था। जेआरडी टाटा को फ्रेंच भाषा काफी पसंद था। हिंदुस्तान लीवर ने उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए इसे लैक्मे नाम रखा गया। फ्रेंच भाषा में लैक्मे का अर्थ लक्ष्मी होता है।

बाजार में लैक्मे भी छा गई

लक्ष्मी की तरह लैक्मे भी बाजार में छा गया। युवाओं को ब्यूटी के बारे में जानकारी देने के लिए लैक्मे ने ब्यूटी कोर्स की शुरुआत की। गरीब लड़कियों को स्कॉलरशिप प्रोग्राम के साथ स्टार्ट अप शुरू करने के लिए भी प्रेरित किया जाने लगा। आज की तारीख में लैक्मे नाम से भारत के विभिन्न शहरों में लैक्मे के 110 व विदेशों में 100 से ज्यादा पार्लर चल रहे हैं।

मैब्लिन व रेवलोन जैसे ग्लोबल ब्रांड भारत में आने के बावजूद लैक्मे का ब्यूटी ब्रांड में शेयर सबसे अधिक है। यह ब्रांड भारत में ही 1900 करोड़ का सालाना कारोबार करता है।

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