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पूर्व प्रिंसपिल पर मेहरबान कोल्हान विवि, 30 साल में जमा नहीं कर पायीं जन्म प्रमाण; फिर मिला एक माह का समय

जमशेदपुर (जासं) । चाईबासा महिला कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. आशा मिश्रा को फर्जी जन्मतिथि प्रस्तुत करने के आरोप में कोल्हान विश्वविद्यालय ने जबरन सेवानिवृत्ति करा दी। वे पिछले 30 साल से प्रोफेसर के पद पर विभिन्न कॉलेजों में अपनी सेवा दे चुकी हैं। इसके बावजूद वह सक्षम पदाधिकारी असली जन्म प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पायीं। उनकी सेवा पुस्तिका में दो-दो जन्म तिथि अंकित हैं। इस कारण विश्वविद्यालय ने तत्काल पहली जन्म तिथि को आधार पर उन्हेंं शोकॉज करते हुए रिटायर कर दिया, लेकिन सारी पावनाओं का भुगतान रुका हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गंगाधर पंडा की ओर से असली प्रमाण पत्र जमा करने के लिए पहले एक सप्ताह, बाद में 15 दिन तथा अब फिर से एक माह का समय दिया गया है। अगर इस दौरान वह सक्षम पदाधिकारी का प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पाती है तो उन पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई होगी। 

तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी जांच

चाईबासा महिला कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. आशा मिश्रा के उम्र विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी में मानवीकी डीन डॉ. मुदिता चंद्रा, वित्त पदाधिकारी डॉ. सुधांशु कुमार, डिप्टी रजिस्ट्रार मंगलेश्वर भगत को शामिल किया गया था। कमेटी ने पाया कि सेवा पुस्तिका में पहली जन्म तिथि 22 मई 1995 है  तथा दूसरी जन्म तिथि 17 जनवरी 1996 है। इन दोनों जन्म तिथि में से किसी एक का भी जन्म प्रमाण सक्षम पदाधिकारी से निर्गत नहीं है।

 अहम बातें

- मामला चाईबासा महिला कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल डॉ. आशा मिश्रा के उम्र विवाद का, 48 घंटे का समय देकर जबरन किया सेवानिवृत्त

- फिर दिया एक सप्ताह का समय, इसके बाद 15 दिन, अब असली प्रमाण पत्र जमा करने को कोल्हान विश्वविद्यालय ने दिया एक माह का समय

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