खरकई-स्वर्णरेखा उफनाई, खतरे के निशान से ऊपर पहुंची नदियां, लगातार जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में मची अफरातफरी

Kharkai and Swarnarekha River above danger. खरकई व स्वर्णरेखा नदी में ओडिशा के मयूरभंज जिला स्थित खरकई व ब्यांगबिल डैम के अलावा सरायकेला-खरसावां जिला स्थित चांडिल डैम का फाटक खोलने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

Rakesh RanjanThu, 16 Sep 2021 12:20 PM (IST)
बागबेड़ा, शास्त्रीनगर व मानगो में प्रशासनिक अधिकारी तैनात।

जमशेदपुर, जासं। लगातार एक सप्ताह तक बारिश होने का असर अब दिखने लगा है। हालांकि जमशेदपुर में पिछले दो दिन से बारिश नहीं के बराबर बारिश हुई, लेकिन रांची व चाईबासा समेत ओडिशा में जबरदस्त बारिश का असर जमशेदपुर से बहने वाली खरकई व स्वर्णरेखा नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई है। जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

जिला प्रशासन ने गुरुवार की सुबह नौ बजे जो सूचना जारी की है, उसके मुताबिक मानगो पुल के पास स्वर्णरेखा नदी के खतरे का निशान 121.50 मीटर है, जबकि सुबह नौ बजे यहां का जलस्तर 121.68 मीटर हाे गया था। इसी तरह आदित्यपुर पुल पर खरकई नदी के खतरे का निशान 129 मीटर है, जबकि पानी 130.68 मीटर था। चिंता की बात है कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में अफरातफरी मच गई है। गनीमत है कि बुधवार व गुरुवार से जमशेदपुर समेत आसपास के इलाकों में बारिश नहीं हो रही है।

बागबेड़ा, शास्त्रीनगर व मानगो में प्रशासनिक अधिकारी तैनात

खरकई व स्वर्णरेखा नदी में ओडिशा के मयूरभंज जिला स्थित खरकई व ब्यांगबिल डैम के अलावा सरायकेला-खरसावां जिला स्थित चांडिल डैम का फाटक खोलने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इससे जुगसलाई से सटे बागबेड़ा, कदमा के शास्त्रीनगर में खरकई नदी के किनारे बसी बस्तियों के अलावा मानगो व कपाली में स्वर्णरेखा नदी के किनारे बसी बस्तियों में अफरातफरी का माहौल है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा मानगो नगर निगम, जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति व जुगसलाई नगर परिषद को सक्रिय कर दिया गया है। राहत सामग्री के साथ तीनों निकाय के अधिकारी-कर्मचारी निचले इलाकों में पहुंच गए हैं। यहां से लाेगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। निचले इलाकों के लोग खुद भी रात भर जगे रहे।

27 मई व 19 जून को भी आई थी बाढ़

इससे पहले जमशेदपुर में इस वर्ष दो बार बाढ़ आ चुकी है, जिसमें एक बार 27 मई व दूसरी बार 19 जून को ऐसी स्थिति हुई थी। तब भी ओडिशा व चांडिल डैम का फाटक खोलने से बाढ़ का खतरा उत्पन्न हुआ था। तब एनडीआरएफ की टीम को भी

लगना पड़ा था, जिससे किसी की जान नहीं गई। सामान को भी बहुत कम क्षति पहुंची। इस बार भी एनडीआरएफ को जिला प्रशासन ने आने के लिए सूचना देने के लिए कहा जा रहा है। तब तक रेडक्रास व सिविल डिफेंस की टीम राहत कार्य में जुट गई है।

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