JRD Tata Birth Anniversary : इनसे सीखें बिजनेस के गुर, जब खुद विमान का टॉयलेट पेपर बदलने चले गए जेआरडी टाटा

समर्पण से किया गया कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बशर्ते आपके काम से कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद मिलती हो। जेआरडी टाटा की जयंती पर हम उनके जीवन के कुछ ऐसे अनछुए पहलुओं को उजागर कर रहे हैं। आप भी पढें

Rakesh RanjanWed, 28 Jul 2021 02:11 PM (IST)
जेआरडी को यात्री सुविधा की रहती थी हमेशा चिंता

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। जहांगीर रतनजी दादा भाई टाटा, जिसें हम टाटा समूह के चेयरमैन जेआरडी टाटा के नाम से जानते हैं। 29 जुलाई को हम उनकी 117वीं जयंती मना रहे हैं। उनके जीवन से हमें न सिर्फ सीख मिलती है बल्कि युवाओं को प्रेरणा मिलती है कि समर्पण से किया गया कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बशर्ते आपके काम से कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचने में मदद मिलती हो। जेआरडी टाटा की जयंती पर हम उनके जीवन के कुछ ऐसे अनछुए पहलुओं को उजागर कर रहे हैं जो उनके समर्पण की कहानी बयां करता है।

उड़ान से था प्रेम

जेआरडी टाटा भले ही देश के सबसे बड़े समूहों में से एक, टाटा समूह के चेयरमैन थे लेकिन उनका पहला प्यार विमान उड़ाना था। वे भारत के पहले कॉर्मिशयल पायलट थे। वर्ष 1930 में आगा खान पुरस्कार में शामिल होने के लिए उन्होंने भारत से इंग्लैड के लिए एकल उड़ान भरी थी। दो साल बाद ही उन्होंने टाटा एयरलाइंस की स्थापना की थी जिसका नाम बदल कर अब एयर इंडिया रखा गया है। एयर इंडिया की स्थापना के 50 वर्ष बाद भी युवा पीढ़ी में रोमांच पैदा करने के लिए 78 वर्ष की उम्र में जेआरडी टाटा ने करांची से बॉम्बे तक की उड़ान भरी थी।

जब खुद टॉयलेट पेपर बदलने चले गए जेआरडी

पिछले दिनों लिंक्डइन के ब्रांड कस्टोडियन हरीश भट्ट ने जेआरडी टाटा के जीवन से जुड़ी एक कहानी साझा की है। जिसमें बताया कि एक बार जेआरडी टाटा एयर इंडिया की यात्रा कर रहे थे। उनके बगल में आरबीआई के पूर्व गर्वनर एलके झा बैठे हुए थे। अचानक जेआरडी टाटा अपनी सीट छोड़कर चले गए और एक घंटे बाद वापस आए। जब एलके झा ने पूछा कि वे कहां चले गए थे तो जेआरडी टाटा ने जवाब दिया कि टॉयलेट साफ ही कि नहीं, यह देखने गया था। झा ने सवाल किया कि ये देखने के लिए इतनी देर। तब उन्होंने जवाब दिया कि टॉयलेट पेपर ठीक से नहीं लगा था, उसे ठीक कर रहा था।

जेआरडी को यात्री सुविधा की रहती थी हमेशा चिंता

इस यात्रा के बाद जेआरडी टाटा इंडियन एयरलाइंस के हर बोइंग विमान के टॉयलेट में गए और व्यक्तिगत रूप से सभी टॉयलेटों की जांच की। जहां गलती दिखी उसे व्यक्तिगत रूप से सुधारा भी। एलके झा ने एक बार अपने भाषण में कहा था कि जेआरडी टाटा एयर इंडिया के चेयरमैन नहीं थे फिर भी उन्हें यात्री सुविधा को बेहतर बनाने की हमेशा चिंता रहती थी। वे अपनी हर विमान यात्रा के बाद एक नोट कर्मचारियों को छोड़कर जाते थे। जिसमें यात्री सुविधा को बेहतर बनाने के लिए मेंटेनेंस व एयरलाइंस स्टाफ के लिए कुछ टिप्पणी होती थी।

 

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