सरकारी कार्यालयों में कोरोना संक्रमण की डर से पसरा रहा सन्नाटा

सरकारी कार्यालयों में कोरोना संक्रमण की डर से पसरा रहा सन्नाटा
Publish Date:Tue, 29 Sep 2020 01:39 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : कोरोना को लेकर सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है। यह स्थिति कई दिनों से है। हर दफ्तर का कोई न कोई अधिकारी या कर्मचारी इस बीच संक्रमित हो जा रहा है। जब वे निगेटिव होते हैं तो उन्हें दोबारा संक्रमण का भय सता रहा है। जो बचे हैं, वह इस बीमारी की चपेट में आना नहीं चाहते। यही वजह है कि सरकारी दफ्तरों-कार्यालय में बेवजह किसी के आने पर सख्ती नजर आ रही है। जरूरी भी हुआ तो टेली-कांफ्रेंसिग या दूर से ही अपनी बात रख सकता है। मास्क पहने बिना तो घुस ही नहीं सकते, हर आदमी टोकेगा। हाथ धोने या सैनिटाइजर लगाए बिना भी नहीं आने दिया जा रहा है। हालांकि कई दफ्तरों में इसे लेकर ढिलाई बरती जा रही है। दैनिक जागरण ने सोमवार को एक साथ उन सभी कार्यालयों की पड़ताल की, जहां आम लोगों का आना-जाना ज्यादा होता है। इसमें तरह-तरह की बातें दिखीं। यहां प्रस्तुत है, जागरण पड़ताल की रिपोर्ट।

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उपायुक्त कार्यालय में दो जगह रोकते पुलिसकर्मी

उपायुक्त कार्यालय में प्रवेश करना आसान नहीं है। करीब दो माह से मेन गेट बंद रहता है। जिसे ज्ञापन देना है, बाहर ही रखे ड्रॉपबॉक्स में डालने को कहा जाता है। बहुत ज्यादा जरूरी हुआ, तभी सिपाही जाने की अनुमति देगा। अंदर जाने पर पोर्टिको के पास एक और पुलिस का जवान मिलेगा, जो सबसे पहले पास में लगे नल से हाथ धोकर आने को कहेगा। इसके बाद वह थर्मल स्क्रीनिग करेगा। शरीर का तापमान सामान्य हुआ, तो अंदर जाने की अनुमति मिलेगी। अंदर चले भी गए तो दूर से ही किसी क्लर्क या अफसर से बात कर सकते हैं। हालांकि अभी उपायुक्त कार्यालय में कोई कर्मचारी संक्रमित नहीं है। गोपनीय शाखा के एक कर्मचारी संक्रमित हुए थे, लेकिन अब वह भी निगेटिव हो गए हैं। बहरहाल, सख्ती इतनी है कि सरकारी वाहन के बिना मेन गेट नहीं खुलता, चाहे वह कोई भी हो। परिसर में बैंक ऑफ इंडिया होने की वजह से थोड़ी चहल-पहल रहती है, वरना सन्नाटा ही रहता है।

निबंधन कार्यालय में भी कम आ रहे लोग

समाहरणालय परिसर स्थित निबंधन कार्यालय के मुख्य द्वार का ताला सुबह 10.10 बजे एक महिला कर्मचारी ने खोला। उसके पांच मिनट बाद एक दूसरी महिला कर्मचारी कार्यालय पहुंची। इसके बाद एक-एक कर कर्मचारी आने लगे। हालांकि सुबह 10 बजे से 11.30 बजे तक निबंधन कार्यालय में सन्नाटा ही पसरा हुआ था। कोरोना संक्रमण के भय से यहां कम ही लोग आ रहे हैं। निबंधन कार्यालय में जो भी लोग आते हैं, उन्हें मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना मास्क के कार्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। इतना ही नहीं कार्यालय में आने वाले सभी कर्मचारियों ने अपने चेहरों पर मास्क लगा रखा था और बार-बार अपने हाथों को सैनिटाइज कर रहे थे। बाहरी लोगों को निबंधन कार्यालय में प्रवेश की मनाही नहीं है, लेकिन मास्क पहनकर और हाथों को सैनिटाइज कर ही कार्यालय में वे प्रवेश कर सकते हैं।

जमशेदपुर अक्षेस दफ्तार में बाबू मनमर्जी से आ रहे थे कार्यालय

जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी कृष्ण कुमार सोमवार की सुबह से ही कोरोना जांच केंद्रों का निरीक्षण करने में लगे हुए थे, वहीं दूसरी ओर कार्यालय के कर्मचारी अपने-अपने समय से आ रहे थे। सुबह करीब 10 बजे जन्म प्रमाणपत्र का फार्म देने वाले कर्मचारी निरंजन, डीके पांडेय, मेघा कार्यालय आ चुके थे। इनके अलावा पूरा कार्यालय सुनसान लग रहा था।

जब 10.30 बजे कार्यालय में गोपाल, राजेय राय, मनोज शर्मा आदि पहुंचे। जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति में लगभग प्रतिदिन आने वाले 60 कर्मचारियों में 10.30 बजे तक मात्र छह कर्मचारी ही कार्यालय पहुंचे थे। वहीं जन्म प्रमाणपत्र, मृत्यु प्रमाणपत्र, पीएम आवास, फुटपाथी दुकानदार 10 हजार रुपये लोन से संबंधित लोगों का आना लगातार जारी रहा। गेट पर गार्ड लोगों को तीन नंबर गेट में भेज रहा था, जहां जन्म प्रमाण पत्र के लिए फार्म दिया जा रहा था। सुबह 11 बजे तक मुश्किल से 12 कर्मचारी ही कार्यालय पहुंचे थे।

डीएलसी आफिस में अब नहीं हो रही भीड़

सीतारामडेरा स्थित उपश्रमायुक्त कार्यालय में पहले जैसी भीड़ नहीं हो रही है। सोमवार को डीएलसी कार्यालय अपने निश्चित समय पर खुल गया था। 11 बजे कार्यालय में सभी कर्मचारी मौजूद थे। वहां नीेचे पांच-छह लोग अलग-अलग स्थानों पर बैठे थे। उन्हें अपनी शिकायत दर्ज करनी थी। ऑफिस के कर्मचारी अपना काम निपटाने में लगे हुए थे। उपश्रमायुक्त किसी कार्य से रांची गए थे। कोरोना को लेकर यहां पूरी सख्ती बरती जा रही है। ऑनलाइन शिकायत लेने व उसका निराकरण किया जा रहा है। कार्यालय के नीचे ड्रॉपबॉक्स रखा गया है, जिसमें मजदूर अपनी शिकायत लिखकर डाल रहे थे। कार्यालय में पांच व्यक्ति से ज्यादा एक साथ प्रवेश करने की मनाही है। सभी को मास्क पहनना व सैनिटाइजर का प्रयोग करना अनिवार्य है।

शिक्षा विभाग में मास्क लगाकर बैठे रहते कर्मचारी

जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय में कर्मचारी रोस्टर के हिसाब से आ रहे हैं। मास्क लगाकर अपने कार्यों का निष्पादन कर रहे हैं। एक-दो घंटे में ही सारे कार्यों का निष्पादन हो जाता है। उसके बाद कर्मचारी मास्क लगाकर दिन भर बैठे रहते हैं। एक कक्ष से दूसरे कक्ष में जाकर समय बिताते हैं। सिर्फ और सिर्फ आवश्यक कार्य ही शिक्षा विभाग द्वारा हो रहा है। अगर किसी को मिलना है तो इसके लिए उन्हें कोविड-19 के नियमों का पालन करना होगा। इसकी सूचना पदाधिकारियों के कक्ष के बाहर लगा दी गई है।

बिष्टुपुर डाकघर में बैठे-बैठे कर्मचारी करता थर्मल स्क्रीनिग

बिष्टुपुर स्थित मुख्य डाकघर के मेन गेट पर दो कर्मचारी कुर्सी लगाए बैठे रहते हैं। एक डाकघर में आने वाले लोगों को सैनिटाइजर दे रहा था, जबकि दूसरा कर्मचारी उनकी थर्मल स्क्रीनिग से जांच कर रहा था। इनका पूरा काम कुर्सी पर बैठे-बैठे ही हो रहा है। पूछने पर कहते हैं कि देखिए, बैठे रहने पर ही थर्मल स्क्रीनिग मशीन सही ढंग से काम करती है। इस डाकघर में लगभग 110 कर्मचारी हैं। इनमें 65 पोस्टल असिस्टेंट और शेष डिप्टी पोस्ट मास्टर, मेल असिस्टेंट पोस्ट मास्टर सहित अन्य कर्मचारी हैं। मेल सेक्शन सुबह आठ बजे और काउंटर सुबह नौ बजे से शुरू हो जाता है। लेकिन काउंटर के पीछे सुपरवाइजर सेक्शन में सुबह सवा दस बजे तक मात्र एक महिला कर्मचारी ही कार्यरत थी। पूछने पर पता चला कि बाकी लोग आ रहे हैं। मेन गेट से आने वालों की हो सैनिटाइजर-मास्क का प्रयोग कराया जा रहा था, पिछले दरवाजे से ऑफिस आने वालों को केवल हाथ में सैनिटाइजर देकर कोरम पूरा किया जा रहा है। यह तब है जब इस कार्यालय के कुछ कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं।

जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय से निराश होकर लौट रहे लोग

कोरोना की वजह से जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय में कार्य को लेकर पहुंचने वाले ज्यादातर लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। प्रखंड व अंचल के दोनों वरीय अधिकारी कोरोना संक्रमित होकर क्वारंटाइन हैं। ज्यादा परेशानी ऐसे लोगों को हो रही है, जो कैंसर के उपचार के लिए आय, आवासीय या पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र बनाने पहुंच रहे हैं। सोमवार को पहली पाली में अंचल व प्रखंड में कार्यरत कर्मचारियों की ज्यादातर कुर्सियां खाली ही दिखीं। कई लोग अपनी समस्या लेकर पहुंचे, मगर कर्मचारी नदारद होने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि ज्यादातर कार्य अब प्रज्ञा केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन हो रहा है। ऐसे में लोगों को प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाने की आवश्यकता ही नहीं है। मजे की बात यह है कि प्रखंड कार्यालय के मुख्यद्वार पर ना ही टेंपरेचर नापने वाला कोई कर्मचारी है, ना सैनिटाइजर देने वाला। लोग बिना रोक-टोक बगैर मास्क के ही धड़ल्ले से कार्यालय के अंदर प्रवेश कर रहे हैं। कुछ कर्मचारी मास्क लगाकर ड्यूटी बजा रहे हैं, तो कई बिना मास्क के ही।

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