मां कब आओगी घर...कहकर बेटी रोने लगती है...अमोला लड़ रही कोरोना से जंग

मां कब आओगी घर...कहकर बेटी रोने लगती है...अमोला लड़ रही कोरोना से जंग

International Nurse Day परसुडीह स्थित सदर अस्पताल में तैनात नर्स अमोला बारला एक माह से घर नहीं गई है। वह मरीजों की सेवा करते करते अब बीमार पड़ गई है।कोरोना से लड़ रही अमोला बारला की चार साल की बेटी है।

Jitendra SinghWed, 12 May 2021 02:30 AM (IST)

अमित तिवारी, जमशेदपुर : मां कब आओगी घर...कहकर चार साल की शैल्वी आन्या रोने लगती है। वह बार-बार एक ही रट लगाती है-मां कब आओगी घर...मां कब आओगी घर...। बेटी की आंसू देखकर मां (अमोला बारला) की भी आंखें भर आती है। वह बेटी को रोज दिलासा देती है...बहुत जल्द आऊंगी...बहुत जल्द आऊंगी। लेकिन, तिथि न तो मां को पता और न ही बेटी को। मां-बेटी की यह दृश्य देखकर सन 1997 में रिलीज हुई फिल्म बॉर्डर की वह गीत याद आ जाती है जिसमें सैनिक दुश्मनों से जंग लड़ते रहते थे और उनके घर वाले चिट्ठी भेजते थे, संदेश भेजते थे और पूछते थे कि घर कब आओगे...। सैनिक भी खत लिखते थे और कहते थे कि स्थिति बहुत तनावपूर्ण है...अभी आना संभव नहीं है। उस दौर में वीडियो कॉल की सुविधा नहीं थी तो लोग चिट्ठी लिखा करते थे। ठीक वैसी हीं परिस्थिति अब बन आई है।

खैर, वह दुश्मनों से जंग थी और अभी कोरोना से। परसुडीह स्थित सदर अस्पताल में तैनात नर्स अमोला बारला एक माह से घर नहीं गई है। वह मरीजों की सेवा करते करते अब बीमार पड़ गई है। पता नहीं वह कब स्वस्थ होगी लेकिन हम सभी को प्रार्थना करनी चाहिए की वह जल्द ठीक हो जाए। कोरोना से लड़ रही अमोला बारला की चार साल की बेटी है। उसका नाम शैल्वी आन्या है। वीडियो कॉल से रोज बात होती है तो जुबान से एक ही आवाज निकलती है कि घर कब आओगी। अमोला फिलहाल टेल्को के एक क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती है। हालांकि, उनकी स्थिति ठीक है और उम्मीद है कि वह जल्द ही स्वस्थ हो जाएगी।

जहां जरूरत पड़ी वहां तैनात रही अमोला 

परसुडीह निवासी अमोला कहती हैं कि यह समय पीछे हटने का नहीं बल्कि कोरोना से जंग लड़ने का है। डर सबके मन में रहता है लेकिन डर के आगे ही जीत होता है। डर कर अगर हम पीछे हट जाए तो इतनी बड़ी लड़ाई नहीं जीती जा सकती। देश में कोरोना भयावह हो चुका है। अपनी जान भी बचानी है और दूसरे लोगों की भी। पूर्वी सिंहभूम जिले में जब से कोरोना की इंट्री हुई है तब से अमोला जुटी हुई है। शुरुआती दौर में वह पटमदा में तैनात थी। उसके बाद सिदगोड़ा कोविड जांच सेंटर में तैनाती हुई। फिर जिला सर्विलांस विभाग भेजा गया, जहां वे सैंपल संग्रह करती थी। उसके बाद फिलहाल सदर अस्पताल के कोविड वार्ड में उनकी ड्यूटी है। लेकिन, संक्रमित होने की वजह से वह अभी क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती है।

अखिला की बेटी दिनभर करते रहती है फोन 

सोनारी कागलनगर निवासी अखिला निधेश की तैनाती फिलहाल जिला सर्विलांस विभाग में है। उनकी ड्यूटी सैंपल को संग्रह कर जांच के लिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज या फिर अन्य लैब में भेजना है। ताकि सही समय पर रिपोर्ट आ सकें। अखिला निधेश की चार साल की बेटी है। वह बेटी को घर में छोड़ आती है। हालांकि, उसे देखने के लिए एक महिला को तैनात की गई है लेकिन, बेटी दिया बार-बार मां को फोन कर उससे पूछते रहती है मां घर कब आओगी, कितने देर में आओगी। कितने बजे आओगी। जब देरी होती तो वीडियो कॉल भी करती है। अखिला कहती है कि जब मैं ड्यूटी से घर जाती हूं तो गर्म पानी से स्नान करती हूं। उसके बाद ही रूम में प्रवेश करती हूं। घर में बच्चा है तो विशेष ध्यान रखना होता है।

अखिला निधेश वीडियो कॉल से अपनी बच्ची से बात करती है

संगीता अपनी बेटी को खिलाती है तुलसी पता 

टेल्को स्थित डीलर्स हॉस्टल में संगीता कुमारी रविदास अपनी ड्यूटी निभा रही है। वह कहती है कि कोरोना में नर्सों की भूमिका काफी ज्यादा बढ़ गई है। ऐसे में उन्हें अलग-अलग जगहों पर सेवा देनी होती है। जब से कोरोना की शुरूआत हुई है तभी से ही वे डटी हुई है। अभी तक वे जुगसलाई नगरपालिका, जिला सर्विलांस विभाग सहित अन्य जगहों पर सेवा दे चुकी हैं। संगीता की भी चार साल की एक बच्ची है। ऐसे में उनको

भी विशेष ख्याल रखना होता है। संगीता कहती है कि वे घर जाती है तो सबसे पहले गर्म पानी से स्नान करती है। इसके कुछ देर बाद ही बेटी के पास जाती हूं। संगीता रोजाना तुलसी पत्ता खाती है और अपनी बेटी को भी खिलाती है। ताकि शरीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहे और कोरोना से बच सकें। संगीता अभी तक एक बार भी संक्रमित नहीं हुई है।

अपनी बच्ची के साथ संगीता कुमारी रविदास 

बेटा करते रहता है इंतजार

परसुडीह स्थित सदर अस्पताल के कोविड वार्ड में तैनात नविता कुमारी के छह साल का लड़का है। वह कहती है कि उनका बेटा इंतजार करते रहता है कि मां कब आएगी। कोविड वार्ड में ड्यूटी करने के बाद नविता एक सप्ताह क्वारंटाइन सेंटर में रहती है। उसके बाद ही घर जाती है। ताकि उनका परिवार संक्रमित होने से बच सकें। इस दौरान बेटा सहित पूरा परिवार परेशान रहता है। बार-बार फोन आता है। एक सप्ताह के बाद नविता कोरोना जांच कराती है उसके बाद ही घर वापस लौटती है। उसके बाद फिर से

उन्हें कोविड वार्ड में ड्यूटी संभालनी होती है। जिले में जब से कोरोना की शुरुआत हुई है तब से नविता मोर्चा संभाली हुई है। अभी तक वे जिला सर्विलांस विभाग, रेड क्रास भवन के बाद अब सदर अस्पताल में सेवा दे रही है।

अपने बेटे से वीडियो चैट करती संगीता 

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