Jamshedpur, Jharkhand News: कोरोना की मार से चौतरफा त्राहिमाम, उद्योग बेहाल; मजदूरों का बुरा हाल

कच्चे माल की कमी के कारण पहले ही टाटा मोटर्स ने अपना उत्पादन घटा दिया है।

Jamshedpur Jharkhand News कोविड 19 की दूसरी लहर का असर औद्योगिक नगरी जमशेदपुर पर भी दिखना शुरू हो गया है। वैश्विक महामारी के कारण टाटा मोटर्स टाटा कमिंस स्टील स्ट्रीप्स व्हील्स सहित अन्य कंपनियों पर मांग में कमी का असर कामगारों पर पड रहा है।

Rakesh RanjanSat, 08 May 2021 08:28 PM (IST)

जमशेदपुर, निर्मल/अरविंद श्रीवास्तव। कोविड 19 की दूसरी लहर का असर औद्योगिक नगरी जमशेदपुर पर भी दिखना शुरू हो गया है। कच्चे माल की कमी के कारण पहले ही टाटा मोटर्स ने अपना उत्पादन घटा दिया है। वैश्विक महामारी के कारण टाटा मोटर्स, टाटा कमिंस, स्टील स्ट्रीप्स व्हील्स सहित अन्य कंपनियों पर मांग में कमी का असर दिखना शुरू हो गया है।

कहीं संक्रमित होने के कारण कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं, तो कहीं पॉजिटिव पाए जाने के बाद रोटेशन पर कर्मचारियों को बुलाया जा रहा है। टाटा मोटर्स ने पहले ही ठेका मजदूरों में कमी कर दी थी। अब अस्थायी कर्मियों पर भी शामत आ गई है। आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया की अधिकतर कंपनियां टाटा मोटर्स पर निर्भर है। ऐसे में वहां उत्पादन गिरने का सीधा असर औद्योगिक इकाइयों पर पड़ रहा है। कंपनियों का उत्पादन 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। ऐसे में कंपनी मालिक भी मौजूदा स्थिति से उबारने के लिए केंद्र व राज्य सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।

इन कंपनियों पर पड़ा असर

टाटा मोटर्स

टाटा मोटर्स, जमशेदपुर प्लांट का अधिकतर माल पुणे, दिल्ली, मुंबई सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आता है लेकिन लॉकडाउन के कारण एक तो अधिकतर शहरों में बंदी है जिसके कारण वाहनों की डिमांड कम हो गया है। वहीं, अधिकतर शहरों से रॉ मटेरियल नहीं आने का भी असर कंपनियों के उत्पादन पर पड़ रहा है। कंपनी का अप्रैल माह में 11 हजार यूनिट वाणिज्यिक वाहन बनाने का लक्ष्य था लेकिन कंपनी ने 8000 वाहनों का ही निर्माण कर पाई। इसके अलावा कंपनी ने अप्रैल के अंतिम माह में 28 व 30 को ब्लॉक क्लोजर रहा। जबकि पहली मई को मजदूर दिवस, दो मई को रविवार का साप्ताहिक अवकाश जबकि तीन मई को टाटा मोटर्स समूह में एक दिन के स्पेशल लीव सभी कर्मचारियों को दिया गया था। जबकि कंपनी ने चार व पांच मई को ब्लॉक क्लोजर लिया था। कंपनी में 5000 स्थायी और 3400 बाइ-सिक्स के रूप में अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं लेकिन उत्पादन कम होने के कारण 50 प्रतिशत बाइ-सिक्स कर्मचारियों को रोटेशन पॉलिसी के तहत ही काम पर बुलाया जा जा रहा है।

टाटा कमिंस

भारी वाहनों के लिए इंजन बनाने वाली टाटा कमिंस ने अप्रैल माह में 8500 इंजन का निर्माण किया था। जबकि मई माह में कंपनी का उत्पादन लक्ष्य 11 हजार था लेकिन टाटा मोटर्स में प्रोडक्शन डाउन होने का असर सीधे इस कंपनी के उत्पादन पर पड़ रहा है। इसके अलावा कंपनी को दूसरे राज्यों से आने वाला कच्चा माल की भी कमी हो गई है। कंपनी में 850 स्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं लेकिन इनमें से अब तक 100 से अधिक कर्मचारी कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इसके कारण भी कंपनी का मैनपावर कम हो गया है। उत्पादन घटने से कंपनी ने अपनी नाइट शिफ्ट बंद कर दी है।

स्टील स्ट्रीप व्हील्स 

कमिंस की तरह गोविंदपुर स्थित स्टील स्ट्रीप व्हील्स भी टाटा मोटर्स पर पूरी तरह से निर्भर है। कंपनी भारी वाहनों के लिए रिंग बनाती है। लेकिन टाटा मोटर्स में उत्पादन घटने का सीधा असर स्टील स्ट्रीप व्हील्स पर पड़ा है। अप्रैल माह में कंपनी ने 25 हजार व्हील्स का निर्माण किया था लेकिन मई माह में उत्पादन डाउन होने और कच्चे माल की कमी को देखते हुए कंपनी का उत्पादन 10 हजार तक सीमित हो गया है। ऐसे में टाटा स्टील स्ट्रीप व्हील्स ने 500 ठेका कर्मचारियों को काम से बैठा दिया है। वहीं, कंपनी को बाहर से भी आने वाले डिमांड में कमी आई है।

टाटा स्टील

प्रोडक्शन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए टाटा स्टील में वर्ष 2020 में जब कोविड 19 का पहला वेब आया था। तब से ही कंपनी ने अपने कर्मचारियों को सामूहिक रूप से संक्रमित होने से बचाने के लिए पॉड सिस्टम को प्रभावी किया। इसके लिए हर विभाग के कर्मचारियों को चार भागों में बांटा गया। तीन समूह तीन शिफ्ट में ड्यूटी पर आते थे जबकि चौथा समूह को कंपनी ने आरक्षित रखा था। यदि किसी का कोई कर्मचारी या उनके परिवार का कोई सदस्य कोविड 19 से संक्रमित होता है तो उस पूरे समूह को ही क्वारंटाइन किया जाता था और उसी जगह पर आरक्षित समूह के कर्मचारी ड्यूटी ज्वाइंन करते हैं। तब तक के लिए क्वारंटाइन रहने वाला समूह स्टैंड बाइ मोड में रहेगा। यही प्रक्रिया कंपनी में जारी रहती है। टाटा स्टील में 13 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं और सेकेंड वेब का अब तक कंपनी पर कोई असर नहीं पड़ा है। कंपनी ने मार्च माह में 4.75 मिलियन टन स्टील का उत्पादन किया था।

तार कंपनी में उत्पादन पर असर नहीं, जेम्को मेंं कम हुआ प्रोडक्शन

आइएसडब्लयूपी

इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट के उत्पादन पर कोई खास असर नहीं है। कारण कि तार कंपनी टाटा स्टील से मिले लोहे का ही तार, सरिया, किल सहित अन्य उत्पादों का निर्माण करती है। साथ ही कंपनी को टाटा स्टील से पूर्व की तरह आर्डर मिल रहा है। वहीं कोरोना को लेकर जो कर्मी पॉजिटिव हुए हैं उनके स्थान पर ठेका मजदूर से काम कराया जा रहा है।

जेम्को

जमशेदपुर इंजीनियरिंग एंड मशीन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (जेमको) रॉल बनाया जाता है। इसके अलावे यहां कास्टिंग और कंस्ट्रक्शन बाइंडिंग वायर निर्माण का काम भी होता है। यहां भी टाटा स्टील के अलावा अन्य जगहों से भी ऑर्डर मिला है। ऐसे में कोरोना काल में यहां मजदूरों की कमी तो है लेकिन कंपनी में उत्पादन पूर्व की तरह हो रहा है।

टिनप्लेट इंडिया लिमिटेड 

 

टिनप्लेट कंपनी में भी उत्पादन पूर्व की तरह हो रहा है। कोरोना को लेकर कंपनी में मजदूरों की संख्या में कमी आई है लेकिन उत्पादन में किसी तरह का असर नहीं है। कंपनी मेंं फूड प्रोसेसिंग उत्पाद के लिए कोटेड पैकेजिंग उत्पादों का निर्माण करती है। कोविड के कारण अधिकतर कंपनियां और रेस्टोरेंट पैकेज्ड फूड की सबसे ज्यादा होम डिलीवरी कर रही है इसके कारण कंपनी के उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। ऐसे में यहां भी कंपनी के उत्पादन में किसी तरह प्रभाव नहीं पड़ा है।

1170 कंपनियां, अधिकतर टाटा मोटर्स पर निर्भर

आदित्यपुर इंडस्ट्रीयल एरिया में 1170 कंपनियां संचालित हैं। इनमें से अधिकतर कंपनियां टाटा मोटर्स पर निर्भर है। मंदी के कारण टाटा मोटर्स में उत्पादन कम हुआ तो इसका सीधा असर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में पड रहा है। जिन कंपनियों के पास आर्डर था उन्होंने अप्रैल माह में उसे पूरा कर दिया। लेकिन मई माह में अधिकतर कंपनी मालिक अब संकट में है। इनके पास न तो पर्याप्त मात्रा में आर्डर है और न ही मैनपावर। जिन कंपनियों के पास आर्डर हैं भी वे अधिकतर अपने कर्मचारियों के क्वारंटाइन होने के बाद बाहर से मैनपावर लेकर आर्डर पूरा कर रहे हैं।

तीन सालों में पांच संकटों से गुजरी आदित्यपुर औद्योगिक इकाई

बीते तीन वर्षों में आदित्यपुर औद्योगिक इकाई एक-दो नहीं बल्कि पांच-पांच संकटों का सामना किया। पहले गुड्स एंड सर्विस टैक्स के नए प्रावधानों और इसे समझने के लिए कंपनी मालिकों की जद्दोजहद ने परेशान किया। इसके बाद आई नोटबंदी के कारण बाजार में उथल-पुथल रहा। वहीं, वर्ष 2019 के मध्य में बीएस-6 के कारण बाजार में आई मंदी से लगभग माह माह तक बाजार में इसका असर छाया रहा। इसके बाद मार्च 2020 में कोरोना का पहला वेब आया जिसके कारण सभी को पूर्ण लॉकडाउन झेलना पड़ा। वहीं, फरवरी 2021 में दूसरा वेब आया जिससे महामारी के कारण स्लो डाउन हो गया।

क्या कहते हैं उद्योगपति

कंपनियों को चलाने के लिए व्यवस्था की ऑक्सीजन की जरूरत

महामारी के कारण हुई बंदी से औद्योगिक क्षेत्र में 70 प्रतिशत तक उत्पादन डाउन हो गया है। लेकिन कंपनियों की देनदारी पूर्व की तरह है इसलिए कंपनी को चलाने के लिए व्यवस्था की ऑक्सीजन की जरूरत है। केंद्र व राज्य सरकार को चाहिए कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ को बचाने के लिए गहन चिंतन करें।

-रुपेश कटियार, उद्यमी सह प्रदेश उपाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती

औद्योगिक क्षेत्र की अधिकतर कंपनियां फेब्रिकेशन का काम करती है लेकिन ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण काम बंद है। कंपनी चलाने के लिए सभी ने भारी निवेश किया लेकिन आर्डर नहीं मिलने से हमारा वर्किंग कैपिटल प्रभावित हो रहा है। बिजली की फिक्सड दर, कर्मचारियों का वेतन, बैंक की ईएमआई, बाजार से लिए गए ब्याज का कर्ज हम पर है। जिन्हें माल की डिलीवरी की उनसे लॉकडाउन का अंदेशा देखते हुए पेमेंट नहीं मिला और जिनसे कच्चा माल लेना है वे एडवांस मांग रहे हैं।

-राजीव शुक्ला, सचिव, लघु उद्योग भारती (जीएसटी, इनकम टैक्स व बिजली विभाग)

महामारी के कारण उत्पादन में स्लो डाउन आया है। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र की अधिकतर कंपनियों का उत्पादन 25 से 30 प्रतिशत पर सिमट गया है। संक्रमण के कारण वर्कफोर्स भी प्रभावित हुआ है। पिछली बार की तरह इस बार सरकार कंपनियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए नहीं तो कंपनी चलाना मुश्किल हो जाएगा।

-समीर सिंह, उद्यमी सह महासचिव, लघु उद्योग भारती

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