कोल्हान का सबसे प्रदूषित क्षेत्र है जमशेदपुर का गोलमुरी, ये हैं प्रदूषण के कारण

 जमशेदपुर[निर्मल प्रसाद]।  कोल्हान प्रमंडल में गोलमुरी इलाका सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित क्षेत्र है। झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के आदित्यपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से कराए जाने वाले वायु की गुणवत्ता जांच में यह बात सामने आई है। यह स्थिति तब है, जब गोलमुरी आवासीय इलाका है। यहां साकची, बिष्टुपुर व आदित्यपुर की तरह औद्योगिक इकाइयां नहीं हैं। 

दैनिक जागरण को सूचना के अधिकार के तहत दी गई जानकारी में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने कह है कि कोल्हान प्रमंडल में बिष्टुपुर, गोलमुरी और आदित्यपुर सहित बड़ाजामदा में परिवेशीय वायु की गुणवत्ता की हर दिन जांच की जाती है। जनवरी 2019 में गुणात्मक जांच की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि गोलमुरी के आसपास के क्षेत्र में वायुमंडल में मौजूद रिसपेरेबल सस्पेंडेट पार्टिकुलेट मैटर (आरएसपीएम)की संख्या मानक से लगभग दोगुनी है। किसी भी क्षेत्र आरएसपीएम का मानक 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक होता है, लेकिन गोलमुरी में 184.31 पीएम है। दूसरे स्थान पर आदित्यपुर (181.96) व तीसरे स्थान पर बिष्टुपुर (148.78 पीएम) है। गोलमुरी में सबसे ज्यादा आरएसपीएम होने की वजह यहां से भारी वाहन का गुजरना बताया जाता है। हालांकि गोलमुरी के लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड 80 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक से कम है। यदि धूलकण की बात करे तो सभी चारों क्षेत्र अपने मानक से सबसे ज्यादा है। 

वाहनों का दबाव सबसे ज्यादा 

प्रदूषण पर्षद के साइंटिफिक ऑफिसर सत्यप्रकाश का कहना है कि कोल्हान में लगभग 1000 से ज्यादा छोटी-बड़ी फैक्ट्रियां हैं, लेकिन कंपनियों से निकलने वाले धूल-कण को फिल्टर्स बैग, वेट स्क्रबर स्थापित करने व जल छिड़काव द्वारा नियंत्रित करने का निर्देश दिया जाता है। सभी कंपनियों की चिमनियों से निकलने वाले धूल-कण की ऑनलाइन मॉनिटङ्क्षरग भी होती है, लेकिन सभी कंपनियां यदि 100-100 आरएसपीएस से कम भी उत्सर्जन करें तो एक हजार कंपनियों से कितना उत्सर्जन होगा? इसकी गणना आसान नहीं है। वहीं, यहां चलने वाले ट्रक, ट्रेलर, हाइवा सहित छोटे वाहनों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी वायुमंडल में धूल-कण फैलने का सबसे बड़ा कारण है। 

श्वांस का हो सकता है रोग

 विशेषज्ञों की माने तो जमशेदपुर के वायुमंडल में 100 आरएसपीएस से ज्यादा धूल-कण मौजूद हैं। इन धूल-कणों को हर शहरवासी श्वास के रूप में अपने शरीर में लेता है, लेकिन हमारे फेफड़े इन धूल-कणों को सोख लेते हैं जो बाद में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आ सकते हैं। इससे श्वांस संबंधी बीमारी होने की पूरी संभावना है।  प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के क्षेत्रीय पदाधिकारी सुरेश प्रसाद बताते हैं कि कोल्हान में आरएसपीएम की मात्रा बढ़ रही है इसके लिए केवल औद्योगिक इकाइयों को दोषी ठहराना ठीक नहीं। शहर में बढ़ते वाहनों की संख्या और निर्माण क्षेत्र में हो रहे काम भी इसका मुख्य कारण हो सकता है। 

 क्षेत्र        एसओ 2    एनओएक्स  आरएसपीएम  

ये भी जानें

एसओ 2 : सल्फर डाइ ऑक्साइड

एनओएक्स : नाइट्रोजन ऑक्साइड

आरएसपीएम : रिसपेरेबल सस्पेंडेट पाटिकुलेट मैटर 

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