Gallbladder stone Treatment: पित्ताशय की पथरी को न लें हल्के में, घरेलू उपचार से भी कर सकते हैं दूर; जानिए कैसे

Gallbladder stone Treatment जब पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या सख्त होने लगता है तब पथरी की शिकायत होती है। प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा मनीष डूडिया बता रहे हैं कुछ घरेलू इलाज जिसका उपयोग कर आप पथरी की बीमारी से निजात पा सकते हैं।

Rakesh RanjanSun, 12 Sep 2021 02:28 PM (IST)
पित्त की पथरी से बचने के लिए यह खाना चाहिए।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पित्ताशय या गॉलब्लाडर की पथरी छोटे-छोटे पत्थर होते हैं जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे रहती है जो बहुत दर्दनाक हो सकती है। यदि इसका सही समय पर इलाज नहीं किया गया तो इसे निकालने के लिए बड़े ऑपरेशन की जरूरत हो सकती है। जब पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या सख्त होने लगता है तब पथरी की शिकायत होती है। प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा मनीष डूडिया बता रहे हैं कुछ घरेलू इलाज, जिसका उपयोग कर आप पथरी की बीमारी से निजात पा सकते हैं। हालांकि डॉक्टर डूडिया कहते हैं कि इसके लिए अपने चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

पित्ताशय में पथरी होने के लक्षण

पित्ताशय की थैली में पथरी होने के कुछ प्रमुख लक्षण हैं, बदहजमी, खट्टी डकार, पेट फूलना, एसिडीटी, पेट में भारीपन, उल्टी होना, पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

इन खाद्य पदार्थों का सेवन से बचें

- पित्त की पथरी में सबसे पहले तो मांसाहारी से परहेज करें। जिसमें मीट, लाल मांस, चिकन के अलावा तैलीय मछली भी न खाएं।

- पैकेज्ड फूड में ट्रांस फैटी एसिड होता है जो पित्त की पथरी के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। चिप्स, कुकीज, डोंट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाो खाद्य पदार्थ से बचें।

- पित्त की पथरी होने पर व्हाईट ब्रेड, परिस्कृत आटा पास्ता, सफेद चावल और चीनी सभी चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पित्त में कोस्ट्राल को बढ़ाती है।

- पित्त की पथरी में डेयरी उत्पादों का सेवन मत कीजिए। दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, भारी क्रीम और खट्टा क्रीम से परहेज करें। वनस्पति तेल, मूंगफली का तेल, खट्टे फल, कॉफी, टमाटर सॉस आदि खाना बंद कर दें।

पित्त की पथरी से बचने के लिए यह खाना चाहिए

- फल और सब्जियों की अधिक मात्रा

- थोड़ी मात्रा में कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट लें। संभव हो तो साबुत अनाजों से बनी वस्तुएं लें।

- रेशे की अधिकता से युक्त आहार ग्रहण करें। फलियां, दाल, फल, सब्जियां आदि अधिक ले।

- तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लें। जैसे कि पानी, औषधीय चाय प्रतिदिन कम से कम दो लीटर सेवन करें।

- नियमित योग और व्यायाम करना चाहिए।

पित्ताशय की पथरी का घरेलू इलाज

- एक गिलास सेव के रस में साइडर सिरका का एक चम्मच मिलाकर नियमित सेवन करना चाहिए। पथरी के दर्द को कम करता है

- नाशपाती में पेक्टिन नामक यौगिक होता है जो कोलस्ट्राेल से बनी पथरी को नरम बनाता है ताकि शरीर से आसानी से बाहर निकल सके। नाशपाती का सेवन करने से पथरी के रोगियों के लिए आरामदायक होता है।

- चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद होता है।

- पुदीना पित्ताशय की पथरी को निकालने में फायदेमंद होता है। इसमे टेरपिन नामक यौगिक पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को तोड़ता है, पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना सकते हैं।

- इसबगोल पित्ताशय की पथरी को निकालने में फायदेमंद होता है। यह एक उच्च स्तरीय फाइबर आहार है। पित्ताशय की थैली की पथरी के लिए इसबगोल पित्त में कोलस्ट्रोल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। रात में सोते समय एक गिलास पानी के साथ नियमित लें, फायदा होगा।

- नींबू पित्ताशय की पथरी को निकालने में फायदेमंद होता है। नींबू का रस प्राकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह काम करता है और लीवर में कोलस्ट्रोल को बनने से रोकता है। हर राेज खाली पेट में चार नींबू का रस एक सप्ताह तक लें पथरी की समस्या आसानी से दूर हो सकती है।

- लाल शिमला मिर्च पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद होता है। शरीर में भरपूर विटामिन सी पथरी की समस्या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में 95 मिलीग्राम विटामिन सी होता है। यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होता है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च का उपयोग करें।

- हल्दी पित्ताशय की पथरी को निकालने में फायदेमंद होता है। हल्दी एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री होने के कारण पित्त के यौगिकों और पथरी को आसानी से तोड़ने में मदद करती है। माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती है।

- विटामिन सी शरीर के कोलस्ट्रोल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को तोड़ता है। विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जैसे संतरा, टमाटर आदि का भरपूर सेवन करें।

 प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डा मनीष डूडिया।

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