तीन मार्च 1932 को पहली बार आयोजित हुआ था संस्थापक दिवस

तीन मार्च 1932 को पहली बार आयोजित हुआ था संस्थापक दिवस

जमशेद जी नसरवान जी टाटा ने टाटा समूह की नींव रखी। उन्होंने देश में औद्योगिकरण की शुरुआत की। उस संस्थापक की स्मृति में टाटा स्टील प्रत्येक वर्ष तीन मार्च को संस्थापक दिवस का आयोजन करती है। इस अवसर पर जुबली पार्क सहित शहर के विभिन्न पार्कों और चौक-चौराहों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। जमशेदपुर शहर में अब भी यह परंपरा बरकरार है।

JagranTue, 02 Mar 2021 09:30 AM (IST)

जासं, जमशेदपुर : जमशेद जी नसरवान जी टाटा ने टाटा समूह की नींव रखी। उन्होंने देश में औद्योगिकरण की शुरुआत की। उस संस्थापक की स्मृति में टाटा स्टील प्रत्येक वर्ष तीन मार्च को संस्थापक दिवस का आयोजन करती है। इस अवसर पर जुबली पार्क सहित शहर के विभिन्न पार्कों और चौक-चौराहों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। जमशेदपुर शहर में अब भी यह परंपरा बरकरार है। स्थापना इसी जमशेदपुर शहर से हुई थी इसलिए इस आयोजन में टाटा समूह के चेयरमैन, बोर्ड ऑफ मेंबर्स के सदस्य सहित देश-विदेश के अधिकारी इस आयोजन में आते हैं। इस वर्ष भी संस्थापक दिवस को लेकर तैयारियां की गई है। इस आयोजन में शामिल होने के लिए टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखन शहर आ रहे हैं। जाने संस्थापक दिवस का इतिहास, रिपोर्ट निर्मल प्रसाद की ..।

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वर्ष 1932 में पहली बार हुआ था आयोजन

(फोटो : 1 जेएमएल 69)

टाटा ने वर्ष 1932 में अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे किए थे। जमशेदपुर में पहली बार तीन मार्च 1932 में पहली बार संस्थापक दिवस का आयोजन किया गया था। उस समय कंपनी के चीफ एकाउंटेंट रहे डीएम मदन ने संस्थापक दिवस की अवधारणा की थी। पहली बार हुए इस आयोजन में कंपनी के सभी कर्मचारी शामिल हुए। इसमें सभी कर्मचारियों को पहली बार अपने संस्थापक के प्रति आभार व्यक्त करने का भी अवसर मिला। इसके लिए कर्मचारियों खुद से पहली बार झांकियां निकालकर अपने उत्साह का प्रदर्शन किया।

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50वें वर्ष में स्कूल-कॉलेजों में शुरू हुआ आयोजन

फोटो : 1 जेएमएल 70

वर्ष 1958 में टाटा स्टील ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए तो आयोजन का उत्साह भी दोगुना हो गया। एक तो कंपनी ने 50 वर्ष पूरे किए और दूसरा संस्थापक की जयंती। इस आयोजन को यादगार बनाने की ही पहली बार कंपनी द्वारा संचालित स्कूल-कॉलेजों में संस्थापक दिवस का आयोजन शुरू हुआ। कंपनी की ओर से सभी स्कूली बच्चों के बीच मिठाई का वितरण होने लगा। इस वर्ष टीएमएच की नर्सो ने शहर में और कंपनी के अंदर भी परेड और रंग-बिरंगी झांकियां निकाली गई। शाम में बेल्डीह क्लब में लांग सर्विस अवार्ड का आयोजन हुआ जिसमें बिहार के तत्कालीन राज्यपाल डा. जाकिर हुसैन आए थे। इस वर्ष से पहली बार जेआरडी टाटा स्पोटर्स कॉम्प्लेक्स में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। इसी वर्ष से कंपनी के चेन्नई, कोलकाता सहित विभिन्न ऑफिसों में भी संस्थापक को श्रद्धांजलि देने की परंपरा व आयोजन होना शुरू हुआ।

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75वें वर्ष में लगी जमशेदजी टाटा की तीन टन की प्रतिमा

फोटो : 1 जेएमएल 72

टाटा स्टील के 75वें वर्ष में आयोजित संस्थापक दिवस का मुख्य आकर्षण केंद्र रहा संस्थापक जमशेदजी नसरवान जी टाटा की आदमकद प्रतिमा। कुर्सी पर बैठे उनकी आठ फीट ऊंची और तीन टन वजनी प्रतिमा को टाटा स्टील कंपनी परिसर स्थित व‌र्क्स मेन गेट पर स्थापित किया गया। कास्यं की इस प्रतिमा को मुंबई के प्रसिद्ध मूर्तिकार एनएल सोनवडेकर ने तैयार किया था। इस अवसर पर कंपनी के सभी डिविजनों से मार्च पास्ट हुआ। इस मौके पर फ्लाइंग क्लब के विमान से मार्च पास्ट करने वालों पर फूलों की वर्षा की गई। वहीं, वेस्ट बोकारो से प्लेटिनम जुबिली के अवसर पर 75 ट्रकों से कोयला वेस्ट बोकारो से जमशेदपुर भेजा गया था।

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75वें वर्ष के आयोजन में आई थी इंदिरा गांधी

फोटो : 1 जेएमएल 73

टाटा स्टील के 75वें वर्ष के पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में देश के पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी शहर आई थी। इस दौरान टाटा स्टील कंपनी परिसर स्थित स्टीलेनियम सभागार में प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इस मौके पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी साथ आए थे। इस दौरान दोनो नेताओं की अगवानी समूह के पूर्व चेयरमैन जेआरडी टाटा ने किया था।

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शताब्दी वर्ष में आए थे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

फोटो : 1 जेएमएल 76

टाटा स्टील के संस्थापक दिवस पर वर्ष 2007 में स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया गया था। इसी वर्ष टाटा स्टील ने इसी वर्ष कोरस का अधिग्रहण किया था। इस मौके पर टाटा स्टील द्वारा संस्थापक दिवस पर कौन-कौन से प्लांट कब शुरू हुए, किस तरह से उनका विकास हुआ। इसे विभिन्न मॉडल व झांकियों के माध्यम से दर्शाया गया था। इस मौके पर एयर शो का आयोजन किया गया था। कोरस के चेयरमैन जिम लेंग और सीईओ फिलिप वरिन इस उत्सव के गवाह बने थे। इसके अलावे पूर्व केंद्रीय कोयला मंत्री सुबोधकांत सहाय, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोडा, पूर्व राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. रामविलास पासवान, ज्योति राजे सिधिया जैसे वरीय नेता भी आयोजन में शामिल हुए थे।

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