Jharkhand: श्मशान की लकड़ी पर भी बेईमानी, पढें चिकित्सा जगत की अंदरूनी खबर

श्मशान की लकड़ियों पर भी लोग बेईमानी कर रहे हैं।

Jamshedpur Health Line. हम ईमानदार है...हम ईमानदार है...। जोर-जोर से चिल्लाते हैं। सरकार चोर है नेता चोर है अधिकारी चोर सब चोर है। ऐसा ईमानदार लोग कहते हैं। लेकिन अभी उन सारे लोगों को चोर कहने से पहले खुद की ईमानदारी को भी देख लो।

Rakesh RanjanSat, 08 May 2021 08:26 AM (IST)

जमशेदपुर, अमित तिवारी। हम ईमानदार है...हम ईमानदार है...। जोर-जोर से चिल्लाते हैं। सरकार चोर है, नेता चोर है, अधिकारी चोर, सब चोर है। ऐसा ईमानदार लोग कहते हैं। लेकिन, अभी उन सारे लोगों को चोर कहने से पहले खुद की ईमानदारी को भी देख लो।

कोरोना आई तो दवाइयों की कालाबाजारी शुरू हो गई। हजार रुपये की रेमडेसिवीर इंजेक्शन लाखों रुपये में बिक रही है। हजार रुपये का ऑक्सीमीटर तीन से चार हजार और दो किलोमीटर एंबुलेंस का किराया पांच से छह हजार रुपये हो गया है। किसी की बीमारी का हम इतना फायदा उठाते हैं। इंसान, इंसान का काट रहा है। मानो सरकारों की तैयारी नहीं थी लेकिन हम क्या कर रहे हैं। श्मशान की लकड़ियों पर भी बेईमानी कर रहे हैं। शव जलाने का रेट बढ़ा दिया गया है। हमें जहां मौका मिलता है वहीं दूसरे को लूटना शुरू कर देते हैं। इंसानियत, इंसानियत सब भूलते जा रहे हैं।

नियत में खोट या अनुभव की कमी

जिला स्वास्थ्य विभाग में बंपर बहाली निकली है लेकिन वह सभी पदें अस्थायी हैं। जब तक कोरोना से लड़ाई जारी रहेगी तब तक उनकी सेवा ली जाएगी। उसके बाद जय श्री राम। कोई पूछने वाला नहीं होगा। इसे लेकर चिकित्सा जगत में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कोई नियत में खोट बता रहा है तो कोई अनुभव की कमी कह रहा है। सच्चाई क्या है वह तो नहीं पता लेकिन अब देखना है कि 11 मई को आयोजित साक्षात्कार में कितने लोग पहुंचते हैं। बहाली 434 पदों पर निकाली गई है लेकिन उसमें भाग कितने लोग लेते हैं यह बड़ा सवाल है। इसमें एनीस्थीसिया डॉक्टर से लेकर मेडिकल ऑफिसर, नर्स, टेक्नीशियन, स्ट्रेचर वाहक सहित अन्य पद शामिल हैं। हालांकि, कोरोना से जंग जीतने के लिए अभी सभी को बढ़चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। सबका योगदान जरूरी है। तभी हम कोरोना को काबू में कर पाएंगे और लोगों की जान बचा सकेंगे।

गायब हो गई मौसमी बीमारी

हर साल जब-जब मौसम बदलता था तो मौसमी बीमारी आती थी लेकिन इस बार वे सब गायब हो गई। पहले सर्दी-खांसी व बुखार होता था तो डॉक्टर कहते थे कि मौसमी बीमारी है। दो से तीन दिन में ठीक हो जाएगा। लेकिन, अब सर्दी-खांसी व बुखार का नाम सुनते ही डॉक्टर कहते हैं कि कोरोना की जांच करा लीजिए। अब इसे खौफ कहें या फिर चिकित्सकों का अनुभव, यह तो नहीं पता लेकिन स्थिति फिलहाल यही हैं। लोग खांसने से भी डरने लगे हैं। बुखार का नाम तो कोई लेना भी नहीं चाहता। हालांकि, चिकित्सकों का कहना है कि कोरोना वायरस की सही समय पर पहचान करना जरूरी है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति इसके लक्षण को छुपाएं नहीं बल्कि जांच कराएं। ताकि सही समय पर उसका इलाज शुरू हो सकें।कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हो रही है। इसे लेकर सतर्क होने की जरूरत है।

कर्मचारी बन गया अधिकारी

कोरोना काल में कर्मचारियों की मेहनत पर सवाल तो नहीं उठाया जा सकता है लेकिन ज्यादा मनमानी भी ठीक नहीं है। कोरोना का कंट्रोल जिला सर्विलांस विभाग से होता है। ऐसे में यहां चुस्त-दुरुस्त कर्मचारियों की अधिक जरूरत है। ताकि हर मोर्चा पर लाठी भांज सके। लेकिन, यहां एक कर्मचारी ऐसा भी है जो अधिकांश समय अपने ड्यूटी स्थल पर नहीं जाता। वे अधिकारी की तरह कार्यालय में बैठे रहते या फिर कहीं दूसरी जगह चले जाते हैं। यह कर्मचारी सपोर्ट स्टाफ के पद पर कार्यरत हैं। इनकी शिकायत विभाग के वरीय पदाधिकारियों के पास भी पहुंची है। वहीं के कुछ कर्मचारियों ने इनके खिलाफ विरोध भी दर्ज कराया है। हालांकि, अभी जिला सर्विलांस पदाधिकारी डॉ. साहिर पाल की तबीयत ठीक नहीं है। वे छुट्टी में है। ऐसे में सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारी अधिक बढ़ गई है। कर्मचारी मेहनत भी कर रहे हैं। सुबह आते तो रात के 12 बजे वापस घर लौटते हैं।

 

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