जीत गई मां की ममताः पांच साल की पहली बच्ची जिसे रेमडेसिवीर देकर बचाई गई जान, यहां 1414 बच्चे हो चुके हैं कोरोना संक्रमित

कोरोना पीडित बच्ची के साथ मर्सी अस्पताल के डाक्टरों की टीम।

Jamshedpur Jharkhand News. पांच साल की पहली बच्ची जिसे रेमडेसिवीर इंजेक्शन देकर जान बचाई गई। यह चिकित्सकों के लिए बड़ी उपलब्धि है तो मां के लिए भी दोहरी खुशी है। मां खुशी से फूली नहीं समा रही वही इलाज करनेवाली टीम भी काफी खुश है।

Rakesh RanjanSun, 09 May 2021 10:55 AM (IST)

जमशेदपुर, अमित तिवारी। पांच साल की पहली बेटी, जिसे रेमडेसिवीर इंजेक्शन देकर बचाई गई जान। यह चिकित्सकों के लिए बड़ी उपलब्धि है तो मां के लिए भी दोहरी खुशी है। मां खुशी से फूली नहीं समा रही वही इलाज करनेवाली टीम भी काफी खुश है।

रांची के तमाड़ निवासी सुकेश होरो की पुत्री (5 वर्ष) अंशु कुमारी की तबीयत 28 अप्रैल को ज्यादा बिगड़ गई। माता-पिता आनन-फानन में नजदीक के एक डॉक्टर के पास लेकर पहुंचे तो उन्होंने बच्ची की स्थिति गंभीर बताते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद बच्ची को जमशेदपुर के मर्सी अस्पताल लाया गया। तब बच्ची की दम घुट रही थी। उसे सांस लेने में काफी परेशानी हो रही थी। ऑक्सीजन लेबल घटकर 65 से नीचे आ गया था। तेज बुखार से तप रही थी। इसके बाद बच्ची को भर्ती लेकर उसका इलाज शुरू किया गया। यहां सबसे अच्छी बात यह देखी गई कि एक मां किस तरह से लगातार नौ दिन तक डटी रही और बेटी ही नहीं बल्कि पूरे चिकित्सकों का हौसला बढ़ाते रही। इससे चिकित्सकों का मनोबल बढ़ता रहा और बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए रेमडेसिवीर इंजेक्शन देने का निर्णय लिया गया। अब बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ हो चुकी है।

सिस्टर जस्सी ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

चिकित्सकों की टीम के नेतृत्वकर्ता डॉ. शुभोजित बनर्जी ने जब रेमडेसिवीर इंजेक्शन देने का निर्णय लिया तब अस्पताल में यह इंजेक्शन मौजूद नहीं था। इसकी सूचना अस्पताल की हेड सिस्टर जस्सी के पास पहुंची। उन्होंने तत्काल सक्रिय भूमिका निभाते हुए सिविल सर्जन डॉ. एके लाल से संपर्क किया और तब जाकर बच्ची को इंजेक्शन मिल सका। डॉ. शुभोजित बनर्जी ने बताया कि बच्ची की मां हमलोगों का हौसला बढ़ाती रही। उनकी ममता व भरोसा से ही हमलोगों ने इतना बड़ा निर्णय लिया और वह सफल भी हुआ। जमशेदपुर में पांच साल की यह पहली बच्ची है जिसे रेमडेसिवीर इंजेक्शन देकर उसकी जान बचाई गई है।

अभी तक 141४ बच्चे हो चुके हैं संक्रमित

पूर्वी सिंहभूम जिले में अभी तक कुल एक हजार 414 बच्चे संक्रमित हो चुके हैं। इसमें अंशु कुमार पहली बच्ची है जिसे रेमडेसिवीर देकर उसकी जान बचाई गई है। डॉ. शुभोजित बनर्जी ने बताया कि जोखिम जरूर था लेकिन बच्ची की मां का सहयोग इतना अधिक मिला की हमलोग हौसला दोगुना बढ़ गया और पूरी सुझबूझ के साथ बच्ची की जान बचा ली गई है। बच्ची कोरोना पॉजिटिव थी।

गठित की गई थी नौ सदस्यीय टीम

बच्ची 24 घंटे निगरानी में रही। इसके लिए नौ सदस्यीय टीम गठित की गई थी। इसमें डॉ. शुभोजित बनर्जी (विभागाध्यक्ष, शिशु विभाग), डॉ. बाणी देव, डॉ. प्रभा, डॉ. रतन, डॉ. अमित, डॉ. राजू, सिस्टर जयश्री, सिस्टर सुषमा व बदलदीना शामिल हैं।

 

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