पहले अक्षर, फिर गणित, अब तस्वीर, आखिर क्यों होता जा रहा है CAPTCHA इतना मुश्किल

इंटरनेट की दुनिया में तकनीक लाख विकसित हो गई हो लेकिन साइबर क्रिमिनल हर सुरक्षा में सेंध लगा ही देते हैं। ऐसी ही एक सुरक्षा चक्र CAPTCHA है जिसे कंपनियों को बार-बार बदलना पड़ता है। पहले गणित और अब तस्वीर। जानिए CAPTCHA का इतिहास।

Jitendra SinghFri, 23 Jul 2021 06:00 AM (IST)
पहले अक्षर, फिर गणित, अब तस्वीर, आखिर क्यों होता जा रहा है CAPTCHA इतना मुश्किल

जमशेदपुर : वर्तमान समय में कई ऐसी वेबसाइट या ऐप हैं, जो ई मेल आईडी व पासवर्ड देने के बाद भी लॉग इन नहीं हो पाता। तब आप नीचे देखते हैं कि CAPTCHA भी देना है। जबतक आप सही CAPTCHA नहीं भरेंगे, संबंधित वेबसाइट नहीं खुलेगा। जैसे ही आप अपनी स्क्रीन पर लिखा ये CAPTCHA उस खाली बॉक्स में भरते हैं, आसानी से साइट या एप में एंट्री मिल जाती है। यह एक तरह का वेरिफिकेशन प्रोसेस होता है। इसे ज्यादातर कंपनियां सिक्योरिटी के लिए इस्तेमाल करती है। ज्यादातर बड़ी वेबसाइट या फोन एप कैप्चा के बिना काम ही नहीं करता।

आसान से मुश्किल होते चले गया कैप्चा

पहले कैप्चा काफी आसान हुआ करता था। लेकिन साइबर क्राइम की बढ़ती घटनाओं के बाद कंपनियों ने कैप्चा को मुश्किल कर दिया, ताकि उनकी साइट सुरक्षित रहे। पहले आसानी से वेरिफिकेशन प्रोसेस से पाला पड़ रहा था। पहले कैप्चा का अक्षर आसान हुआ करता था। लेकिन अब बहुत मुश्किल होता जा रहा है। छोटे-बड़े अक्षर, टेढा-मेढा अक्षर, अंकReCaptcha Version3 आदि। अब तो गणित भी आ गई है और ग्राफिक्स भी।

CAPTCHA एक ऐसा टेस्ट है जो सिस्टम खुद जनरेट कर सकता है

कैप्चा एक ऐसा टेस्ट है जो सिस्टम खुद जेनरेट कर सकता है और कंप्यूटर और मनुष्य के बीच अंतर का पता चल जाता है। । कैप्चा का काम बस इतना है कि कुछ ऐसे सवाल दिए जाएं जो कंप्यूटर के लिए हल करना मुश्किल हो, लेकिन इंसान उसे आसानी से हल कर सके।

याहू ने बताई थी बॉट की परेशानी

कैप्चा को लुई वान यान ने ईजाद किया था। जब वह कार्नी मेलॉन यूनिवर्सिटी से पीएचडी कंपलीट कर रहे थे। जब लुइ फर्स्ट सेमेस्टर की पढ़ाई कर रहे थे तब उनके कॉलेज में याहू के चीफ साइंटिस्ट आए थे। उन्होंने वहां पर एक ऐसा लेक्चर दिया जो लुई के दिमाग में बैठ गया। साइंटिस्ट उन प्राब्लम के बारे में बता रहे थे, जिनका समाधान याहू नहीं निकाल पाया था। इसी में एक समस्या थी बॉट की। साल 2000 में जब स्पैमर्स से याहू परेशान हो गया था। तब प्रीमियर ईमेल सर्विस शुरू की तो लाखों लोगों ने अकाउंट बनाए। यहीं से धोखाधड़ी का खेल शुरू हो गया। याहू को प्रतिदिन ईमेल लिमिट को 500 करनी पड़ी, लेकिन स्पैमर्स ने इसका भी तोड़ निकाल लिया और ज्यादा से ज्यादा अकाउंट बनाने लगे। इससे याहू परेशान हो गया।

लुइ यान वान ने निकाला ठोस उपाय कैप्चा

इसके बाद ठोस उपाय निकाला लुई यान वान ने। उन्होंने एक ऐसी साइबर सिक्योरिटी तकनीक विकसित की, जिससे इंसानों और बॉट का पता लगाया जा सके। इस सिस्टम के जरिए व्यक्ति को Numbers या Letters पढ़कर एक बॉक्स में टाइप करने होते थे। इसके पीछे का मकसद यही था कि मनुष्य टेढ़े-मेढ़े डिस्टार्टेड अक्षर और कैरेक्टर्स पढ़ लेंगे, लेकिन कंप्यूटर नहीं। इसकी मदद से ऑटोमेटेड साइनअप बंद हो गया। CAPTCHA बनाने का काम कंप्यूटर से ही किया जाता था, सो धीरे-धीरे कंप्यूटर भी कैप्चा पढ़ने लगा। फिर इस तकनीक पर गूगल की नजर पड़ी। 2009 में गूगल ने कैप्चा को खरीद लिया और इसका इस्तेमाल करने लगा। रिसर्च में पता चला कि कैप्चा को पढ़ने में कंप्यूटर 98 प्रतिशत सटीक हो गई है।

कुछ समय बाद कैप्चा को अपग्रेट कर लेटर्स और नंबर को हटाकर पिक्चर पर शिफ्ट किया गया। जैसा कि आपने देखा होगा कि किसी पिक्चर में ट्रैफिक लाइट वाले पार्ट्स के क्लिक करने को कहा गया हो, हालांकि मशीन अभी भी लर्निंग के पूरे मूड में थी और जल्द ही तस्वीरों को पहचानने लगी थी।

अब आया ReCaptcha Version3

तभी ReCaptcha Version3 को लाया गया। इस प्रक्रिया में आपको कोड भरने की जरूरत नहीं होती है। बस कंप्यूटर महोदय आपके सर्फिंग के आदतों से अंदाजा लगा लेता है। इस तकनीक में ऐसा टेस्ट चल रहा होता है, जो आपको पता नहीं चलता है। अगर आपके लैपटॉप का माउस का कर्सर एक खास पैटर्न से चल रहा है या सेम स्पीड में काम कर रहा है तो कंप्यूटर समझेगा कि यह किसी बॉट का कैरेक्टर है। हालांकि, धीरे-धीरे बॉट इसे भी समझने लगा है। अब बात यह आती है कि अगर मशीन यह सिस्टम भी समझ गई तो कैप्चा और मुश्किल करने पड़ेंगे।

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