मैदान में प्रत्याशी तो बहुत खड़े हैं, लेकिन नहीं जुड़े जमीन से

अमित तिवारी, जमशेदपुर : हे राम! आप खुद ही जानिए, जुगसलाई विधानसभा के शहरी मतदाताओं के मन में इसबार क्या चल रहा विचार। शुक्रवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे डि कोस्टा रोड में चुनावी चौपाल सजी थी। लोचन मंगोतिया बहुत नरम भाव से कहते हैं कि इसबार के चुनावी रण में हमारे यहां दो राम ताल ठोक रहे हैं। एक आजसू पार्टी से रामचंद्र सहिस तो दूसरा भारतीय जनता पार्टी के मोचीराम बाउरी। एक के नाम की शुरुआत राम से होती है तो दूसरा का अंत। इसपर अजय अग्रवाल तुरंत टिप्पणी करते हैं- यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है, लेकिन उनका कर्म ऐसा है कि कोई इसबार उनके चक्कर में फंसने वाला नहीं है। दो बार उन्हें मौका मिला लेकिन जीत के बाद चेहरा दिखाने तक नहीं आए। प्रशांत मिश्र कहते हैं कि रानी सती मंदिर के बगल में बीते कई माह से स्ट्रीट लाइट खराब है। इसकी शिकायत कई बार विधायक प्रतिनिधि से की गई लेकिन कोई पहल नहीं हुई। अश्विनी अग्रवाल कहते हैं कि दस साल बाद भाजपा ने इस सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा किया भी तो उन्हें कोई जानता नहीं। वैसे इसबार और भी कई प्रत्याशी खड़ा किए गए हैं, जिनका जमीन से कोई सरोकार नहीं है। राजेश कसेरा कहते हैं कि मैदान में झामुमो से मंगल कालिंदी भी हैं, लेकिन वह कभी भी लोगों के बीच में नहीं आते। खैर, उनकी बात छोड़िए, जीतने वाला भी तो नहीं आया। दिनेश अग्रवाल कहते हैं कि जबतक जुगसलाई का यह शहरी इलाका एक अलग विधानसभा क्षेत्र घोषित नहीं हो जाता तबतक यहां का विकास संभव नहीं है। इसका समर्थन चुनावी चर्चा में शामिल अधिकतर लोगों ने किया। सुनील चौधरी कहते हैं कि इसबार का मतदान भ्रष्टाचार व जुगसलाई के विकास को ध्यान में रखते हुए करेंगे। यहां के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। यह शर्म की बात है कि आजादी के इतने सालों के बाद भी हम बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लड़ रहे हैं। सुनील कुमार तल्ख अंदाज में कहते हैं कि अब जरूरत राजनीति में बदलाव करने की है। वह कहते हैं कि हमारे नेताओं के पास कोई प्लानिंग नहीं। इसका उदाहरण जुगसलाई में देख सकते हैं। नाली निर्माण के लिए सड़क खोद कर छोड़ दी गई। जबकि नाली पहले बननी चाहिए थी। अब सभी सड़कें खराब हो चुकी हैं। फिर से उसे बनाना पड़ेगा।

डि कोस्टा रोड से दैनिक जागरण की टीम बाटा चौक पहुंची। वहां भी कुछ लोगों का समूह चुनावी चर्चा में मशगूल था। कमल अग्रवाल कहते हैं कि उनकी पसंद का प्रत्याशी कभी भी जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र में खड़ा नहीं हुआ। नतीजा है कि एक राष्ट्रीय पार्टी को मतदान कर देता हूं। उनकी बातों को आगे बढ़ाते हुए रविप्रकाश कहते हैं कि हमारे नेता के पास न कोई विजन होता है और न ही वह हमारी बातों को सुनने के लिए आते हैं। सिर्फ चुनाव के समय ही नजर आते हैं। उसके बाद गायब हो जाते हैं। ऐसे में वह हमारे बीच जगह कैसे बना सकते हैं? महावीर प्रसाद कहते हैं कि यह दुर्भाग्य है कि हमारे देश में आठवीं-नौवीं पास भी विधायक, मंत्री बन जाते हैं। ऐसे में वह बेहतर निर्णय भला कैसे ले सकते हैं। उनको अपना समझ ही नहीं होता तो वह दूसरे का भला क्या करेंगे? इसपर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। घनश्याम सिन्हा कहते हैं कि छोटे-छोटे पदों पर नौकरी के लिए लिखित व मौखिक परीक्षा देनी पड़ती है। इसके बाद ही उन्हें नौकरी मिल पाती है, लेकिन जो सबसे जरूरी पद (जनप्रतिनिधि) है, उसके बारे में चर्चा कोई नहीं करना चाहता। जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान विधायक रामचंद्र सहिस हैं। उनका मुकाबला भाजपा के मोचीराम बाउरी और झामुमो के मंगल कालिंदी से है। त्रिकोणीय मुकाबला होने से चुनाव दिलचस्प हो गया है। परिणाम भी हैरान करने वाला होगा।

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