शिक्षकों पर जिम्‍मेदारी का दोहरा बोझ, बच्‍चों की पढाई संग करें डाटा इंट्री Jamshedpur News

शिक्षक शाम चार बजे से पीपुल्स अकादमी पहुंचकर डाटा इंट्री का कार्य करेंगे।

18 जनवरी को एसडीओ धालभूम की ओर से एक नया आदेश जारी हुआ है। स्कूल करने के बाद इन शिक्षकों को पटमदा व मुसाबनी से रोज आना समझ से परे है। आते भी हैं तो सुबह फिर स्कूल जाकर कार्य कैसे होगा यह कोई नहीं बता पा रहा है।

Publish Date:Fri, 22 Jan 2021 10:52 AM (IST) Author: Rakesh Ranjan

जमशेदपुर, जासं। एक तरफ जहां शिक्षा विभाग की ओर से किसी भी शिक्षक के प्रतिनियोजन पर रोक है वही दूसरी ओर प्रशासनिक पदाधिकारियों द्वारा शिक्षकों एवं शिक्षा विभाग के कर्मियों को विभिन्न तरह के कार्यों में प्रतिनियोजित किया जा रहा है।

वर्तमान में 18 जनवरी को एसडीओ धालभूम की ओर से एक नया आदेश जारी हुआ है। इस आदेश में तीन शिक्षकों एवं हाईस्कूलों के दो लिपिकों की प्रतिनियुक्ति पीपुल्स अकादमी न्यू बाराद्वारी उच्च विद्यालय परिसर में स्थापित कोविड-19 संक्रमितों की संख्या में हो रही बढ़ोत्तरी के मद्देनजर गठित कोषांग में की गई है। इस आदेश में यह साफ किया गया है कि ये शिक्षक व कर्मचारी पहले सुबह से तीन बजे तक स्कूलों का कार्य करेंगे, उसके बाद वे शाम चार बजे से पीपुल्स अकादमी पहुंचकर डाटा इंट्री का कार्य करेंगे।

एसडीपीओ कार्यालय ने जारी किया है आदेश

धालभूम एसडीओ कार्यालय से यह आदेश पारित हुआ है। आदेश में बोड़ाम के प्राथमिक विद्यालय तिलाबनी के शिक्षक ब्रम्हपद महंती, पटमदा कुंदरुजोना प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक राजेश कुमार, पटमदा शिसदा प्राथमिक विद्यालय के सहायक शिक्षक सुब्रत कुमार मल्लिक, मुसाबनी स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय माटीहाना के लिपिक गौरव कुमार, पोटका स्थित उत्क्रमित उच्च विद्यालय हेसड़ा के लिपिक गौरव सेन को पीपुल्स अकादमी के डाटा इंट्री केंद्र में रोज शाम चार बजे डाटा इंट्री के लिए योगदान देने को कहा गया है।

आदेश का तामिला शिक्षकों के लिए आसान नहीं

स्कूल करने के बाद इन शिक्षकों को पटमदा व मुसाबनी से रोज आना समझ से परे है। आते भी हैं तो सुबह फिर स्कूल जाकर कार्य कैसे होगा यह कोई नहीं बता पा रहा है। पीपुल्स अकादमी न्यू बाराद्वारी स्थित इस केंद्र में पहले से दस से अधिक शिक्षक व कर्मी प्रतिनियुक्त हैं। वे यहां सुबह से शाम तक बैठकर ही अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। वैसे भी डाटा इंट्री का कार्य अब काफी कम हो गया है। इसके लिए जिला प्रशासन के लिपिक ही काफी है।

 

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