प्राचीन भारत का गणित में योगदान विषय पर बोले वक्ता- वेदों एवं शास्त्रों में गणित का स्थान सबसे ऊपर

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास झारखंड की परिचर्चा में वक्ताआें ने कहा कि वेदों एवं शास्त्रों में गणित का स्थान सबसे ऊपर है । प्राचीन ऋषि-मुनियों ने गणित के महत्व को समझा एवं हमें उससे रूबरू भी कराया। भारत आज वैदिक गणित के क्षेत्र में पूरे विश्व में अग्रणी है।

Rakesh RanjanMon, 12 Jul 2021 09:32 AM (IST)
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास झारखंड की परिचर्चा में शामिल वक्ता।

जमशेदपुर, जासं। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास झारखंड द्वारा प्राचीन भारत का गणित में योगदान विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में परिचय शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, वैदिक गणित के प्रदेश प्रमुख डा. ब्रज कुमार विश्वकर्मा के द्वारा हुआ।

कार्यक्रम में न्यास के प्रांत संयोजक डा. अमरकांत झा ने न्यास का परिचय कराते हुए कहा कि आज से 15 वर्ष पूर्व इस न्यास की स्थापना हुई । भारतीय संस्कृति के अनुरूप शिक्षा का प्रचार एवं उत्थान करना न्यास का उद्देश्य है। राष्ट्रीय नीति के अनुसार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाना एवं विकास करना न्यास का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का संस्कृति से नाता अति आवश्यक है। परिचर्चा में प्रस्तावना वैदिक गणित के सह प्रांत प्रमुख राजीव रंजन ने रखा। कार्यक्रम में विशिष्ट वक्ता डॉक्टर विमल कुमार मिश्रा, प्राचार्य , मारखम कॉलेज ऑफ कॉमर्स , हजारीबाग ने कहा भारत में प्राचीन काल के गणित आचार्यों ने वैदिक गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वेदों एवं शास्त्रों में गणित का स्थान सबसे ऊपर है । प्राचीन ऋषि-मुनियों ने गणित के महत्व को समझा एवं हमें उससे रूबरू भी कराया। भारत आज वैदिक गणित के क्षेत्र में पूरे विश्व में अग्रणी है। उन्होंने अनेक प्रसंगों एवं उदाहरणों के माध्यम से इस बात की पुष्टि की।

भारत का गणित के क्षेत्र में खास योगदान

मौके पर बतौर मुख्य वक्ता देवेंद्र राव देशमुख, राष्ट्रीय संयोजक, वैदिक गणित, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान ने अपने वक्तव्य में कहा भारत प्राचीन काल से ही गणित के क्षेत्र में पूरे विश्व में सर्वोपरि स्थान रखता है। प्राचीन भारत के गणित आचार्यों ने गणित के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण सूत्रों का निर्माण किया जिससे आज पूरा विश्व लाभान्वित हो रहा है। उन्होंने कहां गणित के क्षेत्र में भारत के गणितज्ञों का महत्वपूर्ण योगदान है । कार्यक्रम में प्रोफेसर गोपालजी सहाय , प्रदेश अध्यक्ष, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि प्राचीन भारत में सबसे अधिक गणित के क्षेत्र में विकास हुआ। प्राचीन काल के गणितज्ञों ने भारत ही नहीं पूरे विश्व को एक दिशा दी। कार्यक्रम का संचालन सत्येंद्र मिश्रा, विभाग प्रमुख के द्वारा हुआ। कार्यक्रम में ओम प्रकाश सिन्हा, विभाग निरीक्षक, हजारीबाग विभाग सहित अनेक शिक्षाविद , प्राध्यापक एवं आचार्य बंधु -भगिनी उपस्थित थे।

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