Jharkhand Politics: शहादत दिवस पर याद किए गए देवेंद्र माझी, दो बार रहे थे विधायक, बनायी थी अपनी पार्टी

Jharkhand Politic 1980 में देवेन्द्र माझी चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र से जोड़ा पत्ता चुनाव चिन्ह के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से लड़े थे। उस समय इन्हें कांग्रेस का समर्थन मिला था लिहाजा सफलता उनके हाथ लगी। उन्होंने जगन्नाथ बांकिरा को भारी मतों के अंतर से हराया था।

Rakesh RanjanThu, 14 Oct 2021 05:24 PM (IST)
देवेन्द्र माझी एक नेता ही नहीं राजनीतिक-सामाजिक विषयों के अच्छे ज्ञाता भी थे।

चक्रधरपुर, जागरण संवाददाता। झारखंड के चक्रधरपुर और मनोहरपुर के विधायक रह चुके जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए आंदोलन करने वाले शहीद देवेंद्र माझी की 27वीं पुण्यतिथि पर धर्मपत्नी व राज्य की कैबिनेट मंत्री जोबा माझी ने चक्रधरपुर के पंप रोड स्थित आवास में समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मौके पर मंत्री जोबा माझी का पूरा परिवार सहित पार्टी कार्यकर्ता व समर्थक भी शामिल रहे।

 दो बार विधायक रहे थे देवेन्द्र, बनाई थी अपनी पार्टी

देवेन्द्र माझी एक नेता ही नहीं राजनीतिक-सामाजिक विषयों के अच्छे ज्ञाता भी थे। एक किसान पुत्र होने के नाते वे तमाम उम्र अपनी मिट्टी से जुड़े रहे। स्वर्गीय माझी चक्रधरपुर में बीड़ी मजदूरों को संगठित कर शोषण एवं शोषकों के खिलाफ आंदोलन करते थे। सन् 1978 के आसपास झारखंड मुक्ति मोर्चा का सिंहभूम जिले में आविर्भाव एवं विस्तार हुआ। जिसके प्रमुख व तत्कालीन अध्यक्ष देवेन्द्र माझी ही थे। वर्ष 1980 से पूर्व विधानसभा चुनाव में देवेन्द्र माझी शेर चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरे थे। पराजित होने के पश्चात लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने किस्मत आजमाई। इस बार भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। उस समय वे अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बागुन सुम्बरूई से हार गये थे।

झामुमो के टिकट से पहली बार जीते

1980 में ही देवेन्द्र माझी चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र से जोड़ा पत्ता चुनाव चिन्ह के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से लड़े थे। उस समय इन्हें कांग्रेस का समर्थन मिला था, लिहाजा सफलता उनके हाथ लगी। उस समय उन्होंने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जगन्नाथ बांकिरा (जनता पार्टी) को भारी मतों के अंतर से हराया था। 80 में ही चुनाव जीतने के बाद पार्टी में कुछ मतभेद के कारण उन्होंने पृथक रूप से झारखंड मुक्ति मोर्चा डेमोक्रेटिक का गठन किया। इसी बीच वर्ष 1982 में वे जोबा माझी के साथ परिणय सूत्र में बंध गये। वर्ष 84 के लोकसभा का उन्होंने चुनाव लड़ा, परन्तु हार गये। इस चुनाव में भी उनकी लड़ाई बागुन सुम्बरूई से ही थी। इसके बाद सन् 85 में चक्रधरपुर विधानसभा क्षेत्र को छोड़ कर उन्होंने मनोहरपुर विधानसभा की ओर रुख किया एवं 85 के विस चुनाव में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी रत्नाकर नायक को हरा कर मनोहरपुर विस क्षेत्र में भी फतह हासिल की।

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