अपराधियों का अड्डा बना ब्रिटिश काल का पुलिस अस्पताल

मनोज सिंह, जमशेदपुर : शहर के बीचोबीच साकची स्थित पुलिस अस्पताल असमाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। यहां पर जुआ खेलने व शराब-गांजा पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। ब्रिटिश काल में बने इस अस्पताल में कभी दिनभर चहल-पहल रहती थी। चारदीवारी नहीं होने से लंबा-चौड़ा यह अस्पताल अनैतिक लोगों का ठिकाना बन गया है। अब स्थिति यह हो गई है कि उधर से पुलिसकर्मियों के साथ ही आम आदमी गुजरने से गुरेज करता है।

अस्पताल में एक रिटायर डॉक्टर स्वर्ण सिंह अपना निश्शुल्क सेवा देते हैं, जबकि सरकार की ओर से एक फार्मेसिस्ट नियुक्त है। जिनके भरोसे पुलिसकर्मियों का इलाज होता है। एक पुलिसकर्मी ने दबी जुबान से बताया कि यह थके-हारे जवानों के रेस्ट करने के लिए मुहर लगाने वाला अस्पताल बनकर रह गया है।

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दुर्दशा के लिए सरकार व बड़े अधिकारी दोषी

आठ साल से यहां चौकीदारी कर रहे बुजुर्ग मोतीलाल मुखी अस्पताल की दुर्दशा के लिए सरकार व बड़े अधिकारियों को दोषी ठहराते हैं। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में कभी हर तरह की सुविधा उपलब्ध थी। एक्सरे मशीन से लेकर खून की जांच की जाती थी। गंभीर रूप से बीमार पुलिसकर्मियों के लिए 15 बेड लगे हुए थे। अस्पताल में इलाज कराने वालों की भीड़ लगी रहती थी। आज अनदेखी के कारण इतना बड़ा अस्पताल वीरान हो गया है।

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अस्पताल के चारों ओर गंदगी का अंबार

अस्पताल में न बेड है, न उपकरण। कोई स्थायी डॉक्टर भी नहीं। रात की बात छोड़ दीजिए, दिन के उजाले में भी यहा जुआ खेला जाता है। चोर अड्डेबाजी करते हैं। गंदगी का अंबार है। अंदर प्रवेश करते ही शराब व कोरेक्स की बोतलें बिखरी मिलती हैं। बदबू इतना कि यहां से लोग गुजरना नहीं चाहते।

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पुलिस विभाग को अस्पताल का भवन बनाने के लिए पत्र लिखा गया है। भवन बन जाने के बाद यहां पर दो डाक्टरों व उनकी टीम की स्थायी नियुक्ति की जाएगी। वर्तमान में एक रिटायर डॉक्टर छह माह से रखा गया है। शहर के सबसे पॉश इलाके में रहने के बावजूद हम इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। मैं अपने स्तर से इसे सुधारने की कोशिश करूंगा।

- अनूप बिरथरे, वरीय पुलिस अधीक्षक, जमशेदपुर

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